दर्द ए इश्क - 21 Heena katariya द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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दर्द ए इश्क - 21

करीब एक हफ्ते तक का वक्त बीत जाता है। इन लोगों के बीच कोई भी बात नहीं होती....। चारो अपनी अपनी जिंदगी में व्यस्त थे.. । विकी अपने डेड के आगे आने वाले चुनाव को लेकर तो.... सूझी... अपने डेड के बिजनेस को लेकर। दूसरी ओर रेहान भी अपने डेड के बिजनेस को लेकर शहर से बाहर गया हुआ था। तान्या भी अपने काम में व्यस्त थी। सभी इस घटना को भूल से गए थे । लेकिन... विकी इस घटना के कुछ दिन बाद ही अपने डेड से इस बारे में बात कर चुका था... । पहले तो विकी के डेड को समझ हीं नहीं आया की अचानक विकी को क्या हुआ जो... वह शादी की बात कर रहा है... । लेकिन फिर उनके लिए तो अच्छा ही था। एक मुसीबत घट गई। इलेक्शन के बाद विकी को इस बारे में आगे बात करेंगे ऐसा उन्होंने कहां था। विकी सारी तैयारी के बाद जब घर आया.... तो शाम हो चुकी थी। तब वह देखता है... घर पर काफी मेहमान आ रहे थे और काफी गाडियां भी पार्क थी। तो उसे लगा शायद इलेक्शन की वजह से कोई मीटिंग होगी... । वह अपनी कार पार्क करते हुए... पीछे के दरवाजे से अंदर चला जाता है। जब वह अपने कमरे में पहुंचता है तो सूझी पहले से थी । वह सूझी की ओर देखते हुए कहता है ।

विक्रम: तुम यहां क्या कर रही हो!? ।
सूझी: क्या भाई इतना उखड़ा उखड़ा मुड़.. ।
विक्रम: अरे! यार पूछो ही मत इतना थक गया हूं... । किसी से भी बात करने का मूड नहीं है।
सूझी: ठीक है! समझती हूं मैं... लेकिन अभी तुम्हे चेंज करके नीचे बुलाया है।
विक्रम: क्यों!? ।
सूझी: डोंट नो... तुम्हारे डेड ने कहां की अगर तुम घर आओ तो मैं बता दूं।
विक्रम: मेरा बिलकुल भी मुड़ नहीं है..! ।
सूझी: चल ना! थोड़ी देर आजा फिर कोई ना कोई बहाना बना लेना... और बाय द वे हमारे सारे फ्रेंड भी आए! है ।
विक्रम: उन लोगों का क्या काम!? ।
सूझी: अगेन! मुझे भी नहीं पता... डेड ने कहां पार्टी में जाना है तो... रेडी होके मैं भी आ गई... यहां आकर पता चला कि तुम्हारे घर आना था।
विक्रम: ( सिर को हां में हिलाते हुए ) पता नहीं डेड क्या क्या करते रहते हैं... खैर तुम जाओ मैं थोड़ी देर में नीचे आता हूं..! ।
सूझी: ओके ( कहकर चली जाती है। ) ।

विकी करीब १०-१५ मिनिट बाद तैयार होकर नीचे आता है... तो काफी सारे मेहमान थे... जिसमें काफी नेता, विकी के दोस्त, बिजनेस पार्टनस थे। घर को भी काफी सजाया गया था... । विकी को समझ नहीं आया क्योंकि आज ना ही कोई खास दिन है और ना आज पार्टी का कोई सेडयूल तो फिर... वह अपने डेड को ढूंढते हुए... उनके पास जाता है।

विक्रम: डेड! ( गेस्ट के सामने मुस्कुराते हुए ) ।
धर्मानंद: ( विकी की ओर देखते हुए ) एकस्कयुजमी... ।
विक्रम: आज.. पार्टी कोई खास वजह..!? ।
धर्मानंद: हां... बिलकुल तुम व्यस्त थे तो तुम्हे परेशान नहीं किया... बस थोड़ी देर में अनाउंसमेंट होगा... तब तक एंजॉय करो... ( इतना कहते ही वह कुछ लोगो को मिलने चला जाता है। ) ।
विक्रम: बट डेड... ( विकी की बात सुने बिना चला जाता है। विकी वेटर को बुलाते हुए... एक ड्रिंक ले लेता है।) ।
सूझी: क्या...बात है विक्रम ठाकुर... वो भी इतने गुस्से में.. ।
विक्रम: सुजेन... मैं बिलकुल भी मजाक के मूड में नहीं हूं! ।
सूझी: अच्छा! फिर तो मैं जो दिखाने वाली हूं उसके बाद तो तुम्हारा पूरा मुड़ बदल जाएगा ( आंखों से दूसरी ओर इशारा करते हुए ) ।
विक्रम: ( सूझी के इशारे की दिशा की ओर देखते हुए ) तान्या..! ( लाल गाउन में वह रेहान के साथ खड़ी थी... किसी से बात कर रही थी .. ( विकी एक पल तो अपनी नजर हटा नहीं पाया लेकिन जब सूझी ने उसके कंधे पर हाथ रखा तब वह अपनी नजर इधर उधर करते हुए खुद पर काबू पाता है। ) किसकी बात कर रही है ।
सूझी: हेय! इतने ड्रामे की जरूरत नहीं तुम अच्छे से जानते हो... मैं किसकी बात कर रही हूं।
विक्रम: मुझे नहीं पता..! ।
सूझी: ( हंसते हुए ) हां! हां! बनते रहो गधे लेकिन तुम जानते हो मैं तुम्हारी दोस्त हू... तो इतना तो मुझे पता है कि तुम उसकी ओर आकर्षित हुए हो...।
विक्रम: ( आश्चर्य में सूझी की ओर देखते हुए ) ।
सूझी: क्या... ऐसे क्या देख रहे हो! अब तुम्हारी आंखों में साफ साफ फीलिंग दिखती है उसमे मैं क्या करु!? ।
विक्रम: इंपॉसिबल..! ।
सूझी: मतलब तुम मानते हो की तुम उसकी ओर आकर्षित हुए हो..! ।
विक्रम: सूझी तुम..!? ।
सूझी: ( आंख मारते हुए ) टेक ए चील पिल... ड्यूड वैसे कहो... तो कुछ चक्कर चलाऊ...! ।
विक्रम: ( गुस्से में सूझी की ओर देखते हुए पूरा ग्लास गटक जाता है। ) तुम्हे कुछ गलतफहमी हुई है... । मैं ड्रिंक लेकर आता हूं।
सूझी: एस यू विस...! ( मुस्कुराते हुए ) ।
विक्रम एक और ग्लास उठाते हुए... पी जाता हैं... । उसे समझ नहीं आ रहा था सूझी को ऐसा क्यों लगा की विकी को तान्या के लिए कोई भी फिलिंग है.... । जब की वह दोनों विकी को उसे अच्छी तरह से जानता भी नहीं और ना ही विकी ने कभी तान्या के साथ फ्लर्ट किया था। तो वह ऐसी गलतफहमी हुई!?। हां! एक दो बार उसकी ओर आकर्षित हुआ था पर फिर भी... उसने उस बात को दिल में ही दबाए रखी थी क्योंकि वह स्तुति के अलावा किसी और के बारे में सोचना भी उसे सही नहीं लगता ... । तभी विकी डेड अनाउसमेंट करते है।

" लेडिस एंड जेंटलमैन आप सभी का शुक्रिया... इतने कम टाइम में आने के लिए... वैसे तो सच पूछो... तो ये पार्टी मैने ना सिर्फ चुनाव के लिए बल्कि मैंने एक और खुशखबरी के लिए भी रखी है.... । दरअसल बात ऐसी... है की ठाकुर और मल्होत्रा परिवार एक होने जा रहा है... मेरा बेटा विक्रम... और राज साहब के बेटी सुजेन की सगाई के लिए खास तौर पर आज पार्टी है... । ( विकी आंखे फाड़ते हुए अपने डेड की ओर देखे जा रहा था.. की उसके डेड क्या बोले जा रहे है। ) विक्रम.... बेटा इधर आओ... । ( विकी एक दो सेकण्ड तो देखता ही रहा पर फिर जब उसने देखा उसके डेड उसे बुला रहे है तो वह ग्लास टेबल पर रखते हुए... उसके डेड के पास जाता है। ) सुजेन... बेटा उधर आओ...!? । सूझी विकी के पास खड़ी होते हुए कहती है...! ।

सूझी: ( मुस्कुराते हुए ) विकी.... ये क्या बॉम्ब्लास्ट किया... !? ।
विक्रम: ( मुस्कुराते हुए ) अरे! मुझे खुद नहीं पता... तुम।
सूझी: मुझे पता होता तो मैं तुम्हे नहीं बताती! क्या!? ।
विक्रम: इन लोगों का ना दिमाग उमर के साथ खाली होता जा रहा है... दोनो के दोनो बुड्ढे सठिया गए है..! ।
सूझी: ( विकी की और आंखे दिखाते हुए ) हेय! डेड है वो हमारे।
विक्रम: हां! तो... अगर ऐसे हार्टअटैक देंगे... तो फिर ऐसी ही बाते निकलेगी ना मुंह से... ।
सूझी: ( खुद को हंसने से रोकते हुए ) ।

तभी विकी का ध्यान अचानक तान्या की ओर पड़ता है... तो मानो विकी को उसकी आंख में अजीब सा भाव नजर आ रहा था... वैसे तो वह मुस्कुरा रही थी लेकिन मानो जैसे वह खुश नहीं थी... विकी खुद के सिर को ना में हिलाते हुए... " दूर.. विक्रम ठाकुर दूर... ही रहना है... उससे... ।"
सूझी: क्या!? कुछ कहां तुमने!? ।
विक्रम: नहीं! चलो अब सबके सामने कपल बनने का ढोंग करना पड़ेगा...! ।
सूझी: वैसे अगर सोचो हम अगर सच में कपल होते... लाइक प्यार मैं पड़े हुए तो ! ।

यह सोचकर विक्रम और सूझी दोनो हंस पड़ते है... क्योंकि यह ऐसी बात थी जो किसी भी कीमत पर भी संभव नहीं था..... और फिर दोनो के कारनामे भी तो इतने थे... वह किसे सुनाते... अगर ऐसा भयंकर कुछ होता तो... । यह सोच कर ही दोनो हंसे जा रहे थे ।