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बन्दे मैं कहा है दम - बन्दे काँप रहे हर दम

आओ जवानो तुम्हे दिखाए पढ़े लिखे बच्चे हिन्दुस्तान की 

संसद से सुप्रीम कोर्ट सब के सब चुप बैठे यही सच्चाई है हिन्दुस्तान की।।

बन्दे मैं कहा है दम - बन्दे काँप रहे हर दम

बन्दे मैं कहा है दम - बन्दे काँप रहे हर दम

जनता से रखवाली करता - गोदी मीडिया बफादार है।।

बड़ी बड़ी रैली है करता - भारत का चौकीदार ही सम्राट है

जनता बेचारा भूखा मरता - जुमलों का ही घाट है ।।

बात बात मैं जाट जाट मैं यहाँ बीजेपी का ही ठाठ है।।

दिखाओ इनको समझाओ इनको ये काम नहीं वफादार की

जिस देश को ये लूट रहे - ये नहीं किसी के बाप की।।

बन्दे मैं कहा है दम - बन्दे काँप रहे हर दम

बन्दे मैं कहा है दम - बन्दे काँप रहे हर दम

ये है हमरा पर्शाशन - नाज इसे झूठा फ आई  आर  लगाने पे।

इसने सारा जीवन रिस्वत माँगा पेन किताबी बातो पे।।

ये परताप इन्हे मिला है गद्दार वर्दी धरो पे

कूद पड़े है यहाँ हजारो संस्थाए फिर से भारत को आजादी दिलाने पे।।

बोल रही है सब की मांगे नौकरी दे दो महंगाई कर दो काम हर एक सामान की।

इस मिटटी पे अब जीने दो - शर्म करो हमारे पूर्वजो की बलिदान की।।

बन्दे मैं कहा है दम - बन्दे काँप रहे हर दम

बन्दे मैं कहा है दम - बन्दे काँप रहे हर दम

देखो केंद्र दिल्ली है - यहाँ पे केजरीवाल दुबारा जीता था

कृषि कानून को मंत्री मंडल मैं पहली बार इसी ने तो फाड़ा था।।

हर किसान आंदोलन करते पूरा देश जिनके पीछे खड़ा था

नहीं चाहिए तेरा कानून एक बच्चा बच्चा ने बोलै था।।

हरने लगे बीजेपी तो झट से वापस ले ली कानून किर्षि किसान की

इस मिटटी पे अब जीने दो - शर्म करो हमारे पूर्वजो की बलिदान की।।

बन्दे मैं नहीं है दम - बाँदा कापें हर दम

बन्दे मैं कहा है दम - बन्दे काँप रहे हर दम

बैंको की हालत पतली देखो - इन्होने ही दिया था सब को ऋण यहाँ।

अब ये मत पूछो कितने घोटाले हो रहे है रोज यहाँ

एक तरफ करोना दूसरी तरफ महंगाई बढ़ रही थी यहाँ

हर घर तिरंगा पे दे रहे थे पि ऍम  को गाली यहाँ

ठेके और थाने मैं सबको फसा के लूट रहे है रोज यहाँ

यहाँ लगा दी माँ बहनों ने भी बाजी अपनी जान की

इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की

बन्दे मैं नहीं है दम बन्दे काँप रहे हर दम

बन्दे मैं कहा है दम - बन्दे काँप रहे हर दम

यह देखो पंजाब यहाँ का हर बाँदा दिलवाला है

यहाँ का बाँदा बाँदा लंगर सेवा करने वाला है

मान है इनको की इन्होने गुरुओ का ग्रन्थ संभाला  है

मुठी मैं पैसा काम और ये महंगाई ये कैसा टाइम आला है

क्या आजादी है यही हमारी - पूर्वजो की कुर्बान की

इस मिटटी मैं क्यों जिए जो धरती हो गलिआन की

बन्दे मैं नहीं है दम - बन्दे काँप रहे हर दम

बन्दे मैं कहा है दम - बन्दे काँप रहे हर दम

Writen By

Bhanu Pratap

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