दर्द ए इश्क - 25 Heena katariya द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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दर्द ए इश्क - 25

विकी जल्दी से कार लेकर एम जी रॉड की ओर पहुंचा ही था की तभी उसे रॉड के साइड में सूझी खड़ी दिखाई दी!। जिस वजह से वह कार को साइड में पार्क करते हुए जल्दी से उसके पास जाता है। सूझी अपने हाथ में रूमाल में बांध कर खड़ी थी। विकी तेज कदमों से उसके पास खड़े जाते हुए कहता है ।

विकी: सूझी व्हाट द हेल! ये कैसे हुआ और तुम्हारे गार्ड्स कहां है!? । ( सूझी का हाथ चेक करते हुए ) ।
सूझी: अरे! यार मैं बाल बाल उन लोगों से बचकर घर से निकली थी.... लेकिन जैसे ही मैं यहां टहल रही थी... तो एक चौर आ गया.... और पैसे लेने के चक्कर में उसकी चाकू हाथ में लग गई।
विकी: ( चिंता के भाव में ) फॉर गॉड सेक सुजेन तुम चु**या हो क्या!? नहीं मतलब ऐसी बात कोई बिना किसी भाव के कैसे कह सकता है!?। और तो और तुम्हे जरा सा भी अंदाजा है वह तुम्हे और भी चौंट पहुंचा सकता था...!। या फिर कुछ बुरा हो सकता था!। यार थोड़ी सिरियस हो जाया कर!।
सूझी: हां! ठीक ठीक है! मुझे गिल्टी फील कराने की जरूरत नहीं है.... जब से सगाई हुई है डेड ने मुझे बंधी बनाकर रखा है! ना कहीं जाने देते है ना किसी से मिलने देते है। सारा दिन घर में पागलों की तरह घूमती रहती हूं!।
विकी: तो मुझे कॉल कर लेती मैं कौन सा मर गया था!? अगर कहीं जाना था तो! ।
सूझी: ( मुंह बिगाड़ते हुए ) हां! ताकि फिर से सारा गुस्सा मुझ पर उतारो!? की मेरे डेड और तुम्हारे डेड तुम्हे फोर्स कर रहे है! मेरे साथ बाहर जाने के लिए! है ना!?।
विकी: सूझी तुम जानती थी कि मेरा वो मतलब नहीं था! उस दिन मैं गुस्से में डेड को समझाने की कोशिश कर रहा था उस बात से तुम्हारा कोई लेना देना नहीं था! और मैं अलरेडी माफी मांग चुका हूं! तो तुम प्लीज उस बात को भूलकर पहले जैसी नॉर्मल नहीं हो सकती! प्लीज!।
सूझी: लुक विकी! मैं कोई ऐसी इंसान नहीं हूं जो किसी पर भी जबरदस्ती रिश्ता थोपे! ना ही मैने कहां था तुम्हे की तुम इस रिश्ते के बारे में अपने डेड से बात करो! तो यह पहली और आखिरी बार है मैं इस गलती को जाने दे रही हूं... क्योंकि तुम अच्छी तरह से जानते हो मैं बिना वजह किसी को माफ नहीं करती दोस्त हो इसलिए कर रही हूं!।
विकी: नाईधर मी! सो वी आर ऑल गुड!।
सूझी: घमंडी! ।
विकी: नकचढ़ी! ।
दोनो एक साथ हंस पड़ते है!।
सूझी: यार! इतने बाद नॉर्मली बात कर रहे है! फ**क घिस मेरिज एंड ऑल.... आगे से इस बात के लिए हम नहीं झगड़ेगे!।
विकी: बिलकुल!।
विकी: तो अब इस चौंट का क्या करना है!? हॉस्पिटल चलना हैं या!?।
सूझी: ( सिर को ना में हिलाते हुए ) नौ! हॉस्पिटल बिल्कुल भी नहीं! डेड को कहीं से भी पता चला तो जान ले लेंगे मेरी!।
विकी: तो फिर!? ।
सूझी: ( कार के बोनेट पर बैठते हुए सिगरेट निकलते हुए लाइटर ढूंढती है लेकिन उसे नहीं मिलता!) लाइटर! है!?।
विकी: वैट! ( जेब में चैक करते हुए.... लाइटर जलाते हुए ) क्या बात है कोई बात परेशान कर रही है!? ।
सूझी: ( सिगरेट जलाते हुए ) नहीं तो ( एक ड्रैग लेते हुए विकी को सिगरेट देती है। ) ।
विकी: ( सिगरेट पीते हुए ) तो फिर!?।
सूझी: ( फिर से सिगरेट का एक ड्रैग लेते हुए ) बस! कुछ बात दिमाग को खाए जा रही थी।
विकी: और वो भला क्या बात है!? ( सिगरेट का आखिरी ड्रैग लेते हुए। ) ।
सूझी: बस! कुछ खास नहीं! ।
विकी: अबे! ए चल चल! किसी और को चु**या बनाना.... अब जल्दी बोल क्या बात है!?।
सूझी: ( गहरी सांस लेते हुए ) बस! उसकी आंखे उस दिन मुझे कुछ अजीब सी लगी उस रात जब उसने मुझे सॉरी बोला... था... मानो जैसे वह पहले वाला रेहान था... जिसे फर्क पड़ रहा था की मैं किसी और की होने जा रही हूं... पर फिर मुझे ही अपने इस पागलपन पर हंसी आती है की मैं भी कितनी इडियट हूं.... की मैं अभी भी चु**यो की तरह उसके बारे में सोच रही हूं और वह एक ना एक दिन तान्या के साथ सेटल हो जाएगा तब भी मेरा दिल *तीयो की तरह उसके पीछे पागल होगा!। ( हंसते हुए ) ।
विकी: ( हंसते हुए ) यहीं तो प्रॉब्लम है प्यार की यार! इंसान सबकुछ जान कर भी अनजान बनता है। प्यार के चक्कर में अपना आत्मसम्मान भी दाव पर लगा देता है.... लेकिन फिर भी वह उस इंसान को नहीं छोड़ पाता!।
सूझी: सहीं में यार! बिलकुल सच कहते हो! लेकिन फिर भी ये फीलिंग क्यों नहीं दूर होती!। साला अच्छी खासी लाइफ का मुरब्बा बना दिया है।
विकी: ( सूझी के उदाहरण पर हंसते हुए ) ब्रिलियंट! चल खैर छोड़ ये सब ये बता तूने शादी के बारे में क्या सोचा हैं!? ।
सूझी: अबे! यहां सालो हो गए हम दोनो ने ठीक से बात नहीं की और तू मेरी उस से शादी की बात कर रही है! वाह क्या बात है!? ।
विकी: ( सूझी को चिढ़ाते हुए ) अबे! मैं हमारी शादी की बात कर रहा हूं!?।
सूझी: ( गुस्से में विकी की ओर देखते हुए ) तुम्हे मज़ाक सूझ रहा रहा है यहां मेरी जिंदगी में बवंडर पे बवंडर आ रहे हैं और तुम मेरी फिरकी ले रहे हो!?।
विकी: क्यों!? याद है उस दिन तूने भी यहीं किया था मेरे साथ याद हैं!? ।
सूझी: ओह! हेलो मिस्टर ठाकुर उस दिन मेरी भी फटी पड़ी थी.... तो मैं टेंशन को कम करने के लिए कर रही थी वो सब कुछ... तुम्हारी तरह नहीं की जो दूसरो के दर्द पर नमक छिड़के!।
विकी: हां हां तू तो जैसे साक्षात सीता का रूप है जो! चल चल अब ये ड्रामा बंद कर और उसकी यादों को भी फेक रास्ते में... ।
सूझी: यार! मैं कितने दिनों से वही कर रही हूं! लेकिन उसकी आंखे मुझे खाए जा रही है! उसने भले ही सवाल नहीं पूछा पर मानो उसकी एक नजर ने मुझ से हर एक बात का सवाल पूछ लिया हो! ( बाल भींचते हुए ) मैं सच में इडियट बनती जा रही हूं! ।
विकी: दारू पिएगी...!?।
सूझी: ( बच्चो की तरह खुश होते हुए ) है अभी तुम्हारे पास!? यार डेड ने मेरा बार पर जाना ही बंद करवा दिया है और घर पर तो मैं पी नहीं सकती ! एक दो पेग पीला दे ताकि दिमाग ठिकाने पे आए!।
विकी: यहां पर नहीं है! पर घर चल वहीं पर... है!।
सूझी: और तुम्हारे डेड!? ।
विकी: उसकी टेंशन तु ना कर मैं संभाल लूंगा...! ।
सूझी: ( कार से नीचे उतरते हुए ) चल फिर जल्दी से! किसका इंतज़ार कर रहा है। ( जल्दी से कार में बैठे हुए )।


विकी सिर को ना में हिलाते हुए कार चालू करता है...। थोड़ी देर बाद वह दोनों विकी घर पहुंच जाते है!। विकी और सूझी... सीधा विकी के कमरे में चले जाते है। विकी... सूझी को बालकनी की ओर इशारा करता है की वही पर शराब है। सूझी बिना कुछ कहें सीधा बालकनी की ओर चली जाती है। विकी मुस्कुराते हुए नाश्ता लाने किचन कि और चला जाता है।