कहानी भोला की - (अंतिम भाग ) राज कुमार कांदु द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

कहानी भोला की - (अंतिम भाग )



पुलिस चौकी से निकल कर भोला एक पार्क के सामने लगे बेंच पर सो गया ।

सुबह देर से नींद खुली थी । उठकर अब उसे कुछ काम धाम करने की चिंता सताने लगी । वहीँ बैठे हुए सोचने लगा ‘ अब हम क्या करें ? ‘

कुछ देर बाद वह उठा और सामने की ईमारत के सामने जाकर खड़ा हो गया । वहाँ एक बोर्ड लगा था जिस पर लिखा था ‘ यहाँ मेहनती आदमियों की जरुरत है ! रहना खाना फ्री । ‘

बस फिर क्या था ? भोला ने सोच लिया कि बस उसे यहीं पूछना चाहिए । संयोग से उसे जहाँ पूछना था वह ऑफिस खुली थी । ऑफिस के सामने जाकर इधर उधर देखा और किसी को न पाकर सीधे ऑफिस में घुस गया । अचानक उसको सामने देखकर ऑफिस में बैठा शख्स कुछ नाराजगी भरे स्वर में बोला ” क्या तुम्हें इतना भी नहीं मालुम कि किसी भी ऑफिस में घुसने से पहले आने की इजाजत लेनी पड़ती है ? ”

छूटते ही भोला बोल पड़ा ” अरे तो मैं कहाँ ऑफिस में रहने आया हूँ ? यही पूछने तो आया हूँ कि आपकी इजाजत हो तो अन्दर आ जाऊं ? ”

सामने बैठा शख्स अपना सिर धुन कर रह गया । बोला ” और अन्दर आने की जरुरत नहीं है । बोलो क्या काम है ? ”

” लो जी ! आप हमसे ही पूछ रहे हो क्या काम है ? अरे भाई ! काम मिलेगा का बोर्ड लगाये आप बैठे हो और हम बताएँगे क्या काम है ? हाँ ! आप बताओ क्या काम है ? ” भोला ने अपना दिमाग चलाया तो सामने वाले का दिमाग घूम कर रह गया ।

” अच्छा ! तो तुम काम के चक्कर में आये हो । बताओ क्या काम कर सकते हो ? ” उस आदमी ने पूछ लिया था ।

” अरे क्या साहब हम आपको कहीं से भी बेकार नजर आ रहे हैं ? ये कहो कि हम क्या नहीं कर सकते ? इश्वर की दया से हम बहुत कुछ कर सकते हैं । दिमाग तो हमारा बचपन से ही बहुत तेज है । ” भोला ने थोडा गर्व से गर्दन ऊँची करते हुए बताया ।

” अच्छा ये बताओ ! तुम गाड़ी चला लेते हो ? ”

” अरे ! क्या साहब ! आप भी ऐसा मामूली सा काम पूछ रहे हैं । गाड़ी तो हम बचपन से ही चला रहे हैं न ! छोटे थे एक टायर लेकर उसीका गाड़ी बनाकर चलाते थे । कुछ बड़े हुए तो अपने पडोसी बालु काका का ठेला हम ही तो ठेल कर चौराहे तक ले जाते थे और फिर रात को ले आते थे । रामलाल काका को भी अपनी बैलगाड़ी लेकर कहीं जाना होता था तो मुझे ही बुलाते थे । कहते थे ‘ तू बहुत बढ़िया गाड़ी हांकता है ‘ ” भोला ने पूरी जानकारी उस आदमी के सामने खोलकर रख दी ।

” अच्छा अच्छा ! ठीक है । हम समझ गए । बेगारी काम कर लोगे न ? ” उस आदमी ने फिर पूछा ।

” क्यों नहीं साहब ! ठीक है । ” भोला ने सहमति व्यक्त की ।

” तुम्हें एक दिन के 25 रुपये मिलेंगे । मंजूर है ? ” उस आदमी ने पूछा था ।

” ठीक है ! ” भोला को तो काम ही चाहिए था सो वह तुरंत ही तैयार हो गया ।

” ठीक है अब बाहर जाकर खड़े हो जाओ । हमारा आदमी आएगा । वो तुमको काम बता देगा । ” कहकर उस आदमी ने उसे बाहर जाने का इशारा किया ।

” अरे काम तो आपने बता ही दिया है । अब वो आदमी क्या बताएगा ? ” भोला ने प्रतिप्रश्न किया ।

वह आदमी अब तक काफी परेशान हो चुका था । अचानक झल्ला उठा ,” साले ! एक बार कहा हुआ तुझे समझ में नहीं आता ? तुझे बाहर जाने को कहा न ! ”

” अरे वाह साहब ! आप भी मुझे जानते हैं ? पहले नहीं बताया । .. अच्छा ! …..इसीलिए जब मैं अन्दर घुस आया था आपने कुछ नहीं बोला था । कोई बात नहीं मैं बाहर खड़ा हूँ । ” कहकर भोला बाहर निकल आया ।

कुछ देर बाद एक आदमी आया । भोला और उसके साथ खड़े कुछ लोगों को अपने साथ लेकर एक निर्माणाधीन ईमारत के पास ले गया । वहाँ एक दुसरे आदमी से मिलाते हुए बोला ” ये तुम्हारे मालिक हैं । ये जो बोलेंगे तुम्हें करना है और शाम को यही तुम्हें पैसे भी देंगे । ” कह कर वह आदमी चला गया ।

भोला सभी मजदूरों के साथ बालु ढोने का काम करने लगा ।

कुछ दिन भोला ने काम किया । उस दिन ईमारत में छत ढालने का काम चल रहा था । एक और आदमी सिर पर बड़ी सी टोपी लगाये मजदूरों को निर्देश दे रहा था । भोला ने साथी मजदूरों से पूछा ” यह आदमी कौन है ? कुछ कर भी नहीं रहा है । ख़ाली बात ही कर रहा है । मालिक इसको पैसे क्यों देगा ? ”

” अरे ये इंजिनियर है । मालिक इसको हम लोग से सौ गुना ज्यादा पैसा देगा । ” उस मजदुर ने बताया ।

यह बात भोला को हजम नहीं हुई । आखिर वह आदमी कुछ कर भी नहीं रहा है और पैसे भी हमसे ज्यादा लेगा । यह क्या बात हुई ?

दोपहर में भोजन के अवकाश में वह सीधे उस आदमी के पास पहुँच गया । नमस्ते करके उससे पूछ ही लिया ” आप हमारे साथ कुछ करते भी नहीं फिर भी मेरा साथी बता रहा था की मालिक आपको बहुत पैसे देता है । क्यों ? ”

“क्योंकि मैं इंजिनियर हूँ । ” उस आदमी ने बताया ।

” ये इंजिनियर क्या होता है ? ” भोला ने पूछ लिया ” और वह करता क्या है ? ”

इंजिनियर ने समझ लिया था कि यह मंद बुद्धि इन्सान इतनी जल्दी पीछा नहीं छोड़ेगा । वहीँ नजदीक ही ईमारत के एक खम्भे पर अपनी हथेली रखकर भोला से बोला ” अब तू मेरी हथेली पर पूरी ताकत से घूंसा मार फिर मैं बताऊंगा कि इंजिनियर किसे कहते हैं । ”

” यह कौन सी बड़ी बात है ? लेकिन चोट आपको लगेगी तो मुझे नहीं बोलना । मेरा घूंसा बड़े जोर का लगता है । ठीक है ? ” कहकर भोला ने पूरी ताकत से घूंसा मारा । जैसे ही उसने घूंसा चलाया इंजिनियर ने अपना हाथ वहां से हटा लिया ।

भोला चीखकर वहीं नीचे बैठ गया । उसकी मुट्ठी खम्भे से टकराकर जख्मी हो गयी थी । वह आदमी उसकी तरफ देखते हुए बोला ” अब समझा ! इसी को इंजिनियर कहते हैं । ”

इंजिनियर के जाने के बाद भोला उठा और सोचने लगा ‘ अरे! बात ही बात में उस इंजिनियर ने मुझे बता दिया कि इंजिनियर किसे कहते हैं । इसका मतलब अब मैं भी इंजिनियर बन गया । अब चलो गाँव चलते हैं । यहाँ रहकर क्या फायदा ? माँ ने कहा था नाम कमा के आना । अब इंजिनियर बन के जा रहा हूँ । इससे बड़ा नाम क्या होगा ? लेकिन जाने से पहले एक बार पुलिसवाले से मिल लेता हूँ ।’

बस इतना सोचना ही था कि अगले दिन सुबह सुबह वह काम पर न जाकर अपने सारे सामान के साथ पुलिस चौकी पहुँच गया ।

उसे देखते ही थाना इंचार्ज ने मेज की दराज से एक लिफाफा निकाल कर उसे देते हुए बोला ” भोला ! तुम्हारी वजह से वह इनामी बदमाश पकड़ा गया और पांच करोड़ का नशे का सामान भी बरामद हुुुआ है । सरकार ने खुश होकर तुम्हें यह इनाम दिया है । ”

भोला ने लिफाफा हाथ में लेते ही उसे खोलकर देखा । उसे उम्मीद थी उसमें कुछ पैसे होंगे । लेकिन पैसों की जगह उसमें एक कागज था जिसमें कुछ लिखा हुआ था । उसने निकाल कर देखा । उसपर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और एक जगह पच्चीस लाख मात्र हिंदी में लिखा था ।

भोला ने चेक के बारे में न कभी सुना था और न ही जानता था । सो मुँह बनाते हुए बोला ” अरे क्या साहब ! आप बताये सरकार बहुत खुश हुई है तो हम समझे कि हमें कुछ इनाम मिला है ,लेकिन इसमें तो सौ दो सौ रुपये के बदले में यह कागज का टुकड़ा ही मिला है । क्या करें हम इसका ? ”

” अरे बेवकूफ ये कागज का टुकड़ा नहीं चेक है चेक ! ले जा इसे अपने बैंक के खाते में जमा करा देना बहुत सारा पैसा तेरे खाते में आ जायेगा । इतना पैसा कि तुझे जिंदगी भर कुछ नहीं करना पड़ेगा । ” इंचार्ज ने उसे समझाया था ।

भोला सारी बात तो नहीं समझा लेकिन इतना अवश्य समझ गया था कि यह कागज बहुत किमती है । सो इंचार्ज को सलाम कर वहाँ से निकल पड़ा ।

भोला सीधे अपने गाँव पहुंचा और माँ के चरणस्पर्श कर बोला ” माँ ! तू जैसा बोली थी मैं ने वैसा ही किया । शहर में मेरा बहुत नाम हो गया है । सभी लोग मुझे जानते हैं । और देख ! सरकार ने तो मुझे इनाम भी दिया है । और हाँ ! मैं शहर में इंजिनियर भी बन गया हूँ । ”

उस छोटे से गाँव में भोला के बहुत पैसा कमा कर और इंजिनियर बन कर आने की खबर जंगल के आग
की तरह फ़ैल गई । जान पहचान के लोग उससे मिलने के लिए आने लगे ।

एक दिन गाँव के बहुत से लडके उससे खेल के मैदान में मिले । कुछ लड़कों ने पूछ ही लिया ” अरे तू तो अभी जल्दी ही शहर गया था । इतनी जल्दी इंजिनियर कैसे बन गया ? कुछ करके दिखा जिससे हम मान जाएँ कि तू वाकई इंजिनियर बन गया है । ”

भोला ने इधर उधर देखा लेकिन मैदान में खम्भा कहाँ मिलता ? तुरंत अपना एक हाथ अपने गाल पर रखते हुए लड़कों से बोला ” देखो ! मैं अभी बताता हूँ इंजिनियर किसे कहते हैं । ” फिर एक मजबूत हट्टे कट्टे लडके से बोला ” अब तू मेरे पंजे पर पूरी ताकत से मार । अभी सबको पता चल जायेगा कि इंजिनियर किसे कहते हैं । ”

फिर क्या था ? भोला के हाँ कहते ही उस लडके ने जोर का घूंसा चलाया और उसी क्षण भोला ने अपना हाथ अपने गाल पर से हटा लिया ।

अब क्या हुआ होगा आप लोग खुद ही बेहतर समझ सकते हैं ।

बस एक सबक है कि नक़ल में भी अकल की जरुरत होती है , यह कभी नहीं भूलना चाहिए ।


🙏 इति शुभम 🙏

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Shahid

Shahid 11 महीना पहले

Alok Mishra

Alok Mishra मातृभारती सत्यापित 12 महीना पहले

Sanjay Thakre

Sanjay Thakre 12 महीना पहले

Suresh

Suresh 12 महीना पहले

Udayprakash Kushwaha

Udayprakash Kushwaha 12 महीना पहले