अघोरी का शाप - 3 नवीन एकाकी द्वारा रोमांचक कहानियाँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • AI का विकल्प

    AI का विकल्प : क्या प्राचीन भारत में चेतना-आधारित बुद्धिमत्त...

  • Muhabbat Ek Sabaq - 14

    वह दोनों तैयार हो कर नीचे आईं तो सब लॉन में बैठे चाय पी रहे...

  • Mafia King - 7

    हॉस्पिटल से बाहर निकलते ही ऐसा लग रहा था जैसे अंकिता और उसकी...

  • अवतार गाँव - 1

    अध्याय १: बिजली, बादल और भूली हुई प्रार्थनाआसमान उस रात फटने...

  • The Last Promise - 12

    किसन कुमार शिव नारायण के सामने हाथ जोड़ते है और कहते है --कि...

श्रेणी
शेयर करे

अघोरी का शाप - 3

कुछ देर तक उन दोनों को निहारने के बाद वो अघोरी एक भयानक खरखरती तेज आवाज़ में आदेशित अंदाज़ में उनसे बोला...हर हर महादेव...जल पिला मुझे।

उस की आवाज़ इतनी अजीब थी जैसे कोई जानवर की गुर्राहट हो। उस आवाज़ ने बाबा के माँ बाप को और भी दहशत में डाल दिया।

बाबा के पिता ने तुरंत ही उस अघोरी को हाथ जोड़ प्रणाम किया और बिना कुछ बोले कांपते हाथों से कुंए में लगी बाल्टी में पानी भरकर उस अघोरी की ओर बढ़ाया। बाबा की माँ कुएं की जगत की ओट से उस अघोरी को देख रही थी। उसे उस अघोरी को देख डर के साथ साथ हंसी भी आ रही थी पर किसी तरह वो उसे रोके हुए थी।

अघोरी ने अपना कमण्डल आगे बढ़ाकर पानी लिया और पीने लगा। बाबा का पिता हाथ जोड़े उसे देखता रहा। एक ही सांस में वो पूरा कमण्डल खाली कर गया और जोर से जयकारा लगाया... हर हर महादेव

अघोरी ने एक बार फिर अपनी सुर्ख नज़रे उन दोनों पर डाली और बिना कुछ कहे जाने लगा। अभी वो चन्द कदम ही बढा था कि अचानक बाबा की माँ की हंसी छूट पड़ी जो शायद उस अघोरी के डर से वो काफी देर से दबाए रखी थी।
************************************
अघोरी ठिठक कर वंही रुक गया और एक झटके से पलट कर उसने बाबा की माँ को देखा जो जगत की ओट से मुंह मे पल्लू दबाए अपनी हंसी रोकने की कोशिश कर रही थी। अघोरी की आंखे अचानक गुस्से से और भी लाल हो गयी थीं। बाबा की माँ और बाप डर से कांपने लगे।

वो दो कदम आगे बढ़ कर आया और उसी गुर्राहट भरी आवाज़ में चीख़ते हुए बाबा की माँ से बोला-

"तू मुझे देख हंस रही है न, तुझे मेरे इस रूप को देख उपहास आ रहा है न? तूने मुझे उपहास का पात्र समझ लिया और हंस कर मेरा उपहास उड़ाया मेरा अपमान किया....इसका तुझे दण्ड मिलेगा, एक नागा अघोरी का अपमान करने का दुष्परिणाम भोगना होगा तुझे और उसका दुष्प्रभाव तेरे अजन्मे बच्चे पर भी होगा......"

"जा मैं तुझे श्राप देता हूं कि जो तेरे कोख से जन्म लेने वाला बालक है वो मंदबुद्धि होगा जिसे देख सब उसका भी उपहास उड़ाएंगे। उस पीड़ा से वो भी परिचित होगा जो तूने मुझे पहुंचाई है। तू आजीवन अपने इस कृत्य का बोझ लेके अपने को कोसती रहेगी "

हमे माफ कर दो महाराज, इससे नासमझी में गलती हो गयी। हम आपसे माफी मांगते हैं महाराज...बाबा का पिता भाग कर अघोरी के चरणों मे लौटता हुआ बोला।

बाबा की माँ तो अघोरी की बातें सुनते ही जैसे बेहोश सी हो गयी। वो वंही जगत पर ही गिर पड़ी।

चल दूर हट मुझसे , उसने मेरा अपमान किया है उसे दण्ड अवश्य मिलेगा- अघोरी ने बाबा के बाप को पैरों से धकेलते हुए कहा

पर महाराज वो मेरी पत्नी है और उससे ये भूल अनजाने में हो गयी, उसका आपका अपमान करने का कतई इरादा न था...उसे क्षमा कर दीजिए महाराज... बाबा के बाप ने रोते हुए अघोरी के हाथ जोड़ विनती की।


शेष अगले भाग में