गुमनाम : मर्डर मिस्ट्री - 3 Kamal Patadiya द्वारा क्राइम कहानी में हिंदी पीडीएफ

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गुमनाम : मर्डर मिस्ट्री - 3

अजय को पूरी रात नींद नहीं आती है। वह बिस्तर पर करवट बदलते हुए सोचता है कि आखिर 2-2 बिजनेसमैन की हत्या कौन कर सकता है? उससे किसी को क्या फायदा?

अगली सुबह अजय जल्दी से तैयार होकर डायमंड मोल में बिग ब्लास्ट की शोप पर पहुंच जाता है। वहां पर वह बिग ब्लास्ट शॉप के ओनर मिस्टर रोबर्ट से मिलता है। मि. रोबर्ट को वह मिस्टर रॉय और मिस्टर चड्ढा के केस की पूरी जानकारी देता है और उनके कंपनी के एनर्जी ड्रिंक्स के बारे में पूछताछ करता है।

रोबर्ट उन्हें बताता है कि "हमारे यहां कंपनी से सीधा माल आता है और हमारे गोडाउन में अनलोड हो जाता है। हमारे गोडाउन में एनर्जी ड्रिंक्स के कैंन की पैकेजिंग होती है। हमारे यहां कई VIP कस्टमर है जिनके यहां हम डिलीवरी देते हैं। मि. रॉय और मि. चड्ढा भी हमारे पुराने कस्टमर थे। हमारे साथ उनके बहुत ही अच्छे रिश्ते थे। उनके बारे में पेपर में पढ़ा और टीवी पर भी देखा। मि. रॉय और मि. चड्ढा की मौत की खबर सुनकर बहुत ही दुख हुआ।

"उन दोनों के यहां डिलीवरी देने के लिए कौन जाता था?" अजय ने रोबर्ट से पूछा।

"वह दोनों बिजनेस पार्टनर थे और अच्छे दोस्त भी थे इसलिए उन दोनों में से एक के यहां से भी फोन आता था तब हम दूसरे पार्टनर का पार्सल भी उनके साथ ही डिलीवर कर देते थे। normally, राजू ही उनके यहां डिलीवरी करने जाता था"

"आप जरा राजू को बूला देंगे, मुझे उनसे जरा बात करनी है।"

रोबर्ट राजू को आवाज देकर बुलाता है।

"राजू जरा इधर आओ, इंस्पेक्टर साहब तुमसे कुछ पूछना चाहते हैं।"

राजू घबराता हुआ इंस्पेक्टर अजय के पास आता है।

"देखो राजू घबराओ मत, क्या तुम मि. रॉय और मि. चड्ढा के घर पर डिलीवरी करने जाते थे?" अजय ने राजू को आश्वासन देते हुए पूछा।

"हां सा'ब, मैं ही जाता था।" राजू ने जवाब दिया।

"तुम आखरी बार वहां पे डिलीवरी करने के लिए कब गए थे ?"

"साहब, लगभग 10 दिन पहले गया था।"

"राजू तुम मुझे यह बताओ कि जब तुम आखिरी बार डिलीवरी के लिए गए थे तब रास्ते में किसी ने तुम्हें रोका था? या कहीं पर तुम रूके थे?"

"नहीं साहब, ऐसा तो कुछ नहीं हुआ था। जब हमारी शॉप बंद होने के बाद मैं गोडाउन से ही पार्सल लेकर चड्ढा साहब के घर पर डिलीवरी करके अपने घर चला गया था।"

"तुमने वह डिलीवरी के पार्सल किसके हाथ में दिए थे?"

"चड्ढा साहब के सिक्योरिटी गार्ड को मैंने पार्सल दिये थे।"

अजय मि. रोबर्ट की ओर देखकर बोलता है कि "मि. रोबर्ट ये बताइए आपके शॉप में कितने लोग काम करते हैं?"

मि. रोबर्ट अजय को बताते हैं कि "दो सेल्स पर्सन, चार डिलीवरी मेन और दो पैकेजिंग करने वाले”

“पैकेजिंग करने वाले कहाँ है?”

“वो सामने के कॉम्प्लेक्स के basement में हमारा गोडाउन है, वहां पर कस्टमर ऑर्डर के अनुसार एनर्जी ड्रिंक के केन बॉक्स में पार्सल करके देते है।"

"उन दोनों को यहां बुलाइए, मुझे उनसे कुछ पूछताछ करनी है।"

"राजू, जरा सलीम और हिरेन को बुलाकर लाओ" रोबर्ट राजू से कहते हैं।

"साहब, हिरेन तो दो दिन से काम पर नहीं आया है, शायद उसकी तबीयत खराब हो गई होगी, सलीम को बुलाता हूं” राजू ने कहा।

थोड़ी देर बाद सलीम वहां पर आता है। रोबर्ट सलीम को कहते हैं "यह इंस्पेक्टर अजय है, तुमसे कुछ पूछताछ करना चाहते हैं।"

"जी बोलिए, साहब।" सलीम अजय की ओर देखकर बोलता है।

"सलीम, मुझे यह बताओ आखिरी बार जब मिस्टर चड्ढा के घर पर एनर्जी ड्रिंक की डिलीवरी हुई तब उनके ऑर्डर की पैकेजिंग किसने की थी?"

"मुझे पता नहीं है साहब"

"तुम्हें पता नहीं है मतलब?" अजय आश्चर्य से सलीम की ओर देखकर बोला।

"साहब, उस दिन मेरी चाचा की लड़की की शादी थी इसलिए मैं 2 दिन के लिए छुट्टी पर गया था।"

"तो उस दिन हिरेन अकेला था?..."

"हां... शायद...."

"शायद... मतलब?"

"जब भी मैं छुट्टी पर जाता था तब कभी-कभी हिरेन का दोस्त विक्रम यहां पर उसकी हेल्प करने के लिए आता था।"

"यह विक्रम कौन है? तुम उसे जानते हो?"

"नहीं साहब, मुझे तो इतना ही पता है कि वह हिरेन का दोस्त है। मैं जब भी यहां पर नहीं होता था, तभी वह आता था।"

"अच्छा... तुम जा सकते हो सलीम और कोई बात होगी तो मैं तुमसे पूछूंगा।"

"कोई बात नहीं साहब" ऐसा कहकर सलीम वहां से चला जाता है।

"अच्छा राजू... मुझे यह बताओ कि यह दोनों आदमी सलीम और हिरेन कब से यहां पर काम कर रहे हैं और चाल चलन में कैसे हैं?" अजय राजू की ओर मुड़कर पूछता है।

"सा'ब, सलीम तो यहां पर 5 साल से काम कर रहा है बहुत ही मेहनती और ईमानदार आदमी है। हिरेन लगभग 2 साल से काम कर रहा है, वह यूपी के किसी गांव से आया हुआ था, सलीमने ही उसको यहां पर काम पर रखवाया था। वैसे तो अच्छा लड़का है, कामकाज में भी होशियार है पर....."

"पर... क्या...?"

"बुरी संगत का असर तो रहता ही है ना...सा'ब"

"बुरी संगत.....मतलब.....?"

"उसका विक्रम करके एक दोस्त है, जो चाल चलन में बिल्कुल भी ठीक नहीं है, अक्सर वह गोडाउन बंद करने के टाइम पर आ जाता है और गोडाउन बंद करने के बाद दोनों घूमने और दारु पीने निकल जाते है।"

"विक्रम के बारे में मुझे और बताओ।"

"मुझे ज्यादा तो कुछ तो नहीं पता लेकिन अक्सर वह हिरेन के खोली में आया जाया करता है।"

"अच्छा.... राजू, जरा हिरेन को फोन लगाओ मैं उससे बात करना चाहता हूं" अजय राजू से कहता है।

राजू हिरेन का फोन लगाता है लेकिन उसका मोबाइल नहीं लगता है।

"साहब, हिरेन का मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है।"

"क्या कभी पहले भी उसका मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा था?"

"नहीं साहब, यह पहली बार ही हो रहा है शायद उसके मोबाइल की बैटरी खत्म हो गई होगी।"

"अच्छा राजू यह हिरेन रहता कहां है?"

"यही पास में ही सिद्धार्थ नगर की गली नंबर 4 की 12 नंबर की खोली में उपर के माले पर भाड़े पे रहता है, सा'ब।"

"अच्छा राजू तुम जाओ लेकिन अगर तुम्हें ऐसी कोई बात याद आ जाए जो तुम्हें अजीब लगी हो तो मुझे जरूर बताना।"

"जरूर बताऊंगा सा'ब" ऐसा कहकर राजू वहां से चला जाता है। बाद में, इंस्पेक्टर अजय रोबर्ट से बातचीत करता है।

"देखीये, मिस्टर रोबर्ट शहर के दो नामी बिजनेसमैन का खून हो चुका है और कातिल ने आपके कंपनी के एनर्जी ड्रिंक्स में केमिकल मिलाकर यह खून कीये है। यह मामला बेहद ही संगीन है अगर आपको किसी पर भी डाउट है या कोई ऐसी बात याद आ जाए जो इस घटना से जुड़ी है तो मुझे फोन करके जरूर बताइएगा, यह मेरा कार्ड है। मैं हिरेन के घर पर उससे मिलने जा रहा हूं।"

"Sure sir, I will definitely call you"

"Ok, See you Mr. Robert"

इंस्पेक्टर अजय उसके दो कॉन्स्टेबल के साथ हिरेन के खोली पर पहुंचता है। अजय वहां पर जा कर देखता है तो वहां पर आसपास रहनेवालों की भीड़ जमा होती है।

"क्या हुआ है? सब लोग यहां पर जमा क्यों हूए है?" अजय भीड़ की ओर देखकर बोलता है।

"साहब, खोली में से बहुत ही बदबू आ रही थी इसलिए हमने पुलिस को फोन किया था। अच्छा हुआ आप आ गए साहब" भीड़ में से एक आदमी बोला।

"अच्छा.... इस खोली में हिरेन नाम का कोई रहता है... ना... जो बीग ब्लास्ट शॉप में काम करता है।"

"हां... साहब... लेकिन उसकी खोली का दरवाजा कल से बंद आ रहा है| परसों रात को वो और उसका दोस्त यहां पर पार्टी कर रहे थे, बाद में रात को 1:00 बजे उसका दोस्त यहां से चला गया था। आज सुबह से उसकी खोली में से बदबू आने लगी थी।"

"कौन था..... उसका दोस्त....?"

"पता नहीं साहब, अक्सर यहां पर आता था और दोनों दारू पीकर दंगल मचाते थे। पूरी गली उससे परेशान हो गई थी। एक दो बार हमने मकान मालिक से भी फरियाद की थी लेकिन मकान मालिक ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।"

"इस खोली का मालिक कौन है ?"

"उसको सा'ब हमनें फोन कर दिया है, वह बस आता ही होगा।"

तभी वहां पर दो पुलिस वाले आते हैं और इंस्पेक्टर अजय को देखकर सैल्यूट करते हैं।

अजय उन दोनों को देखकर कहते हैं "इस खोली का दरवाजा तोड़ दो लेकिन अंदर किसी भी चीज को हाथ मत लगाना।"

"ओके.... सर...."

दोनों पुलिस वाले खोली का दरवाजा तोड़ देते हैं। जैसे ही दरवाजा खुलता है अंदर से बदबू आने लगती है। इंस्पेक्टर अजय, कॉन्स्टेबल और सब लोग अपने चेहरे पर रुमाल ढक लेते हैं।

इंस्पेक्टर अजय रूम के अंदर जाकर देखता है तो अंदर पलंग के ऊपर हिरेन की लाश पड़ी होती है। उसके बाजू में टेबल पर बीयर और दारू की खाली बोतलें पड़ी होती है। अजय इन बोतलों को और खाली केन को इकट्ठा करके फॉरेंसिक लैब में टेस्टिंग के लिए भेज देता है।

अजय और कॉन्स्टेबल रूम के अच्छी तरह जांच करते है लेकिन रूम में उसे कुछ मिलता नहीं है जिससे यह पता चले कि रूम में कुछ हाथापाई या मारामारी हुई हो। अजय को समझमें आने लगता है कि मि. रॉय और मि. चड्ढा की तरह हिरेन को भी दारू की बोतल में केमिकल डालकर मार दिया गया है और हो न हो,,, यह काम विक्रम का ही है। तभी अजय की नजर चार्जिंग में रखे हुए हिरेन के मोबाइल पर पड़ती है। अजय उसकी कॉल डिटेल्स मे से लास्ट कॉल डिटेल चेक करता है, जो विक्रम की थी। तभी वहां पर मकान मालिक आता है, अजय उससे पूछताछ करता है लेकिन उसको कोई जानकारी नहीं मिलती है। अजय हिरेन की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज देता है और पुलिस स्टेशन की ओर निकलता है।

अजय हिरेन के मोबाइल के कांटेक्ट लिस्ट में से सबको फोन करके विक्रम के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश करता है लेकिन उसको ऐसा कोई सुराग नहीं मिलता है जिससे विक्रम के बारे में कोई इंफॉर्मेशन मिले। ऐसे ही छानबीन करते करते 2 दिन निकल जाते हैं।

अचानक, तीसरे दिन सुबह अजय को कुछ याद आता है और वह बिग ब्लास्ट की शोप पर पहूँच जाता है। वहां पर अजय रोबर्ट से पूछता है कि "आपके पैकेजिंग डिपार्टमेंट में सीसीटीवी कैमरा तो है.... ना..?"

"हां, लेकिन आपको किस दिन का रिकॉर्डिंग देखना है?" रोबर्ट उनसे पूछता है।

"जिस दिन मि. चड्ढा के घर पर एनर्जी ड्रिंक की केन की डिलीवरी हुई थी, उस दिन का फूटेज मुझे देखना है।"

रोबर्ट उस दिन का फुटेज अजय को दिखाता है। सीसीटीवी फुटेज में अजय देखता है कि विक्रम रात को 8:00 बजे वहां पर हिरेन से मिलने आता है। हिरेन अपने काम में बिजी होता है इसलिए विक्रम उसकी काम में हेल्प करता है। जब हिरेन को मि. चड्ढा के पार्सल के लिए फोन आता है तब वह विक्रम को दो पार्सल बनाने के लिए कहता है।

विक्रम एनर्जी ड्रिंक्स का दो पार्सल बनाने मे लग जाता है। पार्सल बनाते वक्त वह आसपास नजर घूमाता है। हिरेन थोड़ा दूर अपने काम में बिजी होता है तभी विक्रम अपनी जेब में से एनर्जी ड्रिंक्स के 4 कैन निकालता है और 2-2 दोनों पार्सल में रख देता है। शायद विक्रम को पता नहीं था कि गोडाउन में सीसीटीवी कैमरा लगे है। रोबर्ट ने हाल ही में सीसीटीवी कैमरा को गोडाउन में लगवाया था।

अजय को पूरा यकीन हो जाता है कि यह वही एनर्जी ड्रिंक्स के कैन है, जिससे मि. रॉय और मि. चड्ढा की मौत हुई थी। अजय सीसीटीवी की फुटेज को अपनी पेन ड्राइव में ले लेता है और विक्रम का सीसीटीवी में से 1 क्लोज अप फोटो का प्रिंट आउट निकाल लेता है और उस फोटो को अपने खबरीओ में उसको ढूंढने के लिए बांट देता है।

विक्रम के फोटो को देखकर अजय सोच में पड़ जाता है कि इस आदमी को मैंने पहले भी कही देखा है लेकिन कहां पर ???? वह याद नहीं आ रहा है। अजय विक्रम को कहां पर देखा था वह याद करने की कोशिश करता है तभी फॉरेंसिक डिपार्टमेंट से जगदीश शर्मा का फोन आता है और वह अजय को फॉरेंसिक लैब पर बुलाते हैं। अजय तुरंत ही पुलिस स्टेशन से अपनी गाड़ी लेकर फॉरेंसिक लैब जाने के लिए निकलता है।

क्रमशः