Udaan - 3 books and stories free download online pdf in Hindi

उड़ान - 3

रुद्र काव्या के पास न बैठ कर दूसरी सीट पर बैठे जाता है
वह काव्या से नज़र मिलाना तक जरूरी नी समझता।
जिस लड़की में उसकी जान बसती है आज उसके साथ ऐसा बर्ताव सबकी समझ से बाहर था।
विनी काव्या की तरफ इशारे मे पूछती है... बात क्या है? पर काव्या प्रतिउत्तर में कुछ नहीं कहती। वह उस और देखती है जहा रुद्र बैठा हुआ था और अपना बैग लेकर वहा से चल देती है।
रुद्र उसे जाते हुए एक नजर भर देख लेता है और वापस अपने फोन में बिज़ी हो जाता है।
*******
राज ने बात छेड़ी
"विनी तुम्हे कुछ पता है क्या... क्या चल रहा लैला मजनू के बीच"?
" नहीं यार "। विनी ने एक लाइन मे जवाब दिया।
तभी पीहू बोली "परसों शाम को दोनों long drive पर गए थे उसके बाद से ही अनबन चल रही है दोनों के बीच"

"अच्छा क्या हुआ होगा वहा" वीर ने पूछा
"पता नहीं अंदाजा लगाना मुश्किल है... वैसे भी दोनों अपने बीच की बाते खुल कर नहीं बताते" पीहू ने कहा
"विनी तुम्हे तो कुछ पता होगा ना सबसे नज़दीक है तुम्हारे काव्या" राज ने कहा
"मैंने पहले ही कह तो दिया यार क्यु बार बार एक ही लाइन लगा रखे हो
और वैसे भी तुम सबको क्या तकलीफ ... हो गया होगा कोई छोटा मोटा issues जल्दी slove कर लेंगे डॉन्ट वरी" पहले विनी के शब्दो में गुस्सा था पर बाद मे उसने सहज होते हुए बोला।

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काव्या कॉलेज की सीढ़ियों पर बैठी थी
तभी निशि वहा आ गयी
"हेय व्हाट आर यू डूइंग"
"नथिंग" काव्या ने कहा
"कुछ प्रोब्लंम हुई क्या रुद्र और तुम्हारे बीच" निशि ने पूछा

"यार तुम सबको क्यों अपना दिमाग बस हमारे झगड़े परेशानियो में लगाना होता है इतना दिमाग लगा के पढाई करती तो टॉप करती तुम और सबके सामने तुम्हारे पापा तुम्हारी बेइज्जती न करते" काव्या ने अपना सारा गुस्सा निशि पर निकाल दिया।
हुआ ये की कॉलेज के सेमेस्टर का रिजल्ट आया तो निशि का नंबर लास्ट में प्रथम आया... अब ये बात उसके आर्मी ऑफिसर फादर सह नहीं पाए। और चले आये कॉलेज मे उसका निरीक्षण करने। कॉलेज में निशि अपने दोस्तों के साथ सेल्फी लेने और हसी ठिठोली में बिजी थी। बस फिर क्या उस दिन जो सामत आयी निशि पर उसके बाद तो उसने किताब की तरफ थोड़ा देखना शुरू किया था। पर काव्या ने उसे ये ताना दे कर उसका इगो दूसरी बार हर्ट किया था।
पहली बार भी वह उसके साथ ऐसा बर्ताव कर चुकी थी।
ऐसे मे निशि ने वहा से जाना ही उचित समझा
तभी काव्या को रुद्र दिखाई दिया। वह सीढ़ी से अपनी फिजिक्स की क्लास अटेंड करने जा रहा था
काव्या ने उसका हाथ पकड़ लिया
उसने कहा "रुद्र"
रुद्र ने एक आँख भर उसे देखा और आँखें फेर ली
उसने फिर से कहा
"क्यों कर रहे हो ऐसा"
उसकी आवाज़ में दर्द था जिसे साफ महसूस किया जा सकता था
पर रुद्र बस बिना किसी भाव के उसकी बाते सुन रहा था।
"तुम जानते हो न मै नहीं रह सकती तुम्हारे बिना फिर क्यों कर रहे ऐसा... क्या गलती कर दी यार कुछ तो बताओ प्लीज़ "
रुद्र ने गुस्से मे उसकी और देखा और कहा
"मन भर गया है तुमसे इतनी सी बात नहीं समझ आती तुम्हें"
और वह उसका हाथ छुड़ा के चला जाता है।
उसे लगता है जैसे उसके कानों मे किसी ने खोलता सा तेल डाल दिया है पर वह अभी इस हालत में नहीं थी की कुछ भी सोच सके
वह जानती थी की कुछ तो ऐसा है जो रुद्र उससे छुपा रहा पर क्या?
ये सवाल उसे परेशान किये जा रहा था

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