बबन को गड्ढे क्यों पसंद हैं ? (व्यंग्य) Sunil Jadhav द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

बबन को गड्ढे क्यों पसंद हैं ? (व्यंग्य)

लेखक- डॉ.सुनील गुलाबसिंग जाधव, नांदेड़

मो.९४०५३८४६७२

मास्टर जी ने कक्षा में एक लोकप्रिय पंक्ति सुनाते हुए कहा, बच्चों अब तुम्हारी बारी | तुम्हे एक कविता करके मुझे सुनानी हैं |” कुछ देर बाद कक्षा के एक होनहार छात्र ने खड़े होकर कहा, “ मास्टर जी, मैंने एक कविता बनाई हैं | सुनाऊं ?” मास्टर जी ने बबन को कविता सुनाने के लिए कहा | बबन ने अपने छोटे से मुह से छोटी-सी कविता सुना दी|

“गड्ढे बीच सड़क हैं या सड़क बीच गड्ढा

गड्ढा है के सड़क है के सड़क है के गड्ढा |”

बबन की कविता सुनकर मास्टर जी बड़े प्रसन्न हए | भरी कक्षा में बबन की तारीफ करते हुए कहा, “ देखना एक दिन बबन बड़ा आदमी बनेगा |” मास्टर जी की यह बात सुननी ही थी कि बबन ने अपने मोतियों जैसे चमकते दाँतों से मुस्काराते हुए तुंरत रिप्लाय दिया | “ मास्टर जी, हम सब अभी बच्चे हैं, और बड़े होकर हम सभी बड़े आदमी तो बनेहिंगे ही ना ? इसमें कौनसी नई बात हैं |” बबन के इस मासूम उत्तर को सुनकर मास्टर जी भी हँस पड़े थे | उस दिन कक्षा में हँसी का माहोल था | मास्टर जी हँसते हुए एक गीत गुनगुनाने लगे थे | “हँसते-हँसते कट जाये रस्ते, जिन्दगी यूँ ही चलती रही |” और स्कूल की बेल बज उठी |

बबन के साथ स्कूल के बच्चे अपना-अपना दफ्तर उठाकर सड़क से घर की ओर निकल पड़े थे | सभी बच्चे अच्छी और पक्की सड़क जिसमें कोई गड्ढा नहीं हैं | उस रास्ते से अपने-अपने घर की और चल पड़े थे | किन्तु बबन दुसरें बच्चों की तरह नहीं था | वह उन्ह से बिलकुल अलग था | उसे तो गड्ढेवाली सड़क ही पसंद थी | चाहे दुनिया ईधर की उधर क्यों न हो जाये पर बबन ने कसम खायी थी कि वह गड्ढेवाली सड़क से ही गुजरते हुए अपने घर जायेगा | बबन ने क्यों कसम खायी थी यह तो मुझे भी पता नहीं | यदि आप अनुमान लगा सके तो अवश्य लगा लीजिये | उस पर कोई प्रतिबंद नहीं हैं | वैसे बबन को स्कूल और घर से ज्यादा सड़क के बीच में बने गड्ढे बहुत पसंद थे | कभी वह गड्ढे के किनारे बैठ जाता तो कभी बड़ा-सा गड्ढा देखकर उसके भीतर जाकर आराम फरमाता | कभी वह गड्ढे को अपने हाथ से दुलारता तो कभी गड्ढे पर कवितायें बनाकर सड़क के बीच में बनी प्रत्येक गड्ढे को कविता सुनाता | यह उस समय की बात हैं, जब गाँव की सड़कों से गाड़ियाँ कम गुजरा करती थी | सभी बच्चे सोचते कि आखिर बबन को गड्ढे क्यों पसंद हैं ? बबन का यह अजीबो गरीब बर्ताव उसके गाँव से लेकर आसपास के गाँव तक चर्चा का विषय बन चूका था कि बबन को गड्ढे क्यों पसंद हैं?

बबन को कई लोगों ने पूछा भी कि बबन को गड्ढे क्यों पसंद हैं ? किन्तु उनका समाधान नहीं हो पाया | क्योंकि इस प्रश्न का उत्तर तो बबन के पास भी नहीं था | बस उसे गड्ढे पसंद थे तो पसंद थे | उसका उत्तर पता होना यह उसके लिए अवश्यक नहीं था | उसे सड़क के बीच में बने प्रत्येक गड्ढे अपने सबसे प्यारे व्यक्ति जैसे लगते थे | उसे लगता था कि इस सारी दुनिया में यह गड्ढे ही हैं, जो उसे अपने सबसे प्यारे व्यक्ति की तरह प्यार करते हैं | वह अकसर जब भी घर पर होता तो गड्ढों के सपनों में ही खोया रहता था | उसे बिस्तर पर कम ही नींद आती थी | उसने अपने बिस्तर को जब गड्ढेनुमा बना लिया तब जाकर उसे गहरी नींद आने लगी थी | घर के आँगन में भी उसने एक गड्ढा बना रखा था | अकसर वह उस गड्ढे में जाकर खेला करता या उसमें लेट जाता और आसमान की ओर तबतक ताकते रहता जबतक उसे कोई आवाज न दे | बबन को भी कई बार रह-रह कर लगता कि उसे गड्ढे इतने क्यों पसंद हैं | उसने कई बार अपनी माँ से भी पूछा पर माँ ने उसके प्रश्न का कभी समाधान नहीं किया | माँ को लगता कि बबन पर किसी ने कोई जादू-टोना कर दिया हैं | इसीलिए उसने कई बाबाओं को दिखाया | जो बाबा आत्मचिंतन करते हैं | उन्हें समाधि में कई प्रश्नों के उत्तर मिल जाते हैं किन्तु सारे बाबा भी चक्कर में पड़ गये | उन्हें अंततक प्रश्नों का उत्तर मिला ही नहीं | आखिर उन्होंने भी हार मानली और बबन के माँ के सामने हाथ जोड़ दिए | अब सारे बाबा लोग इसी प्रश्न को खोजने हिमालय की ओर चल पड़े कि आखिर बबन को गड्ढे क्यों पसंद हैं ?

बबन ने देखा कि एक दिन स्कूल से घर की ओर जानेवाली सड़क से सारे गड्ढे गायब हो गये हैं | जिससे वह बहुत प्यार करता था | आज वह गड्ढे सड़क में नहीं हैं | उसका दर्द कोई भी समझ नहीं सकता था | उस दिन उसकीं आँखों ने गँगा और जमना नदियों में बाढ़ उत्पन्न कर दी थी | बबन दुखी था, पर विवश नहीं था | वह अपने घर गया और आंगन में पड़ा हुआ सब्बल उठा लाया | उसने मन ही मन पहले वाले गड्ढों को याद किया और देखते ही देखते सड़क में एक बड़ा-सा गड्ढा बना दिया | अबतक उसका दुखी मन सड़क में उसके द्वारा बनाये गये गड्ढे को देखकर पुलकित हो गया था | अब वह पहले-सा खुश था | उसके द्वारा बनाये गये गड्ढे के किनारे बैठा बबन ने महसूस किया कि किसी ने उसके पीठ पर लाथ जड़ दी हैं | कुछ समय के लिए बबन को कुछ समझ ही नहीं आया कि आखिर उसके साथ क्या हो रहा हैं, क्यों हो रहा हैं | कुछ देर बाद उसके कानों में शब्द पड़े, “ अबे साले, तेरे बाप की सड़क हैं, जो सड़क में गड्डे बना रहा हैं | इतनी मेहनत से यह सड़क मंजूर हुई हैं | तू उसमें गड्डे बना रहा हैं |” उस दिन बबन की एक इमानदार नेता से बहुत कुटाई हुई | बबन ने उस दिन ठान लिया कि एक दिन वह इस का बदला लेकर रहेगा | उसने कसम खायी कि वह पढ़ लिखकर एक बड़ा आदमी बनेगा और केवल इसी सड़क में ही नहीं बलके पुरे भारत की सडकों में गड्डे बना देगा | बबन के गड्ढा प्रेम को देखते हुए लोगों ने उन्हें “गड्ढेवाले” उपाधि से समानित किया | इस तरह बबन बने बबन गड्ढेवाले|

बबन १६ साल की उम्र में कॉलेज में प्रवेश कर गये, तो २१ साल का होने के बाद ही बाहर निकले | जब वे कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे, तो उन्होंने अपने जीवन के लक्ष्य को नहीं भुला था | देखते ही देखते वे कॉलेज के छात्र नेता बन गये | बड़ी भारी मात्रा में छात्र उनका भाषण सुनने के लिए इकट्ठा होते थे | उनकी वाणी में ऐसा प्रवाह था कि जो भी सुनता उस प्रवाह के साथ बह जाता था | एक दिन बबन गड्ढेवाले ‘गड्ढों के आन्दोलन’ को लेकर सम्बोधित कर रहे थे | उनका कहना था कि, “ इस देश के सड़क प्रेमी नेता और इंजिनियर हमारे गड्ढा प्रेमी नेत्ता, इंजीनियर और इस आन्दोलन के दुश्मन हैं | हमें उनके खिलाफ संगठित होना पड़ेगा | वे सड़क बनाकर देश की प्रगति करना चाहते हैं | उनका मानना हैं कि देश में अच्छी और मजबूत सड़क बनेगी तो देश का सर्वांगींन विकास होगा | समय और पेट्रोल बचेगा | दुर्घटनायें कम होगी | लेकिन मैं कहता हूँ कि बिना गड्ढों वाली सड़क से तो सिर्फ देश का भला होगा | क्या कभी आप ने यह सोचा है कि सड़कों में यदि गड्ढे ही नहीं बनेगे तो हमारा क्या होगा ? हम तो सड़क पर आ जायेगें | गरीब-भिखारी बन जायेंगे और ईसी बिना गड्ढे वाली सड़क पर हमें जनता के सामने भीख मांगना पड़ेगा | यह नहीं चलेगा | देश का विकास हो और हमारा नहीं, यह सरासर अन्याय हैं | हमने पढ़ाई इसीलिए की हैं कि हम देश में किसम-किसम के गड्ढे अलग-अलग तरह से बनायें | हम सड़के ऐसी बनायेंगे कि पहले उसमें गड्ढा बनेगा और बादमें उपर से उसे ढक दिया जायेगा | किसी को दो-तीन महीनों तक पता ही नहीं चलेगा कि गड्ढों को सड़क से ढका गया हैं | इस बात की गारंटी होगी कि पहली बरसात में ही सड़क उखड़ जायेगी और सरकार को फिर से नई सड़क के लिए हमें बुलाना ही पड़ेगा | दोस्तों, हमें प्रत्येक गाँव, गली, शहर, नगरों में हमें सिर्फ और सिर्फ गड्ढे ही बनाना हैं | हमारा एक ही सपना हैं कि पुरे भारत को गड्ढामय बनाया जायें | इसके लिए हमें जो करना पड़े वो हम करेंगें | हमें देश के गड्ढा प्रेमी नेताओं, इंजीनियरों, ठेकेदारों को मिलकर मुट्ठीभर सड़क प्रेमी नेताओं, इंजीनियरों, ठेकदारों का जमकर विरोध करना चाहिए | मैं तो कहता हूँ कि उन्हें दुनिया की सड़क से हटा देना चाहिए |”

उस दिन का बबन का सम्बोधन दिशा बदलने वाला था | सभी उसके उस भाषण से इतने प्रभावित हुए कि सबने कसमें खायी कि वे इस देश को गड्ढे में डालकर ही दम लेंगें | बबन को पता नहीं था कि यह भाषण उसके जिन्दगी में एक नया मोड़ लेकर आयेगा | बबन के उस दिन के भाषण से एक लड़की प्रभावित हुई और इसका नतीजा यह हुआ कि बबन का विवाह उसी लड़की से हुआ | उस दिन बबन को उसका सपना पूरा करने में सहायता करनेवाली उसे सुंदर गढ्ढा प्रेमी प्यारी पत्नी मिल गयी थी | बबन का हौसला अब दुगना हो चूका था | आये दिन बबन की पत्नी उसे इस आन्दोलन को तीव्र करने के लिए कहती थी | उसने अपनी पत्नी को वादा भी किया था कि वह उसे गड्ढों से भरी सड़क उपहार में देगा | एक दो महीने तक बबन इस कार्य में जी जान से लगा रहा किन्तु दो महींने बाद कुछ ईमानदार लोगों के सम्पर्क में आने से बबन में ईमानदारी का भुत संवार हो चुका था | इसका नतीजा यह हुआ कि बबन ने देश की सड़कों को गड्ढा रहित बना दिया | जब बबन की पत्नी को इस बात का पता चला कि उसका पति ईमानदार लोगों के साथ रहकर ईमानदार हो गया हैं | उसका गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ चुका था | एक दिन वह अपने पति को बिना बतायें तुलसीदास के रत्नावली की तरह अपने मइके चली गयी | बबन जब घर लौटा, देखता हैं तो क्या उसकी प्यारी धर्म पत्नी घर पर नहीं | वह घर, पड़ोस, गली, सखी-सहेलियों सबको पूछ-पूछ कर हार गया किन्तु प्यारी पत्नी का पता ही नहीं चला | बबन भयभीत था कि आखिर उसकी पत्नी गयी कहाँ, उसने मन ही मन सोचा कि वह तो जहाँ सम्भव हो सकता हैं, वहाँ-वहाँ सभी जगह ढूंड चूका हैं | पर एकाएक उसे याद आया कि एक जगह ऐसी हो सकती हैं,जहाँ उसकी प्यारी पत्नी जा सकती हैं | वह जगह थी उसका मईका | बबन ने मइके में फोन मिलाया किन्तु वहाँ कोई उसे फोन का रिप्लाय देने के लिए तैयार ही नहीं था | अबतक प्यारी पत्नी को ढूंडते रात हो चुकी थी | उससे रहा नहीं गया | वह तुरंत अपने ससुराल की ओर दुपय्या यंत्र पर निकल पड़ा | गिरते-पड़ते आखिर वह अपने ससुराल में पहुंच ही गया | सीधे द्वाजे से जाने के बजाए वह पीछे के रास्ते सीधे पत्नी के कमरे में धरस गया | पत्नी को लगा कि कोई चोर गुस आया हैं इसीलिए उसने कोने में पड़े झाड़ू से पिटाई कर दी | पिटाई करते हुए जब आवाज कुछ जानी पहचानी लगी तब पत्नी ने पिटाई रोकते हुए बल्ब ऑन किया | देखती हैं तो क्या उसका पति बबन सामने खड़ा था | प्यारी पत्नी को अनजाने में अपने पति की धुलाई करने पर पश्च्याताप हुआ |

“बबन जी, आप हैं | मुझे माफ कर देना | मैंने सोचा कोई चोर हैं | आप भी ना, सारी गलती आपकी ही हैं | भला ऐसे कोई रात के तीन बजें चोरी-छुपे आता हैं |” पति बबन को इस बात का बुरा नहीं लगा किन्तु ख़ुशी इस बात की थी कि उसकी प्यारी पत्नी उसके सामने खड़ी थी | “प्यारी पत्नी, गलती किसी की भी हो, पर आपको मैं सामने देख कर बहुत खुश हूँ | मुझे यह बताना कि बिना बतायें तुम्ह यहाँ कैसे चली आयी ? मैं वहाँ आपको कहाँ-कहाँ नहीं ढूंढा | पर आप मुझे कहीं मिली नहीं | आखिर आप यहाँ मिली तो अब जान में जान आ गयी हैं | बताओं आखिर आप मुझे बिना बतायें यहाँ क्यों चली आयी|?” एकाएक पत्नी को याद आया कि वह अपना घर छोड़ कर मयके क्यों चली आयी | प्यारी पत्नी ने अपने पति को रत्नावली की भांति फटकार लगायी | अपने नश्वर देह को बताते हुए | महान उद्देश्य को याद दिलाया | “मैंने आपसे इसीलिए विवाह किया कि आप एक महान उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं | आपने सम्पूर्ण देश को गढ्ढामय बनाने की कसम खायी थी | यहाँ का प्रत्येक सड़क इंजीनियर, कोंट्रेक्टर, नेता को इस महान अभियान में शामिल करना था | पर आप यह सबकुछ भूल गये और मेरे इस अस्थि पंजर वाले नश्वर देह को प्राप्त करने के लिए दौड़े आयें|ऐसे प्रेम को धिक्-धिक् धिक्कार हैं | यह देश जब गढ्ढे में जायेगा तब ही हम उपर उठ सकते है | मैंने कसम खायी हैं, जबतक आप सारे देश को गढ्ढामय नहीं बनायेंगे तबतक मैं आपके पास नहीं आउंगी |”

उस दिन बबन की आँखे खुल चुकी थी | उसे अपना उद्देश्य याद आ चुका था | उसने भी अपनी प्यारी पत्नी के सम्मुख कसम खायी कि वह तब ही उसके सामने आयेगा जब वह सारे देश की सड़कों को गढ्ढामय बना देगा | हमारा देश कई बबनों से भरा पड़ा हैं | ऐसा लगता हैं कि इन सभी बबनों ने किसी न किसी प्रकार की कसम अवश्य खायी होगी | जिस कारण वे ईमानदारी से सड़क में गढ्ढे बनाने का काम कर रहे हैं | किसी भी देश की प्रगति में अबाद गति से प्रवाहित होने वाले परिवहन का महत्वपूर्ण योगदान होता हैं | किन्तु देश का प्रत्येक बबन उस गति को खण्डित कर देश को हानि पहुंचा रहा हैं | पता नहीं यह सिलसिला कबतक चलता रहेगा | देश में ऐसे कानून की आवश्यकता हैं, जो सड़क का कार्य ईमानदारी से पूरा कर सकें | आये दिन सड़क में बने गढ्ढे के कारण न जाने कितनी दुर्घटनाएँ होती हैं | कितने लोग मर जाते हैं, हाथ, पैर टूट जाते हैं | कई स्त्रियों की डिलेवरी हो जाती हैं | वाहनों के पुर्जे खराब होते हैं | आर्थिक हानि होती हैं | किन्तु बबन जैसे लोगों पर इस बात का असर क्यों नहीं हो पाता | आखिर वे ऐसा कार्य करते ही क्यों हैं ? इसके कारणों को खोजने की आवश्यकता हैं | हो सकता हैं, उन्हें सही समय पर उचित धनराशी नहीं मिलती हो | कारण कोई भी हो सकता हैं |

बबन ने पूरी ईमानदारी के साथ अपनी प्यारी पत्नी को दिया हुआ वादा पूरा कर दिखाया | उसने देश को आखिर गढ्ढे में डाल ही दिया | अर्थात गड्ढों से भरी हुई सड़क बना दी | अब समय था प्यारी पत्नी से मिलन का | बबन को दो-दो खुश खबरी मिलने वलित थी | एक तो प्यारी पत्नी स्वयं अपने पति के पास लौट रही थी | तो दूसरी खबर बबन अब पिता बननेवाला था | प्यारी पत्नी फोर व्हीलर में सवार होकर गड्ढे से भरी सड़क को प्यार भरी नजरों से निहारती हुई, अपने पति पर गर्व करती, अपने पति की ओर बढ़ रही थी | एकाएक बबन के फोन की घण्टी बज उठी |

“ बधाई, आप पिता बन गये |”

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