हमदर्द - 1 Harshada Dongare द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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हमदर्द - 1

" फ़सानो में सुना है सिर्फ मोहब्बत के खुशनुमा किस्सें....असलियत में मोहब्बत कभी खुशी नही दिया करती बल्की ताउम्र का दर्द दे जाती है सिर्फ और सिर्फ दर्द"

आहान अपने हि खयालों में खोया हुआ था । आँखो में नमी थी । अपने बिखरे हुए रिश्ते को समेटते समटते आज ओ खुद बिखर गया था । सवाल हजारो थे लेकिन जवाब नही ।

फोन के आवाज से वो अपने खयालों से बाहर आ जाता है ।

नव्या:- भाई.... कहाँ हो आप ???....

आहान:- रास्तें में हि हुँ। कुछ देर में पहुच जाऊँगा । क्यों क्या हुआ?...

नव्या :- वो भाभी ।

आहान:- क्....क्या हुआ मेहर को ?... ओ ठिक तो है ना???...

नव्या:- भाई में फोन पर आपको कुछ नही बता सकती ।
प्लीज आप जल्द जल्द से जल्द घर आ जाओ।


आहान उस तालाब के यहाँ से उठता है और बाईक पर बैठ कर घर कि ओर निकल पडता है। उसे कुछ समज नही आ रहा था। इन कुछ दिनों में उसके जिंदगी कि उलजने बहुत बढ गयी ती। या मानो उसके खुशहाल जीवन को किसी कि बुरी नजर लग गयी थी ।

वो घर के बाहर पोहचता है और अपनी बाईक एक साइड में पार्क कर देता है। नव्या उसके पाँच साल के बच्ची को लेकर बाहर खडी थी। दोनो भी बहुत डरे हुए थे... ओ तुरंत उनके पास जाता है।

नव्या की डरी हुइ श़क्ल देखकर उसे समज आ जाता है कि आज भी मेहर ने कुछ किया है। आहान उसे अपने आँखो से हि चुप रहने का इशारा करता है और घर के अंदर चला जाता है।

मेहर सोफे केे उपर बैठी हुई थी । आहान को उसकी शक्ल ठिक से नही दिख रही थी इसलिए वो उसके पास आ जाता है। और उसे देखकर उसके पेरो तले जमीन हिल जाती है। मेहर के हातो में काच के तुकडे थे। और वो उन्हे अपने चेहरे पर जोर से मार रही थी। उसका मुँह और हाथ खून से सने पडे थे।

आहान जोर से चिल्लाकर उसके दोन्हो हाथों को पकड लेता है।

आहान :- व्हॉट आर यु डुइंग मेहर???... आर यु क्रेझी.. प्लीज य्.... ये छोड दो...

मेहर आहान को जोर से धकेल देती है। वो दुर जाकर गिर जाता है । उसे जोर से चोट लगी थी लेकिन उसे मेहर के आगे अपने दर्द का एहसास न था । वो फिर से उठकर उसके पास जाता है । मेहर उसे घुस्से से घूर रही थी।

मेहर :- कहा था ना मुझे छुने का नही ।

तेरी हिम्मत कैसे हुइ मुझे हात लगाने कि । एक बार में समज नही आता । जान से मार दुँगी में तुझे ।

मेहर वह चाकू से आहान पर वार करने वाली थी लेकिन वो उसके हाथों से चाकू छिनकर फेंक देता है। और उसे जोर से पकड लेता है।

आहान :- होश में आओ मेहर। क्या पागलपन है ये???... क्या हुआ है तुम्हे??? अगर कोई तकलीफ है तो मुझे बताओ । लेकिन प्लीज ये सब हरकते अब बंद करो।
मुझे तुम्हे ऐसे देखा नही जाता।

मेहर के नुर अब बदल जाते है। वो जोर से रोने लगती है। बेचारा आहान पुरी तरह से सहम गया था । उसे कुछ भी समज नही आता। देखते हि देखते मेहर अपने होश खो देती है और नीचे गिर जाती है।

आहान उसे अपने सिने से लगाकर रोने लगता है। उसके कपडे भी खून से भर गए थे । तब तक नव्या भी अंदर आती है । वक्त झाया न करते हुए वो तुरंत डॉक्टर को बुलाती है।

“ हर ख्वाब पुरा नहीं होता
हर कोई लकीरों में नही रहता...
तुट जाती है कही ख्वाइशे तकदीर के आगे"


बिस्तर पर बेजान पडी हुइ मेहर को देखकर आहान के आँखो से आँसू आ रहे थे। घाव उसके थे लेकिन दर्द आहान को हो रहा था। वो उसके हाथ को अपने हाथों में थाम लेता है।

आहान :- सच कहा है किसी ने “ जब कोई अपने पास हो तो हमे उसके होने से कोई फरक नही पडता लेकिन उसके दुर जाने के बाद उसकी एहमियत समज आती है।

मेहर में तुम्हे समज न सका तुम्हे खुद से दूर करने कि कोशिश कि मगर अब जान गया हुँ कि तुम्हारे बिना जिना कितना मुश्किल है। में फिर तुम्हे कोई तकलीफ नही दुँगा मगर प्लीज तुम्ह मेरी पहली मेहर बन जाओ। अब ये सबकुछ सहा नही जाता।

ऐसे लगता है कि सिर्फ ये जिस्म तुम्हारा है लेकिन रुह नही। मेरी मेहर ऐसी कभी नही हो सकती। पता नही कि तुम क्यु ऐसे कर रही हो। लेकिन में तुम्हे जरुर पहले जैसा करुँगा । वादा है ये मेरा।

वो उसके दोनो हाथ और पैर बेड
से कसकर बाँध देता है और उसके तरफ प्यार भरी नजरोसे देखते है।

आहान और मेहेर कि शादी करिबन दो साल पहले हुई थी। आहान मेहेर को कुछ खास पसंद नही करता था। उसे कोई और लडकी पसंद थी। आखिर जोडियाँ उपर से बनकर आती है। शायद आहान और मेहर कि लकिरे एक दुजे से जुडी हुई थी।

कुछ महिनो पेहले हि वो जरा करिब आने लगे थे लेकिन उनकी दुरियाँ किसी वजह से फिर बढने लगी थी। तबसे आहान मेहेर से दूर होने लगा था।

“ किसी से नाराजगी कितनी भी गहरी क्यो ना हो लेकिन अगर उसे खोने कि बात आती है तो सोइ हुइ मोहब्बत भी जाग जाती है".... आखिर शिकायते अपनी जगह और प्यार अपनी जगह....

मेहर का रवय्या कुछ दिनो से बदला बदला था....ओ अजीब सी हरकते करने लगी थी। नॉनव्हेज को ना छुने वाली वो आजकल नॉनव्हेज के आलावा और कुछ नही खाती थी । कभी कभी पागलो जैसे हसती थी तो कभी कभी चिल्लाकर जोर से रोया करती थी। उसकी चिखे दिल दहला देने वाली थी। कभी कभी ठिकठाक होती फिर भी वो कोई अलग हि है ऐसा लगता था।

रास्तें से आनेजानेवाले बच्चों के उपर पत्थर मारती थी।हरपल उसका कोई नया रुप नजर आता।आहान आजकल टेन्शन में रहता था। और उसीमे उसकी बहन उसके यहा कुछ दिनो के लिए रेहने आइ थी।आहान ने मेहरको बहूत डॉक्टरों को दिखाया था। उनका कहना था कि उसकी दिमागी हालात ठिक नही है। मोहल्ले के लोक कहते थे कि उसपर किसी काले साये का असर है।

आहान उसे पहले जैसे करने कि कोशिश में था। मगर दिनभर दिन उसकी हालात और खराब हो रही थी।

आहान वहा से उठकर सोफे पर जाके सोने कि कोशिश करता है। लेकिन ये कंम्बखत नींद भी उसके आँखो से ओजल हो चूकी थी। सवालो कें गिर्दाब ने उसका चैन छिन लिया था। उसकी बैचेनी बहूत बढ चूकी थी।

आहान पेशे से एक लेखक था। लेकिन इन दिनो उसकी मानसिक हालात ठिक ना थी। उसे जो शांती चाहिए थी वो कही पर भी ना थी। वो बिस्तर से उठता है और खिड़की के बाहर बादलोसंग लुकाछुपी खेलते हुए चाँद कि तरफ देखता है।

आहान:- आजतक कितने किस्से कहानीयाँ लिखी । जिनमे हसीन ख्वाब सजाए थे । एक सपनो कि दुनिया जो असलियत में दिखाने कि कोशीश कि मगर असल जिंदगी इतनी आसान कहाँ होती है। हम लेखक तो सिर्फ बनावटी फसाने लिखते है । थोडीसी कठिनाइयो के बाद इश्क जरुर मुक्कमल होता है। लेकिन कभी असली जिंदगी कि दास्ताँ नही लिखता। लोगों को तो सिर्फ खुशियाँ देखनि होती है। उन्हे हम आज तक सिर्फ जिंदगी का एक हि हिस्सा दिखाते आए है। लेकिन दुसरा हिस्सा में दिखाउँगा। गमो से भरी असली जिंदगी से सहेजा करवाउँगा।

वह ड्रॉवर से पेपर और पेन निकालता है। और टेबल पर बेट कर आँखो को बंद कर देता है।

आहान:-दुसरो के जुबान से सुने थे कही किस्से यह न सोचा था कभी खुद के जिंदगी का ऐसा अफ़साना बनेगा...

पहले पन्ने पर वो बढे अक्षरो में शिर्षक लिखता है “ हमदर्द".... जहा से उसकी कहानी शुरु हुइ थी।

“ सोचा न था जिंदगी ऐसा मोड कभी लेगी।
हमारे जसबातों का यु मजाक उडाएगी। इश्क हमे जिससे था वो लकीरो मे ना लिखा था। और जिसके नाम कि लकिरे थी उससे इश्क न था।



क्रमशः

©®𝐇𝐚𝐫𝐬𝐡𝐚𝐝𝐚 𝐃𝐨𝐧𝐠𝐚𝐫𝐞🖤🖤🖤




ऐसा क्या राज है जिसने मेहर कि ये हालत कर दि है???...
आहान मेहर को फिर पहले जैसे कर पाए गा??? उनका इश्क मुक्कमल होगा या अधुरा रह जाएगा???....

अपने बहुमूल्य कमेंट्स जरुर देना और नेक्स्ट पार्ट के लिए फॉलो करना मत भुलना।

उनका दिल देहला देने वाला सफर। आहान कि नफरत प्यार में कैसी बदली। आहान और मेहर कि प्यारभरी दास्ताँ। और उसे वापस लाने कि कोशिशे जरुर पढिए।

जैसे सावित्री ने अपने पती सत्यवान कि जान बचाइ थी वैसे कलयुग का सत्यवान अपने पत्नी कि जान बचा सकेगा???....