हमदर्द - 2 Harshada Dongare द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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हमदर्द - 2

भाई!!!... भाई!!!.... बाहर से नव्या आवाज लगाती है। उसके आवाज से आहान कि आँखे खुल जाती है।

आहान:- क्या हुआ नव्या।

नव्या:- आपने कल से कुछ नही खाया। फ्रेश होकर जल्दी निचे आ कर नाश्ता किजिए।

आहान:- तुम चलो आगे में आता हुँ।

नव्या चली जाती है। आहान उठकर मेहर के पास बैठता है। वो अबतक होश में नही आइ थी। वो ध्यान से मेहर कि तरफ देखता है। उसकी बॉडी सफेद पडने लगी थी। आखों के नीचे काले दाग पड गए थे।

वो मेहेर कि सिर पर हाथ फेरता है। और उठकर कपडे लेने जाता है। आलमारी से कपडे लेने के लिए अलमारी खोलता है तो ठिक सामने एक परपल कलर का शर्ट था। आहान उसे बाहर निकालता है। उससे उसकी यादे जुडी थी।

आहान अपनी आँखे बंद कर लेता है। और बिते सारे पल उसके सामने आ जाते है।

●●●●●●●●●

उनके शादी को चार - पाच दिन हुए थे । मेहेर और आहान की ठिक से बात नही हुई थी अबतक, मेहेर कुछ बोलने की कोशीश करती मगर आहान उसे अनदेखा करके चला जाता था ।

वो बहोत जल्दी में था । उसे एक शख़्स से मिलने जाना था । मेहेर उसकी तरफ ही देख रही थी , उसे कुछ केहना था पर बात मुह से निकलते निकलते हल्लक में अटक जाती थी । वो रुम से बाहर निकल रहा थी की मेहेर उसके सामने खडी हो जाती है ।

आहान:- अब क्या हुआ ?? क्यो मेरा रास्ता रोक रही हो ?? पहले ही बहोत वक्त हो चुका है । हटो यहा से मुझे जाने दो ।

मेहेर :- वो आपसे कुछ केहना था । व्.... वो

आहान:- क्या वो.... वो आगे भी कुछ बोलो । बेवजह मेरा वक्त जाया मत करो। तुम्हारे तरह मेरे पास फजुल का वक्त नही है ।

वो जरासा गुस्सा हो जाता है । मेहेर हिचकीचाते हुए बोलती है ।

मेहेर :- जी वो आपके लिए कुछ लाया था ।

मेहेर अलमारी से एक थैली निकालकर लाती है और आहान की हातो में थमा देती है ।

आहान:- देखो मेरे पास अब इन सब चिजो के लिए वक्त नही
है ।

मेहेर:- प्लीज देख तो लिजिए । बस दो मिनट लगेंगे।

आहान नाखुशी से ही उस थैली के अंदर देखता है । एक शर्ट था उसमे पर वो रंग देखकर उसे उसके पहले प्यार की याद आ जाती है । उस रंग से उसकी बहोत सारी यादे जुडी थी । वो गुस्सेसे ही वो शर्ट बेड पर फेक देता है ।


आहान:- इस कलर से मुझे बेहद नफरत है । और तुम्हे किसने कहा था यह सब करने के लिए। मुझे ना तो तुम पसंद हो और ना ही तुम्हारी दि हुइ कोई चिज। दूर रहा करो
मुझसे । ज्यादा बिवी बनने की कोशीश मत करो क्योकी वो तुम कभी बन नही सकती ।

आहान उसे धकेलकर बाहार चला जाता है ।
और वो बेचारी भरी हुइ आँखो से उस शर्ट की तरफ देखती रहती है। शादी से पहले ही उसने आहान के लिए उस शर्ट को खरिदा था। लेकीन आहान का कडवा बरताव उससे अब सहा नही जा रहा था। वो सोच लेती ही की आज कुछ भी कर के वह आहान से उसके इस रव्वये की वज़ह पुछेगी।


बहोत देर हो चुकी थी । रात के ग्यारह बज गए थे पर आहान लौटा नही था । उपर से बिनमौसम बारिश । मेहेर ख़िडकी से निचे जाकती है आहान अपने बाईक से निचे उतर जाता है। वो पुरी तरह से भिग चुका था। पैर लडकडा रहे थे । उसे ऐसी हालत में देखकर मेहेर टॉवल लेके दोडते हुए नीचे आ जाती है ।

क्रमश :

©®Harshada Dongare 🖤🖤🖤

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