वो अनकही बातें - 18 RACHNA ROY द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

वो अनकही बातें - 18

मैं इस रूम को निहार लूं। और अब आगे।।


शालू ने कहा सोमू अब इस रूम में हम-दोनों की महाबलेश्वर वाली वो फोटो लगवाना है खुब बड़ी वाली फोटो फ्रेम में फिट करवा कर बेड के ऊपर लगवाना है।
सोमू ने कहा ओ के मेरी जान।। अब चलो कुछ खा लिया जाए।
शालू ने कहा हां चलो।
फिर दोनों नीचे पहुंच गए।खाना खाने बैठ गए।
विनय काका ने दोनों को पेट भर कर खाना खाने को दिया।
शालू ने कहा वाह !क्या खाना बना है!

समीर ने कहा पता है तुम्हें विनय काका बचपन से मुझे पाल-पोस कर बड़ा किया है।
शालू ने कहा हां ,कालेज में तुम हमेशा बोला करते थे।

समीर ने कहा अच्छा शालू क्यों न एक बड़ी पार्टी हो जाएं।
शालू ने कहा हां समीर बीमारी में मैं सब कुछ भूल गई थी। आज मैं अगर जी उठीं हुं वो सिर्फ तुम्हारे लिए।
समीर ने कहा हां बाबा।
विनय काका बोले अरे ,बेटा घर में लक्ष्मी आ गई है और क्या।

समीर ने कहा अच्छा मैं कुछ देर के लिए अस्पताल होकर आता हूं।
शालू ने कहा हां ठीक है।
समीर ने कहा हां तुम पहले दवाई ले लेना। फिर आराम करना है।
शालू ने कहा ओके।
फिर समीर बाहर चला जाता है।
शालू अपनी दवा लेकर ऊपर बेड रूम में जाकर बेड पर आराम से लेट जाती है। फिर एकाएक उसे याद आता है उठकर अलमारी खोलने लगती है।
देखते ही दंग रह जाती है।
कितना कुछ सोमू ने खरीदा है मेरे लिए।।
मैंने कभी सोचा नहीं था।
इतनी सारी रंग-बिरंगे चुड़िया , दुपट्टा, बैंग, जुतिया और एक से एक सारे मेरे पसंदीदा कलर के सलवार सूट, कुर्ती ।। जैसे कोई सपनों में करता हो।। फिल्म में ऐसा होता है।।
ये सोचते हुए शालू की आंख भर गई और
बस रोने लगी।। उसने कभी समझा नहीं समीर के प्यार को, कदर नहीं किया।उसे यही रह रह कर सताने लगी।


तभी विनय काका कमरे में आकरबोले शालू बेटी अब कुछ फल खा लो।
शालू हंस कर बोली ओह काका कितना खाऊंगी।
विनय काका ने कहा मैं ये जूस लाया हुं और साथ में सेब भी।

शालू ने कहा अच्छा काका ठीक है खा लेती हुं।

और फिर शालू का मोबाइल बजा। शालू मुस्कुराई और फिर फोन उठाया और फिर बोली हां सोमू बोलों।
समीर ने कहा हां लाल मिर्च जूस पिया।

शालू ने कहा क्या कहा, पता है ना तुम कब कहां करते थे।
समीर ने कहा हां याद है जब भी तुम गुस्सा होती थी तभी मैंने ये नाम ही दे दिया था। और फिर नकचढी भी कहा करता था।पर एक बात पूछूं तुम्हारी आवाज़ को क्या हुआ रो रही थी क्या??
शालू ने कहा अरे सोमू तुम कैसे समझ लेते हो।।
समीर ने कहा हां सब पता है मुझे तुम्हारी दिल की धड़कन तेज हो रही हैं मैं सुन रहा हूं।

शालू हंस पड़ी और बोली कब आ रहे हो?
समीर ने कहा हां बस आ रहा हूं वो विकास भी साथ आ रहा है।
शालू ने कहा हां ठीक है।
शालू जल्दी से तैयार होने लगीं और साथ ही जूस और सेब भी खा लिया।

शालू ने एक रेड कलर का बनारसी सूट पहन लिया और लाल चूड़ियां,लाल बिंदी लगाकर अपने बालों को खुला छोड़ दिया।
मदहोश हो कर गुनगुनाने लगी। सजना है मुझे सजना के लिए---

फिर नीचे उतर कर आ गई।

फिर समीर और विकास भी आ गए।
विकास ने एक पैकेट देते हुए कहा भाभी मुबारक हो।
शालू ने हंस कर कहा अच्छा, थैंक्स।

फिर समीर कि आंखे तो शालू से हट नहीं रही थी और विकास बोल पड़ा ओह मियां रात का इंतज़ार तो कर लेते।

शालू एक दम से झेंप गई।

समीर ने कहा अरे विकास तू भी ना।
तभी बेल बजीं और कुछ लोग फुल बगैरा लेकर आ पहुंचे।
समीर ने कहा अरे विकास तू देखे ले।
विकास ने कहा हां,चलो भाई तुम्हें रूम दिखाता हूं।

शालू एक दम से शर्मा कर बोली क्या जरूरत थी सोमू।
समीर ने कहा हां यार ये सब विकास का किया है और पता है सभी पार्टी मांग रहे है तो इस सन्डे को पार्टी रखी है।

शालू ने कहा अच्छा पर कहा?
समीर ने कहा होटल ताज में और कहा।तुम्हारा पसंदीदा जगह है।
शालू ने कहा हां पर बहुत ही खचीला जगह है सोमू।

समीर ने कहा हां तो शादी तो हमने एक ही बार किया है ना?

शालू ने कहा हां।

फिर विकास के साथ मिलकर पार्टी में क्या क्या होगा वो सब बातें समीर करने लगे।डांस, मेनू सब कुछ डिसाइड हो गया । फिर विनय काका समोसे और कोल्ड काफी लेकर आ गए।

फिर सभी मिलकर कर नाश्ता करने लगे।

फिर रूम को सजा कर वो लोग चले गए।

विकास ने कहा चल यार चलता हूं।
आल दी बेस्ट।

समीर ने कहा चलो ठीक है कल पुजा में आ जाना।
शालू ने कहा चलिए सब खाना खाते हैं।
फिर दोनों खाना खाने बैठ गए दोनों ने एक-दूसरे को खिलाया जैसे पहले खिलाते थे।

समीर ने कहा विनय काका कल घर में एक पुजा रखवाया है आप सब देख लेना।

विनय काका ने कहा हां बेटा सब देख लिया है।

फिर दोनों मुस्करा कर ऊपर अपने कमरे में पहुंच गए।

शालू ने पुरे कमरे को देख कर कहा वाह क्या खुशबू है गुलाब की।

समीर ने कहा हां मुझे पता था तुम्हें गुलाब पसंद है।

समीर ने कहा अच्छा अपना हाथ आगे करो।
शालू ने कहा मारोगे तो नहीं।
समीर ने कहा नहीं बाबा।
शालू ने शरमाते हुए अपना हाथ आगे किया।
समीर ने एक अंगुठी पहना दिया और कहा ये आज रात के लिए ‌।। और हां ये देखो हमारे यादगार पल की तस्वीर जैसा कहा था तुमने।
शालू ने कहा अरे वाह बहुत ही खूबसूरत। प्लीज़ इसे बेड के ऊपर वाले वाल् पर लगा दो।
समीर ने फिर धीरे से उस तस्वीर को टांग दिया।

शालू ने कहा ओह सोमू इस पल का हमेशा से इन्तजार था।
मुझे बहुत डर लग रहा है मुझे अपनी बाहों में भर लो ना।

समीर ने एक पल का इंतजार नहीं किया और बढ़ कर शालू कोआगोश में ले लिया।
और फिर धीरे धीरे अपने होंठों को शालू की शरारत भरी आंखों में रखा, फिर गालों को चूमा और फिर शालू के होंठों को चूमा।
शालू एक दम से शर्माते हुए खुद को समीर से अलग कर के आगे दौर गई।फिर समीर ने एक रोमांटिक अंदाज में शालू की साड़ी का आंचल पकड़ कर अपनी ओर खींच कर बाहों में भर लिया।
समीर की आंखों में अब एक शरारत आ गई थी अब वो कहा रुकने वाला था।

शालू और सोमू युही सारी रात बिताने वाले थे।
शालू ने धीरे से कहा अब सोने भी दो ना।
समीर ने कहा अच्छा तो इन्तजार क्यों करवाया इतना।
शालू ने कहा ओह तो क्या इस बात का बदला लोगे।
फिर दोनों एक दूसरे से लड़ते-लड़ते कब एक दूसरे में समा गए एक प्रेमी युगल की तरह।शालू ने आज खुद को खुशी-खुशी समर्पित कर दिया अपने सोमू को।
शालू अब किसी भी कीमत पर सोमू को खोना नहीं चाहती थी।
वो अनकही बातें अब कहीं ना कहीं पुरी होती नजर आ रही थी।
फिर दोनों एक-दूसरे की बाहों में सो गए। और सपनों की दुनिया में खो गए।
सुबह तीन बजे घड़ी की अलाम ने दोनों को जगा दिया।

शालू खिलखिला कर हंस पड़ी और बोली सोमू एकदम बच्चों की तरह हो गए हो।।
अब उठो भी और मुझे भी उठने दो ना।।

सोमू ने कहा ओह सारा मुड खराब हो गया।।

शालू जल्दी से उठ कर नहाने चली गई।
सोमू ने कहा ओह माई गॉड चली गई।।।।

फिर शालू तैयार हो गई उसने समीर की पसंद का गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी।

समीर ने कहा अब मैं क्या पहनुगा?
शालू ने कहा ओ मेरा सोमू तुम्हें कुर्ता पायजामा पहनना होगा ये लो मैं लाई थी।

समीर मुंह बनाते हुए अब ये क्या शालू। तुमको पता है कि मैं ये सब नहीं पहनता हूं।

शालू ने कहा ओह मेरे पति देव। ये अब पहन लो।जरूरी तो नहीं जो कालेज में किया वो अभी भी करों। पहले जैसे सारी लड़कियां तुम्हारे आगे पीछे घुमती थी पर अब ऐसा मैं होने नहीं दुंगी। हां

समीर ने कहा अच्छा बाबा पहन लेता हूं।

फिर समीर भी तैयार हो गया और खुद को आईने में देखने लगा। तभी पीछे से शालू समीर को निहारने लगी और बोली क्या बात है डाक्टर साहब।।
समीर ने कहा सेम पिंच।
शालू ने कहा हां जी। तभी तो हम एक दूसरे के लिए बनें है।

शालू ने कहा अब चलो।

फिर नीचे पहुंच गए और विनय काका ने सारी तैयारी कर ली थी।

रसोईया भी तरह तरह के मिठाई और पकवान बनाने लगे थे।

समीर ने कहा देखा शालू विनय काका जहां हो वहां कभी कोई तकलीफ़ नहीं हो सकती है।

विनय काका बोले अरे बेटा तुम भी ना।

फिर पंडित जी भी आ गए और फिर दोनों नये वर वधू को पुजा में बैठने को कहा गया।

विकास भी अपने पत्नी को लेकर पहुंच गया और फोटो खींचने लगा।

फिर पंडित जी ने कहा ये जोड़ी सदा सुखी रहे,और सात जन्मों तक साथ रहे।

फिर समीर के अस्पताल के स्टाफ भी एक एक करके आने लगें।
पुजा पाठ सम्पन्न हुआ और पंडित जी ने कहा कि अब सभी को प्रसाद दे दिजिए।।
सबको प्रसाद खाने को दिया गया।
शालू के हाथों से प्रसाद खाने लगे समीर जी।वाह।बीबी के हाथों से खाना क्या स्वाद है।
विकास ने कहा अबे समीर चल चल।।कल बात पुरी नहीं हुआ क्या?कहा जाना है हनीमून पर?
भाभी जी अब भेजना होगा आप दोनों को।

समीर ने कहा अरे धीरे बोल स्टाफ आ गए हैं सारे।।

मैरी बोली मुबारक हो मैम,सर।।
शालू ने कहा थैंक यू। आइए आप सब प्रसाद खा लिजिए।।

समीर ने कहा शालू प्लीज इन सभी को खाना खिलाकर भेजना हां।।

शालू ने कहा हां तुम चिंता मत करो मैं सब देख लुंगी।
समीर ने कहा अच्छा हमें थोड़ा निकलना होगा हां।।
शालू ने कहा हां ठीक है।

फिर विकास और समीर निकल गए। हंसते हुए दोनों दोस्त निकल गए। विकास ने कहा अरे बोल ना क्या हुआ कल।।




क्रमशः


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