ज़िद्दी इश्क़ - 9 Sabreen FA द्वारा कुछ भी में हिंदी पीडीएफ

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ज़िद्दी इश्क़ - 9

रामिश सोफिया को लेने के लिए उसके घर पहुंचा और उसने गाड़ी से निकल कर दरवाजे की बेल बजाई।

सोफिया जो भी शावर लेकर निकली थी उसके बाल अभी भी गीले थे उसने अपने बालों को हल्का-हल्का साफ किया और दरवाजा खोलने के लिए चली गई।

सोफिया ने दरवाजा खोला तो रामिश को सामने खड़ा पाया।

"आ आपने बताया नहीं था कि आप था कि कब तक आएंगे तो इसीलिए मैं तैयार नहीं हुई थी।"

रामिश को देखते ही सोफिया ने मासूमियत से कहा।
जबकि रामिश की नजर उसके हुलिए पर थी जो धीले ट्राउजर और सफेद शर्ट में खड़ी उस के सब्र का इंतिहान ले रही थी। उसके बालों से पानी के कतरे निकल कर उसकी शर्ट को भिगो रहे थे।

रामिश ने एक गहरी सांस ली और अपने जज़्बातों को काबू किया और गंभीर लहजे में बोला।

"ह्म्म्म,,ठीक है तुम तैयार हो जाओ मैं उतनी देर इंतेज़ार कर लेता हूं।"

"ठ,,,,ठीक है आप अं,,,,,अंदर आ जाये।"

सोफ़िया ने झिझकते हुए कहा और दरवाज़े से हट गई ताकि रामिश अंदर आ सके।

उसकी बात सुनकर रामिश ने अपना सिर हिलाया और उसके पीछे अंदर आया और सोफे पर बैठ गया।

सोफ़िया जो चेंज करने के लिए अपने रूम में जा रही थी कुछ याद आने पर पीछे मुड़ कर रामिश से बोली।

"रामिश आप कॉफी पियेंगे या जूस पीना पसंद करेंगे।"

रामिश जो अपना फ़ोन यूज़कर रहा था सोफ़िया के मुंह से अपना नाम सुनकर उसकी एक बीट मिस हो गयी।

उसने सोफ़िया को देखा जो अपनी उंगली मरोड़ती हुए उससे पूछ रही थी।

रामिश ने उसकी बात सुनकर मोबाइल जेब मे रखा और सोफे से उठ कर उसकी तरफ बढ़ने लगा। उसे अपनी तरफ आते देख सोफ़िया अपना कदम पीछे लेने लगी।

वोह जैसे जैसे आगे बढ़ रहा था सोफ़िया अपने कदम पीछे ले रही थी यहां तक कि अब उसे अपने पीछे दीवार महसूस होम लगी।

रामोश ने उसके इर्द गिर्द मौजूद दीवार पर अपने हाथ रखे और उसकी तरफ झुकते हुए जज़्बात से चूर लहजे में बोला।

"क्या चाहती हो जो अपने जज़्बातों को काबू किये बैठा हूँ उसका बंद तोड़ दु, ह्म्म्म बोलो।"

उसकी बात सुनकर सोफ़िया का पूरा चहेरा टमाटर की तरह लाल हो गया और वोह अपनी उंगलिया मरोड़ ने लगी।

रामिश ने जब उसे उंगलिया मरोड़ते देखा तो उसका हाथ थाम कर उसकी उंगलियों कर अपना होंठ का स्पर्श छोड़ने लगा जबकि उसे ऐसा करते देख सोफ़िया की टाँगे कांपने लगी।

उसकी हालत देख कर रामोश ने उसका दूसरा बाज़ू सोफ़िया की कमर में डाल कर उसे अपने करीब किया और उस के माथे से बाल हटा कर उसके माथे पर किस किया और उसकी हालत देख कर उसे छोड़ कर कुछ दूर के फैसले पर खड़ा हो गया।

सोफ़िया ने जब उसे छोड़ते देखा तो दीवार से लग कर गहरी गहरी सांसें लेने लगी। मगर जब रामिश कि नज़रे खुद पर महसूस की तो काँपती टाँगों से जल्दी से अपने कमरे की तरफ भागी और दरवाज़ा बंद करके गहरी गहरी साँसे लेने लगी।

जबकि रामिश का स्पर्श अपनी उंगलियों और माथे पर महसूस करते हुए उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गयी।

रामिश ने उसे भागते देखा तो हल्का सा ठहाका लगाया और वापस जा कर सोफे पर बैठ गया।

थोड़ी देर बाद सोफ़िया कपड़े बदल कर आई तो रामिश फ़ोन में बिजी था।

"र.....रामिश चले मैं तैयार हूं।"

सोफ़िया ने अटकते हुए रामिश से कहा जो फ़ोन बिजी था।

रामिश ने उसकी आवाज़ सुनकर नज़रे उठायी तो वोह तैयार हो कर नज़रे ज़मीन में गाढ़े उसके सामने खड़ी थी।

रामिश ने अपना मोबाइल जेब मे डाल कर उठते हूये उसे चलने के लिए कहा।

उसकी बात सुनकर सोफ़िया छोटे छोटे कदम उठाते हुए आ कर गाड़ी में बैठ गयी।

उसके बैठते ही रामिश ने गाड़ी स्टार्ट की और सोफ़िया को देखा जिसका चेहरा हल्का हल्का लाल था।

"दोबरा अपना हुलिया ठीक करके दरवाज़ा खोलना और पूछ कर दरवाज़ा खोला करो, अगर दोबारा मैं ने तुम्हे इस हुलिए में किसी के सामने देखा तो तुम्हारे लिए अच्छा नही होगा।"

रामिश ने सख्त लहजे में कहा क्योंकि उसे सोफ़िया का अपना हुलिया देखे बिना दरवाज़ा खोलना पसंद नही आया था।

"ज,,,,,,,,,जी दोबारा ध्यान रखूँगी।"

सोफ़िया ने उसकी आवाज़ में सख्ती महसूस करते हुए धीरे से कहा।

..........

ब्लैक रोज़ मेंशन पहोंच कर रामिश सोफ़िया को माहेरा के कमरे के पास ले गया और बोला।

"अगर तुमने उसकी मदद करने की कोशिश की तो याद रखना की वोह ज़िंदा नही बचेगी।"

उसकी बात सुनकर सोफ़िया ने अपना सिर हिलाया और कमरे में चली गयी।

"अच्छा हुआ सोफ़िया तुम यहाँ आ गयी, प्लीज मेरी यह से निकलने में मदद करो।"

माहेरा सोफ़िया को देख कर खुशी से गले लगाते हुए बोली।

"महेरु,,,,,,स,,,,सॉरी मैं तुम्हारी मदद नही कर सकती हूं, इन लोगो ने मुझे बताया है कि तुम्हारी जान को खतरा है।"

सोफ़िया मेहरा को देख कर बे बसी से बोली।

"वोह लोगो तुमसे झूठ बोल रहे है, वोह माज़ बस मुझे अपने पास रखना चाहता है। वोह मुझे अपनी मिल्कियत समझता है, अब मुझे भी समझ आ गया है तुम भी उन लोगो के साथ मिली हुई हो............."

माहेरा जो अपनी ही धुन में बोले जा रही थी जब उसने सोफ़िया की तरफ देखा जो बिना आवाज़ के रो रही थी।

वोह जानती थी सोफ़िया का दिल कितना छोटा था वोह छोटी छोटी बात पर रोने लगे जाती थी।

उसे रोते हुए देख कर माहेरा का सत्र्त गुस्सा झाग की तरह बैठ गया और उसने जल्दी से सोफ़िया को गले लगा लिया।

उसके गले लगाते ही सोफ़िया ज़ोर ज़ोर से रोने लगी।

"शशशशि, सॉरी यार मेरा ऐसा कोई मतलब नही था वोह तो गुस्से में मुंह से निकल गया।"

माहेरा सोफ़िया को बेड पर बिठाते हुए बोली तो सोफ़िया को भी थोड़ा सुकून हुआ।

"माहेरा तुम्हारे डैड का फ़ोन आया था...."

उसके बाद सोफ़िया ने उसे सारी बात बता दी।

"अच्छा हुआ सोफ़िया तुमने उन्हें नही बताया नही तो वोह परेशान हो जाते।"

माहेरा ने सोफ़िया की बात सुनकर कहा। वोह अपने डैड को कोई टेंशन नही देना चाहती थी।

"यह तुम्हारे पैर पर चोट कैसे लगी महेरु।"

सोफ़िया ने उसके पैर पर बंधी पट्टी को देख कर परेशान हो कर पूछा।

"कुछ नही टेबल स्व टकरा गई थी।"

माहेरा ने अपने पैर को देखते हुए कहा।

अभी वो दोनों बात ही कर रही थी कि रामोह दरवाज़ा खोल कर अंदर आया और सोफ़िया को चलने के लिए कहा।

रामिश को बात सुनकर माहेरा बोली।

"अभी तो आयी है और आप इसे ले कर जाने लगे, थोड़ी देर तो रहने दो।"

"माज़ ने कहा है यह तुम्हारी सज़ा है जब तक वोह नही कहेगा कोई भी तुमसे नही मिलेगा और ना ही तुम किसी से मिल सकती हो।"

रामिश ने माहेरा को जवाब दे कर सोफ़िया की तरफ देखा तो वोह जल्दी से माहेरा के गले लग कर लग कर बोली।

"बाये, मैं फिर तुमसे मिलमे आउंगी।"

"इस ज़ुकाम (माज़) को तो मैं देख लुंगी, कमीने इंसान मेरी दोस्त से भी मुझे सुकून से बात करने नही दिया।"

रामिश की बात सुनकर माहेरा ने गुस्से से बड़बड़ाते हुए कहा।

जबकि माज़ को ज़ुकाम कहने पर रामिश ने अपनी हंसी दबाई और सोफ़िया के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।

............

घर पहोंच कर सोफ़िया गाड़ी से निकलने ही वाली थी कि रामिश ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया और उसका चेहरा अपनी तरफ किया तो देखा उसके चेहरे पर आंसुओ के हल्के हल्के निशान थे, रामिश उसका चेहरा सहलाते हुए बोला।

"तुम रोई थी?"

हाँ, जब माहेरु से मिली थी तो रोना आ गया था।

सोफ़िया ने उसका हाथ आपमे चेहरे से हटाते हुए कहा।

जबकि उसकी यह हरकत रामिश को बिकुल पसंद नही आई।

इसीलिए सोफ़िया को बिना कुछ कहे ही उसने उसका बाज़ू छोड़ दिया और सीधा हो कर बैठ गया।

सोफ़िया कुछ कहने ही वाली थी कि रामिश ने उसे जाने के लिए कहा।

जबकि उसकी बात सुनकर सोफ़िया तेज़ी से गाड़ी से उतरी और अपने घर के अंदर जा कर दरवाज़ा ज़ोर से बंद किया।

वोह रोने ही वाली थी कि तभी उसे उसकी डैड की आवाज़ सुनाई दी।

"सोफ़िया तुम आ गयी हो बेटा।"

"जी डैड लेकिन आज तो आप की फ्लाइट थी?"

सोफ़िया ने जल्दी से अपना चेहरा साफ किया और जल्दी से टीवी लॉन्च में चली गयी।

"वोह मेरी फ्लाइट कैंसिल हो गयी है इसीलिए मैं घर आ गया। अब मेरी कल की फ्लाइट है और कंपनी के एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में मुझे दो महीने के लिए आउट ऑफ कंट्री जाना होगा।"

सोफ़िया के डैड ने उसे अपने साथ बिठाते हुए कहा।

"कोई बात नही डैड मैं मॅनेज कर लुंगी। आप कहने में क्या खाएंगे बताए तो मैं बना देती हूं।"

सोफ़िया ने धीरे से कहा।

"कुछ भी बना दो मेरी नन्ही सी जान।"

उन्होंने सोफ़िया के माथे पर किस करते हुए कहा।
जबकि उनकी बात सुनकर सोफ़िया फ्रेश होने के लिए चली गयी।

.............…....

रामिश ने माहेरा की सारी डिटेल्स माज़ को दे दी थी। जिसे माज़ ने अच्छे से देख और पढ़ लिया था ताकि वक़्त आने पर वोह माहेरा को ब्लैकमेल कर सके।

माज़ जो अभी कॉन्फ्रेस कॉल से फ्री हुआ था रामिश उसके पास बैठ कर हिचकिचाते हुए बोला।

"मुझे तुम से एक ज़रूरी बात करनी है?"

"बोलो।"

माज़ ने उसकी तरफ देखते हुए कहा।

"मैं चाहता हु तुम्हारे साथ ही मैं भी शादी कर लूं।"
रामिश ने हिचकिचा कर कहा।

"छि,,,,छि रामिश तू ऐसा सोच भी कैसे सकता है।"
माज़ ने आंखों में शरारत लिए हुए कहा।

"इसमें कौन सी बुरी बात है।"

रामिश ने कंफ्यूज़ हो कर माज़ को देखते हुए कहा।

"बेटा यह बुराई नही यह तो महा पाप है।"

माज़ ने अपनी हंसी दबाते हुए सीरियस टोन में कहा।

"अबे मैं सोफ़िया से शादी करना चाहता हु तो इसमें कौन सी बुरी बात है।"

रामिश उसकी बात सुनकर झुंझला कर बोला।

"तो ऐसा बोल ना तू सोफ़िया से शादी करना चाहता है तुने तो कहा तू मेरे साथ ही शादी करना चाहता है तो मै........"

माज़ ने हस्ते हुए कहा।

जबकि उसकी बात सुनकर रामिश गुस्से से उसे घूर कर देखा।

"तुझे शर्म नही आती मुझसे ऐसी बाते करते हुए, तुझे तो यह बात डैड से करनी चाहिए थी ताकि वोह तेरी ख्वाहिश पूरी कर देते।"

"वैसे क्या दूसरी पार्टी (सोफ़िया) रेडी है तो मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नही है।"

माज़ ने पहेली बात हस्ते हुए कही जबकि आखिरी बात पर वोह सीरियस हो गया।

"ह्म्म्म, वोह राज़ी है। तुम अपनी बात करो तुम मेरा साथ दोगे जैसे मैं तुम्हारा दे रहा हु नही तो अगर मस्टर को पता चल गया कि तुम उनकी पीठ पीछे क्या कर रहे हो तो.........अंजाम तुम्हे अच्छे से पता है।"

रामिश ने उसे शेर खान के नाम से डराया।

उसकी बात सुनकर माज़ ज़ोर ज़ोर हस्ते हँसने लगा और बोला।

"तुम यह बताना मत भूलना की यह नायाब आईडिया तुम्हारा था...........और वैसे भी हम दोनों ने अब तक हर काम साथ मे किया तो भी साथ मे ही करते है।"

उसकी बात सुनकर रामिश ने सुकून की सांस ली, उसे उम्मीद थी कि माज़ उसे कभी न उम्मीद नही करेगा।

उनकी गैंग का रूल था जब कोई लीडर किसी लड़की से शादी करता था तो उसे एक खास ब्रेसलेट दिया जाता था। जब कोई उस ब्रेसलेट को देखता था तो जान जाता था कि यह किसी गैंग की लीडर की बीवी है, तो अगर कोई उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता तो उसकी गैंग का सफाया कर दिया जाता था। जैसे अल्बर्टो ने शेर खान की बीवी को मारा था तो उसकी पूरी गैंग को खत्म कर दिया गया था।

इसीलिए रामिश ने माहेरा की जान बचाने के लिए माज़ को येह आईडिया दिया था। ताकि कोई भी गैंग उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश ना करें......

.....…....….…….....

माहेरा जब सो कर उठी तो भूख की वजह से उसके पेट से आवाज आ रही थी। वह मुंह बनाते हुए बेड से उठी और फ्रेश होने के लिए वॉशरूम में चली गई। जब वह फ्रेश हो कर आई तो बेड पर गिरने वाले अंदाज में लेट गयी।

तभी कमरे का दरवाजा खुला और रोजी एक बैग के साथ अंदर आई और माहेरा से बोली।

" सर ने कहा है आप तैयार हो जाए वोह थोड़ी देर बाद आपसे मिलने आएंगे।"

रोजी अपनी बात पूरी करते ही कमरे से बाहर निकलने।

उसके जाने के बाद माहेरा ने जल्दी से उठ कर बैग खोला और उसमें से एक कपड़ा निकाल कर फ्रेश होने के लिए वॉशरूम में चली गई। वैसे भी उसे कल के पहने हुए कपड़ों में बहुत उलझन हो रही थी।

............

सोफिया जो भी गहरी नींद में सो रही थी अपना फोन बजने की आवाज सुनकर उसने बिना नंबर देखें फोन उठाया और नींद भरी आवाज में बोली।

" हेलो कौन बात कर रहा है?"

"रामिश बात कर रहा हूं तैयार हो जाओ 1 घंटे बाद तुम्हें तुम्हारे घर से पिक कर लूंगा।"

फोन की दूसरी तरफ से रामिश की आवाज सुनाई दी।

उसकी आवाज़ सुनते ही सोफिया की नींद भक से उड़ गई।

"मगर जाना कहां है?"

सोफ़िया जल्दी से उठते हुए बोली।

"फिक्र मत करो तुम्हें खा नही जाऊंगा।"

रामिश ने जवाब दिया और फोन कट कर दिया।

जब कि फोन कटते ही सोफ़िया ने बुरा सा मुंह बनाया और उठ कर तैयार होने के लिए चली गयी।

सोफिया जो कब से तैयार होकर रामिश का इंतजार कर रही थी मगर वह था कि आने का नाम ही नहीं ले रहा था।

तभी दरवाजे की बेल बजी सोफिया ने जल्दी दरवाजा खोला तो सामने एक आदमी अपने कान में फोन लगाएं खड़ा था।

सोफिया को देखते ही उसने फोन उसकी तरफ बढ़ाया तो उसने झिझकते हुए उससे फोन लिया और अपने कान से लगाया तो दूसरी तरफ से रामिश की आवाज़ आयी।

"मुझे एक जरूरी काम करना था तुम जैक्सन के साथ आ जाओ मैं तुमसे हु मिलूंगा।"

"ओके।" सोफ़िया ने धीमी आवाज़ में जवाब दिया।

"हम्म्म्म, फ़ोन जैक्सन को दो।"

रामिश ने कहा तो उसने फ़ोन जैसों को दे दिया।

उसके बाद उन दोनो ने बात की और जैक्सन ने सोफ़िया को अपने साथ चलने के लिए कहा तो वोह भी उसके साथ गाड़ी में बैठ कर ब्लैक रोज़ मेंशन के लिए निकल गयी।

..............

माहेरा जो कब से कमरे में चक्कर काट रही थी और माज़ के आने का इंतजार कर रही थी लेकिन वह की आने का नाम ही नहीं ले रहा था। वह गुस्से में कमरे में टहल रही थी कि तभी कमरे का दरवाजा खुला।

माज़ कमरे के अंदर आया और उसे अपने साथ चलने के लिए कहां लेकिन यह देखकर कि वह अपनी हिल ही नहीं रही है माज़ ने गुस्से से उसका बाजू पकड़ा और गसीटते हुए अपने साथ बाहर ले जाने लगा।

"छोड़ो मुझे घटिया इंसान।"

माहेरा अपना बाज़ू छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली।

"अगर तुम नहीं चाहती कि मैं तुम्हारी जबान काट लूं तो चुपचाप मेरे साथ चलो। हम कहां जा रहे हैं तुम्हें जल्दी पता चल जाएगा।"

माज़ ने गुस्से से कहा और जसे घसीटते हुए कॉरिडोर से दूसरे कमरे में ले गया जहां पहले से रामिश और 5 लोग और मौजूद थे।

माज़ ने माहेरा को सोफे पर बिठाया और निकाह शुरू करने के लिए कहा जबकि निकाह का नाम सुनते ही माहेरा वहां से उठने ही वाली थी की माज़ ने उसका इरादा भापते हुए उसके बाज़ू को पकड़ लिया।

" छोड़ो मुझे घटिया इंसान मुझे तुमसे शादी नहीं करनी।"

माहेरा गुस्से से चीखते हुए बोली जबकि उसके बात सुनकर माज़ ने उसके बाजू को और जोर से पकड़ा और अपनी जेब से फोन निकाल कर उसके सामने कर दिया।

जब कि माहेरा उसके फ़ोन अपने भाइयों की वीडियो देख कर शोकड हो गयी।

"य,,,,येह तुम्हारे पास कहा से आई।"

माहेरा ने पूछा और अगले ही पल उसके दिमाग ठनका और वोह गुस्से से काँपती हुई अव में बोली।

"अगर तुमने उन्हें नुकसान पहूंचाने की कोशिश की तो मैं तुम्हारी जान ले लुंगी।"

"बकवास बंद करो और अगर तुमने यह शादी नही की तो तुम्हारे भाइयों को मैं ऐसा गयेब करूँगा की दोबरा तुम उनकी शक्ल भी नही देख पाओगी। अगर तुम चाहती हो कि वोह सही सलामत रहे तो चुप चाप मेरी बात मानो।"

माहेरा उसकी बात सुनकर डर गई और जल्दी से अपना सिर हिलाया। माहेरा को उसके भाई उसकी जान से भी प्यारे थे वोह अपनी वाजह से उनकी जान खतरे में नही डाल सकती थी।

माज़ ने फिर से निकाह शुरू करने के लिए कहा तो इस बार माहेरा ने कड़वा घूंट पीकर निकाह कुबूल किया।

निकाह पूरा होने के बाद रामिश माज़ के गले लगा।

माहेरा लगातार ज़मीन को ही घूर रही थी, तभी दरवाज़ा खुला। दरवाज़ा खुलने की वज़सुनकर माहेरा ने दरवाज़े की तरफ देखा तो सोफ़िया वहां खड़ी थी।

सोफ़िया उसके पास आ ही रही थी कि तभी रामिश उसका हाथ पकड़ कर कमरे से बाहर ले कर चला गया।

माहेरा उन दोनों को कमरे से बाहर जाते देख रही थी कि तभी माज़ की ढेरी आवाज़ उसे अपने कान में सुनाई दी।

"कैसा महसूस कर रही हो मिसेस माज़ खान? वॉज़ तुम खामोश ज़्यादा अच्छी लगती हो और अभी तो तुम्हारे लिए एक सरप्राइज बाकी है।"

माहेरा ने उसकी बात सुनी तो कुछ सोचते हुए उसकी तरफ देख कर बोली।

"तुम्हारी बीवी बन कर मुझे ज़ुकाम हो रहा है मिस्टर माज़......हुन........और मुझे पता है तुम्हारा सरप्राइज क्या अब तुम्हारा वोह चमचा रामिश मेरी दोस्त को धमका कर उससे शादी करेगा इसीलिए वोह उसे ले कर बाहर गया ह।
तुम सब एक जैसे ही हो घटिया..............."

माज़ को उसकी पहेली बात समझ नही आई जबकि उसकी दूसरी बात सुनकर माज़ ने ठहाका लगाया और उससे बोला जो अब उसे घर रही थी।

"वैसे तुम काफी समझदार हो लेकिन तुमने मेरे सर सरप्राइज खराब कर दिया और जो तुम हमें घटिया कह रही हो ना अभी तुमने हमारा घटियापन देखा ही कहा है। इसीलिए दोबरा यह वर्ड बोलने से पहले सौ बार सोच लेना वरना तुम्हे अपना घटिया पन दिखाने में देर नही करूँगा।"

उसकी बात सुनकर माहेरा दोबारा ज़मीन को घूरने लगी और माज़ दूसरे आदमियों से बात करने लगा।

रामिश सोफ़िया को बाहर लाया और उसे साथ वाले कमरे में ले जा सोफ़िया का हाथ छोड़ा तो सोफ़िया ने उससे पूछा।

"रामिश माहेरा उस कमरे में क्या कर रही है?"

"उसकी शादी माज़ से हो गयी ताकि कोई उसे नुकसान ना पहुचाये। तुम वोह सब छोड़ो और मेरी बात सुनो ममैं आज तुमसे शादी करना चाहता हु और मुझे उम्मीद है तुम मना नही करोगी।"

सोफ़िया जो माहेरा की शादी का सुनकर सम्भली ही नही थी उसकी आगे की बात सुनके शोकड हो गयी और काँपती हुई आवाज़ में उससे बोली।

"मैं यह कैसे कर सकती हूं, मैं अपने डैड के बिना इतना बड़ा फैसला............"

रामिश को उससे से ऐसी ही उम्मीद थी वोह उसकी बात सुनकर ठंडी आवाज़ में बोला।

"यह फैसला तुम्हारा है सोफ़िया अगर आज नही तो कभी नही, अगर तुमने इनकार किया तो मैं दोबारा कभी तुमसे नही मिलूंगा।"

सोफ़िया जो कुछ कहने ही वाली थी रामिश उसकी बात काटते हुए बोला।

"मुझे तुम्हारी कोई बात नही सुननी है सोफ़िया। मुझे सिर्फ हाँ या ना में जवाब दो।"


कहानी जारी है..........