यहां... वहाँ... कहाँ ? - 11 S Bhagyam Sharma द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

यहां... वहाँ... कहाँ ? - 11

अध्याय 11

कमिश्नर उपेंद्र अपने कमरे से हॉट लैंड सेल फोन से श्रवण थोड़े धीमी आवाज में बात कर रहे थे।

"सर! यहां रक्षा का बंदोबस्त ठीक ढंग से है। नासा वैज्ञानिक लोग कल चेन्नई के लिए रवाना हो सकते हैं। कुछ जो समाचार मिलते हैं उसमें आदि तो फेक होती हैं"

दूसरी तरफ से श्रवण बोल रहे थे। "ऐसी कोई समस्या नहीं आएगी ऐसे मुझे लगता है। फिर भी कुछ भी गलत हो जाए ऐसा डर मन में समाया हुआ है।"

"बिना मतलब का डर है सर..... छोटे महल में बोथम पुलिस स्टेशन से समाधान का ही उत्तर आ रहे हैं। जहां तक मैं जानता हूं चेन्नई में जो प्रेस मीडिया है, चैनल मीडिया देश के के विवरण पर ही ध्यान देते हैं इसके अलावा.... नासा वैज्ञानिक के बारे में उनको अनुमान लगाने का कोई संदर्भ ही नहीं।"

"नासा के शोध में ऐसे विपक्ष के संस्था विरोध बताएगी उन्होंने एक झुमला तैयार किया हुआ है.... ऐसी संस्था सब बातों को बड़े ध्यान से देखती है उनको पता नहीं है पूरा सच"

"आप इतनी दूर कह रहे हो तो मेरा उसके विरोध में बोलना किसी प्रकार का अन्याय नहीं है। कल सुबह दिल्ली से नासा वैज्ञानिक निकलकर 11:00 बजे चेन्नई पहुंच जाएंगे उसके बाद उनकी निगरानी आपकी ही जिम्मेदारी है।"

"फिक्र करने की जरूरत नहीं। नासा वैज्ञानिक का ग्रुप अपने शोध कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करके अपने देश को सुरक्षित वापस जाएंगे।"

"हम दोबारा शाम को 6:00 बजे फिर से एक बार सेलफोन से बात करेंगे।"

"बिल्कुल पक्का......."उपेंद्र कमिश्नर' अपने सेलफोन को बंद करते ही उनका सहयोगी अंदर आए। अंग्रेजी में बोले "सर ! मिस्टर विवेक और विष्णु आपसे मिलने आए हैं।'

"प्लीज अलाउ देम !"

उनका सहायक सिर हिलाकर बाहर चला गया उसके थोड़ी देर बाद..... विवेक और विष्णु अंदर आए कमिश्नर के सामने खड़े होकर दोनों ने सैल्यूट किया।

"प्लीज सीट!"

दोनों बैठ गए। कमिश्नर धीरे बात करना शुरू किया।

"मिस्टर विवेक ! अभी ही मैं इंडिया के आकाशीय शोध हे प्रधान श्रवण से बात कर रहा था। उनकी सुरक्षा का बंदोबस्त के बारे में पूछा। मैंने बता दिया। कल सुबह 11:00 बजे नासा ग्रुप चेन्नई में आ जाएंगे। उसके बारे में बात करने के लिए मैं ही आपको फोन करने वाला था। आप ही आ गए....."

"सॉरी सर......! मैं अभी आपसे जिस विषय में बात करने आया हूं वह गोकुलन के आत्महत्या के बारे में......"

"क्यों..... उसमें क्या प्रॉब्लम है?"

"बहुत प्रॉब्लम है सर....! गोकुलम के आत्महत्या के पीछे कोई षड्यंत्र है मैंने पहले बोला था। अब वह थोड़ा-थोड़ा सच में बाहर आ रहा है!"

"क्या विपरीत ?"

"सर! वामन अपार्टमेंट बनाना आरंभ करते समय बिल्डिंग प्रमोटर नंमवार अभी पैरालिसिस होकर वृद्ध आश्रम में  हैं। उनकी पत्नी नागम्मा, और इकलौता बेटा राजेंद्र अभी जिंदा नहीं है।

"इमारत बनाते समय कोई गलती रह गई थी उस गलती के कारण से.... करीब 2 फीट गड्ढे में बेसमेंट चला गया। उसके कारण आधा अधूरा खड़ा है। इस इमारत के सात मंजिल से गोकुलन खुद कर आत्महत्या करा। अपने आत्महत्या का कारण.... प्रेम में हार गोकुलन ने अपने चिट्ठी में लिखा। वह सही कारण नहीं है......"

"फिर सही कारण क्या है ?"

"वह मुझे नहीं मालूम सर ! परंतु गोकुलम के आत्महत्या का कारण प्रेम में धोखा नहीं हैं।"

"इसको आप कैसे पक्का बोल रहे हो ?"

"उसके लिए आधार है साहब !"

"क्या आधार है ?"

"मैं एक फोन कर सकता हूं क्या साहब?" अपने सेल फोन को हाथ में लेकर विवेक बोला।

"प्लीज!"

विवेक सेल फोन में नंबरों को दबाकर धीरे से बात की। "रूबी! उस लड़की अरुणा को लेकर आओ।"

बात कर उसने सेल फोन बंद किया। कमिश्नर से बोला "सर! मेरी पत्नी रूपल, अरुणा नाम की लड़की बाहर मेरी गाड़ी में ही बैठे हैं। और एक 2 मिनट में कमरे के अंदर आ जाएंगे। अरुणा कौन है यह विषय.... और थोड़ी देर बाद आपको पता चल जाएगा। गोकुलन विवाह में जो विपरीत बात हैं वह समझ में आ जाएगा।

कमरे में मौन फैल गया... अगले 2 मिनट में रूपल और वह सुंदर लड़की 20 साल की अरुणा अंदर आए।

नमस्कार कहकर वे दोनों को असमंजस की स्थिति में कमिश्नर ने देखा.... उन्हें बैठने को कहकर विवेक की तरफ मुड़े।

"यह कौन है अरुणा ?"

"सर! इस लड़की का नाम अरुणा कुमारी है। रिटायर सर्किल इंस्पेक्टर गोमती नायकम की इकलौती लड़की। गोमती नायकम अभी जिंदा नहीं  हैं। अपनी मां के साथ अकेली रहने वाली अरुणा एक प्राइवेट ऑफिस में रिसेप्शनिस्ट का काम करती है। यह अरुणा और गोकुलम दोनों 6 महीने के पहले तक एक दूसरे को चाहते थे। इसमें गोकुलन को अरुणा पर सचमुच का प्रेम नहीं था। अरुणा को धोखा देकर उसे अलग करने की कोशिश करने लगा।

"अरुणा ने उसकी छूट नहीं दी। उसे शादी करने के लिए कंपल किया। गोकुलन उसके लिए राजी नहीं हुआ। राजी ना होना ही नहीं उसके लिए अपशब्दों का प्रयोग किया। उसका आधार यह..... पिछले महीने गोकुलन और अरुणा के बीच जो बातचीत हुई उसका ऑडियो ये है!"

कहकर विवेक..... अरुणा को देखा.... वह अपने फोन से ऑडियो ऑप्शन में जाकर बटन दबाया कुछ ही देर बाद सुनाई दिया।

'फिर तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं अरुणा ?'

'प्लीज गोकुलम ! मैं तुम पर विश्वास करती हूं। परंतु शादी के पहले अकेले होटलों में जाना.... कार्टेज लेकर स्टे करना नहीं चाहिए बोल रही हूं।'

'वैसे ही... एक मौज मस्ती के लिए यह तो ?'

'नहीं वह गोकुलन..... हम दोनों प्रेम करते हैं। प्रेम के लिए एक सीमा भी तो है। उसको हमें पार नहीं करना चाहिए। उस सीमा को पार करने का यदि हम हैं सोच ले.... उस समय मेरे गर्दन में मंगलसूत्र होना चाहिए...…'

आवाज के बंद होते ही...... फिर से सेल फोन को उठा कर अरुणा..... फिर से शुरू किया। तब विवेक कमिश्नर से बोला।

"सर! अरुणा ने अलग-अलग समय में गोकुलन के बात करते समय उसे रिकॉर्ड करके रखा है। उसी को अभी हम सुन रहे हैं।"

फिर से सेल फोन से आवाज आने लगी।

'गोकुलन ! तुम पहले जैसे नहीं हो..... मैं तुम्हें फोन करूं तो तुम अटेंड नहीं करते हो?'

'तुम फोन करो तो उसे मुझे अटेंड करना चाहिए ऐसे कोई कानून है क्या ?'

'ऐसे क्यों बात कर रहे हो ?'

'मैं ऐसे ही बात करूंगा.....'

'ठीक है.... मैंने जो सुना वह सच है ?'

'क्या सुना है ?'

'ओ. एम. ओरील में हेवान हर्ट्स नामक कॉटेज में तुम अक्सर लड़कियों के साथ जाते हो ?'

'हां जाता हूं..... हफ्ते में एक नई लड़की मुझे चाहिए। शरीर को ऐसी आदत पड़ गई.....'

'ऐसे बोलने के लिए तुम्हें शर्म नहीं आ रही ?'

'मैं बड़े स्टेटस वाले परिवार में पैदा हुआ हूं। मेरे पास रूपए हैं। करेंसी को दिखाओ.... कोई भी लड़की मेरे साथ कॉटेज में आकर बिस्तर पर लेटने को तैयार रहती है..... हमने जन्म क्यों लिया? भोगने के लिए ही तो....!'

'ऐसा है... मैंने और तुमने प्रेम किया जो ?'

'क्या है ! हमने प्रेम किया? तुमने मुझे प्यार किया.... वह सच है। मैंने तुम्हें प्रेम नहीं किया। प्रेम करने का एक छोटा सा ड्रामा किया। बस इतना ही!'

'अरे पापी !'

'मुझे श्राप दोगी ?  छोड़ो.... तुम जैसे 100 लोगों को देख लिया मैंने। अब बोल रहा हूं सुन ले..... मैं किसी से भी प्रेम नहीं करूंगा। कोई मुझ से प्रेम करें.... उस प्रेम का साथ उस कॉटेज के पलंग तक की है..... समझ में आया!'

'मेरे अप्पा ने पहले से ही एक बड़े घराने में लड़की को देख रखा है पता है तुम्हें ? मधु शालिनी। भारत में हाथ में गिनने लायक उद्योगपतियों में एक है लड़की का पिता.... शादी अगले मई के महीने में है। तुम्हें पत्रिका मिल जाएगा। आकर एक बुके देकर चली जाना। अभी जगह को खाली करो....'

सेल फोन की बातें बंद हुई।

अरुणा ने सेल फोन बंद किया।

कमिश्नर उपेंद्र आश्चर्यचकित होकर बैठे थे.... विवेक धीरे से बोलना शुरू किया।

"सर! गोकुलम के आत्महत्या के पीछे कोई एक विपरीत बात है मुझे संदेह.... अब आपको वह सही लग रहा है ना?"

"सर्टेंली....! बट उसके आत्महत्या के पत्र में मेरे आत्महत्या का कारण प्रेम में हार अपने आप ही बताया है? उसने किसी से भी प्रेम नहीं किया प्रेम में धोखा कैसे होगा? सो..... उसकी आत्महत्या करने के कारण कुछ और है.....! वह क्या होगा आपको पता लग रहा है क्या विवेक?"

"नहीं सर! मैं इस गोकुलन के केस में इन वॉल होने का कारण अरुणा ही है। अरुणा के अप्पा सर्कल इंस्पेक्टर गोमती नायकन के बहुत नजदीकी दोस्त हैं गोकुलनाथ। गोकुलन उनके आत्महत्या के बारे में दिखा रहे थे न्यूज़ में बार-बार तो अरुणा घबराकर अपने अम्मा से विषय के बारे में बात की। इसकी वजह से कोई समस्या नहीं आनी चाहिए इस डर से अरुणा और उसकी मां मुझे आकर सब विषय के बारे में घर आकर बताया।

"मैं घर पर नहीं था मेरी पत्नी रूपल के पास सब कुछ बता कर गई। तुरंत रूपल ने मुझे फोन किया... उस समय मैं कार ड्राइव कर रहा था। रूपल ने जब बताया.... मेरे अंदर एक प्रलय आए जैसे लगा। मेरे कार ड्राइव करने के कारण विस्तार से बात नहीं हो पाई सिर्फ मैंने सुना। कार में उस समय विष्णु भी मेरे साथ था पर उसको इस विषय के बारे में कुछ नहीं पता।

"विष्णु को मैं ऑफिस में छोड़कर आया। अरुणा और उसकी मां मेरे लिए वेट कर रहे थे। अरुणा रोते हुए गोकुलन के बारे में सब सच्चाईयों को बता दिया। उसने इसके साथ सचमुच का प्यार नहीं किया इसे जानने के बाद आगे की अपनी जिंदगी में और कुछ समस्या ना आ जाए यह सोचकर उससे मिलते समय बात करते समय अपने सेलफोन को ऑडियो में लगा देती थी। अरुणा ने जैसे सोचा.... गोकुलन की आत्महत्या बहुत बडी समस्या बन गई है....."

कमिश्नर ने एक गरम दीर्घ श्वास छोड़ा।

"सिर्फ समस्या ही नहीं विवेक ! यह एक सर दर्द बन सिर के दोनों तरफ मारना शुरू कर दिया। अपने लड़के के प्रेम में धोखे के कारण वह लड़की कौन है आदिमूलम का साला ननछुट्टन अपने दूसरे साथियों के साथ उस लड़की को ढूंढ रहे हैं।

"इसमें जो असमंजस है वह क्या है वह गोकुलन ने आत्महत्या के समय अपने लिखें पत्र में उसके प्रेम करने वाली की शादी है लिखा था।

"इसका मतलब.... अरुणा के सिवाय उसने किसी और लड़की से लव किया होगा। अरुण के स्टेटमेंट को रखकर देखें तो गोकुलन किसी भी लड़की को प्रेम करने वाला नहीं लगता। प्रेम को वह सिर्फ पलंग तक सीमित देखता है।

अरुणा ने मुंह खोला।

सर! जहां तक मैं जानती हूं गोकुलन आत्महत्या करने लायक डरपोक नहीं है। किसी भी विषय को वह सीरियस नहीं लेता। यह एक हत्या क्यों नहीं हो सकती ....?"

"तुम बोल रही हो बस संदेह मुझे भी है.... परंतु हत्या का क्या मोटिव है देखना पड़ेगा ?"

विवेक अपने हाथ में लाए हुए फाइल को लेकर.... कमिश्नर के सामने रखा।

"मोटिव इस फाइल में है सर ! कल सुबह गोकुलन जिस अधूरे बने वामन अपार्टमेंट हे सातवीं मंजिल की छत से नीचे कूदा.... उसी छत से दो साल पहले एक जना नीचे कूदकर मर गया था। वह एक अकस्मात विपत्ति कहकर ..... दो ही दिन में फाइल को क्लोज कर दिया था...."

कमिश्नर सीधे होकर बैठे।

"छत से नीचे गिर कर मरने वाला कौन था ?"

"उसका नाम संपत कुमार था। इमारत का इंजीनियर। वे भी सुबह के समय सूर्य उदय होने के पहले गिर कर मर गए। इस संभावना को इंचंबाकम पुलिस इंस्पेक्टर मुथुस्वामी एक अकस्मात विपत्ति केस मानकर... पूछताछ के नाम पर काम करने वालों से पूछ कर....…जिन्होंने प्रत्यक्ष देखा उनको मिलाकर.. केस फाइल कर दिया।

"जो कुछ हुआ वह विपत्ति थी इस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के फाइल में रखा हुआ है सर!.... सबसे बड़ी बात किसी भी पेपर में इस के मौत के बारे में न्यूज़ नहीं आया....."

"यह फाइल आपके हाथों में कैसे आया ?"

गोकुलन के आत्महत्या मैटर को आपने मुझे सौंपकर आदिमूलम को देखने के लिए बोला था। मैं और विष्णु हॉस्पिटल में जाकर असिस्टेंट कमिश्नर के साथ उन्हें देखा। आदिमूलम से बात करके हम बाहर आए तब आश्वासन देने के लिए दो बिल्डिंग कांट्रैक्टर अपने को भूल कर बातें कर रहे थे कुछ शब्द मेरे सुनने में आया। उस पर मैंने ध्यान दिया...….."

"ऐसा भी क्या बात कर रहे थे ?"

"वामन अपार्टमेंट को नंबरदावन में मैं किस मुहूर्त में इसका नाम रखा मालूम नहीं। दो साल पहले वह इंजीनियर गिर कर मर गए । अभी यह आदिमूलम का लड़का......! तीसरा जाने कौन गिरकर मरेगा..... मालूम नहीं! ऐसे ही बात कर रहे थे.... मेरे मन के अंदर एक छोटा संदेह आ गया। बिना किसी को पता चले मैंने एक शैडो एंक्वायरी शुरू किया।

"कल रात को 11:00 बजे इंचंपाकम पुलिस स्टेशन जाकर ड्यूटी में जो इंस्पेक्टर से अथॉरिटी के साथ पूछताछ किया... उस संपत कुमार का डेथ फाइल मिला। उस केस को डील करने वाले इंस्पेक्टर मुथू स्वामी अब कोयंबतूर में लॉ एंड ऑर्डर इंस्पेक्टर बने हुए हैं। सेल फोन से उनको कांटेक्ट किया। पहले बात करते समय आपको क्या विपत्ति है बोले। उसके बाद मैंने अपने द्वारा लिए जाने वाले बातों को बताने पर डर गए।

"संपत कुमार मौत को एक विपत्ति कहकर जल्दी-जल्दी उस फाइल को क्लोज करने को कह दिया.... वह न्यूज़ इसी पेपर में किसी टीवी चैनल में नहीं आए ऐसे भी करने वाले और कोई नहीं..... सिर्फ आदिमूलम ही है यह सच भी उन्होंने बता दिया।"

उपेंद्र के पूरे चेहरे में फिक्र दिखाई दे रहे थे जिससे वे अधीर हो गए।

"आप बोल रहे हो जिसे देख कर....... उस इंजीनियर संपत कुमार के मौत का कारण भी आदिमूलम जैसे ही लग रहा है ?"

"वही है सर ! आदिमूलम रियल स्टेट बिजनेस में आज नंबर वन हैं। सिटी में जितने बिल्डिंग्स प्रमोटरों हैं उन्होने उन्हें अपने अंदर दबा कर रखा है और राजनैतिक दबदबे से एक राज्य ही चला रहे हैं।

"उस बिल्डिंग प्रोपराइटर में यह एक है नंबमारवार। वामन अपार्टमेंट्स कंस्ट्रक्शन में आदिमूलम एक बार छिपे हुए पार्टनर थे। कंस्ट्रक्शन व्यवहार में कोई समस्या खड़ी हो गई...... उस समस्या के कारण संपत कुमार की हत्या हुई होगी....."

कमिशनर उपेंद्र, उनके हाथ में जो संपत कुमार की डेथ फाइल थी उसको वे पलटने लगे।

पहले पेज पर ही एफ आई आर को चिपकाया गया था एक युवा की फोटो।

वह सुंदर था। लंबा चेहरा अच्छी तरह से बाल जमे हुए थे। आंखों में पतले फ्रेम का चश्मा था।

फोटो के नीचे लाल रंग की स्याही से संपत कुमार लिखा हुआ था।

उसके नीचे बायोडाटा चिपका हुआ था।

उम्र 31

पढ़ाई आर्किटेक्ट एम.ई

शादी अभी नहीं हुई।

परिवार पूछताछ के द्वारा जैसे पता चला उनके मां-बाप छोटी उम्र में ही मर गए थे, उनके साथ पैदा होने वाला कोई नहीं था।

निवास  इंचंपाकम रायर गली 6 /2 उस मकान में वे अकेले रहते थे।

मृत्यु का विवरण: सुबह सवेरे उठकर वाकिंग खत्म करके कंस्ट्रक्शन स्पाट पर जाकर सातवें मंजिल की छत पर सैंटरिंग काम को ठीक हो रहा है क्या देखने गए। देखते समय बीच में बांस का डंडे से उलझ कर ऊपर से गिरने से सिर पर चोट लगने के कारण मृत्यु हो गई।

मृत्यु पर संदेह?: नहीं। यह सिर्फ दुर्घटना ही है डॉक्टर शिवरामन ने बॉडी के पोस्टमार्टम से पता चला। इसके अलावा उस स्थान के प्रत्याशी चार-पांच जनों ने लिखित में दिये है। उसे भी साथ में रखा था ।

शव को जलाया या दफनाया?: जलाया गया।

कमिश्नर फाइल को देखकर एक दीर्घ श्वास छोड़ कर उसे बंद किया..... विवेक की तरफ मुड़े।

"विवेक ! संपत कुमार का शरीर जला दिया गया। 'दफनाया होता तो बॉडी को निकाल कर दोबारा पोस्टमार्टम कर सकते थे और रिपोर्ट ले सकते। उसका अभी कोई रास्ता नहीं है। इस विषय में आगे हम क्या कर सकते हैं, बोलिएगा? आई एम टोटली कन्फ्यूज्ड......."

"सर! कैसे भी सोच कर देखो.... आदिमूलम एक संदेहास्पद व्यक्ति मेरे नजरों में लग रहे हैं। उन्हें एक पुलिस इंक्वायरी के लिए बुलाना पड़ेगा। तभी सच बाहर आएगा......

"तुरंत पूछताछ करना है कह रहे हो क्या ?"

"यस.… सर!"

"गोकुलन का क्रिया कर्म खत्म होने दो ? उसके अलावा..... अपने को अभी आदिमूलम का विषय से जरूरी नहीं है। कल चेन्नई आने वाले नासा वैज्ञानिकों के ग्रुप जरूरी है। उनके लिए किस तरह की सुरक्षा की जरूरत है उसे हम कैसी सुरक्षा देंगे वह जरूरी है। एक चार-पांच दिन के लिए आदिमूलम फिर समस्या को टाल सकते हैं....."

कमिश्नर के बात करते समय ही... उनके सेलफोन की घंटी बजी। उठाकर सुनने लगे।

दूसरी तरफ असिस्टेंट कमिश्नर संतोष बात कर रहे थे। आवाज में घबराहट थी।

"सर ! मैं संतोष.....!"

"बोलिए संतोष....! आपकी आवाज में क्यों इतना टेंशन है?

"सर ! मैं आधा घंटे पहले गोकुलन के आत्महत्या के संबंध में एक संदेह को क्लेरिफाई करने के लिए आदिमूलम के घर गया। आश्वासन देने वाले घर के अंदर और बाहर भरे हुए थे। मैं आदिमूलम से मिलकर बात करने के लिए..... बरामदे में पड़े कुर्सी पर बैठ गया। उसी समय यह विपरीत घटना घटी सर!"

"विपरीत घटना ?"

"हां साहब.....! गोकुलन का रिश्तेदार ननछुट्टन को आप जानते हैं मैं सोचता हूं।"

"अच्छी तरह जानता हूं...... हमेशा आदिमूलम के साथ ही रहते हैं। क्यों..... उनको क्या हुआ?"

"सब लोगों के देखते समय ही वे हाल के पास के एक कमरे में घुसे। दरवाजे को अंदर की तरफ से बंद करके धोती को खोलकर.... उसी से आत्महत्या कर ली।"

कमिश्नर के हाथ में जो सेलफोन था वह आघात के कारण कांपने लगा |

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Kaumudini Makwana

Kaumudini Makwana 3 महीना पहले

kirti chaturvedi

kirti chaturvedi 3 महीना पहले