बेनामी ख़त - 3 Dhruvin Mavani द्वारा पत्र में हिंदी पीडीएफ

बेनामी ख़त - 3

( ये किसी एक के लिए नही है वल्कि हर उस इंसान के लिए है जिसने कभी जिंदगी में सच्ची मोहब्बत की है लेकिन अब वो उनके साथ नही है । इसका हर शब्द बिल्कुल आजाद है वो जहाँ चाहे वहाँ पहोच सकता है ओर जो चाहे वो ले सकता है । मैं उन लोगो से इसे समझने की उम्मीद नही करता जिसने अपना बचपन अपने माता पिता के साथ गुजारा है या फिर उन लोगो से जिसने कभी सच्ची मोहब्बत नही की । )



Dear , Z ( जहाँ एक अंत होता है )



कानों पे हेडफोन लागए है और उसमें लाउड म्यूजिक बज रहा है क्योकि कुछ वक़्त के लिए मैं बाहरी दुनिया से अनजान बन जाना चाहता हूँ मुझे अपनी दुनिया मे लौटना है......गाना- 'जीवन सुख दुःख का संगम है...' पुराने गानों का शौखिन , साथ मे ढेर सारे जस्बात और उसमें लिखने का चस्का ओर क्या चाहिए बस उसके साथ बहते जाइये आपको आपकी मंजिल मिल जाएगी...

मुझे आज भी अच्छी तरह याद है वो लाचार और बेबस पांच साल का बच्चा ।जिसकी जिंदगी से कुछ उम्मीदें थी कुछ ख्वाहिशें थी । वो बिल्कुल अकेला था । उसे अपने माता पिता बहोत याद आते थे लेकिन वो उनके पास जा नही सकता था । ऐसा नही था कि वो अनाथ था औरो की तरह उसके भी पेरेंट्स थे । लेकिन उससे बहोत दूर । उस बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए उसे शहर भेजा था ताकि कुछ पढ़े लिखे ओर कुछ बेहतर बने। लेकिन क्या वाकहि आज उसका भविष्य बहोत अच्छा है ? मुझे नही पता...उन्होंने जो त्याग किये थे वो सफल हुए भी या नही। वो बच्चा पांच साल का था जो अपने पापा के पास खिलौने की जिद करना चाहता था , वो खाने के वक्त रूठना चाहता था ताकि उसकी माँ उसे प्यार से मनाए और अपने हाथों से खाना खिलाये , कम मार्क्स आने पर वो अपने पिता की डॉट खाना चाहता था , औरो की तरह उसे भी अपनी मम्मी स्कूल छोड़ने आती , छुट्टियों में पापा घूमने ले जाते, वो उन दोनों को संघर्ष करते हुए करीब से देखना चाहता था ...

लेकिन ये सब कभी हुआ ही नही । उसके बचपन का एक वीरान ओर बिल्कुल नीरस वक़्त । जो कभी कोई भी कैसे भी नही भर सकता । एक खामी जो जिंदगी भर चोट देगी । एक वक़्त था जब उसे उनसे शिकायत थी लेकिन आज नही है पता नही क्यो ! शायद उसके बेहतर भविष्य के लिए की गई योजना थी । लेकिन क्या वो सच मे सफल रही ? ये सवाल उसे बहोत सताता है ।

आज वो बच्चा बड़ा हो गया है साथ ही थोड़ा समजदार भी । लेकिन आज औरो की तरह उसके पिता उसके दोस्त नही है । वो आज उनके साथ उस तरह connect नही कर सकता जिस तरह बाकी बच्चे करते है । शायद इतने साल एक दूसरे से अलग रहने की वजह से । वो तब भी अकेला था और आज भी अकेला है बिल्कुल अकेला । कोई ऐसा नही जो उसे सुने...बरसो से कुछ दर्द सीने में दबाए हुए जिये जा रहा है । और इसी दर्द ने उसे हुनरमंद बनाया । उसे कला से नवाजा । वो बेहतर से बेहतर पेंटिंग बना सकता है या फिर अपनी सोच विचारों को कुछ लय में लिख सकता है ।

सालो गुजर गए आगे और भी गुजर जाएंगे। कुछ ऐसे ही दर्द की वजह से वो अपनी उम्र से पहले समजदार हो गया । हालांकि दुनिया ऐसा नही मानती । क्योकि वो कभी जताता नही। वो इसी दर्द के साथ जिंदा था । लेकिन फिर एक दिन...

वो आयी उसकी जिंदगी में । और कुछ वक़्त में उसका सब कुछ बन गयी । पहले एक दोस्त फिर अच्छी दोस्त और फिर जिंदगी, जान , साँसे , धड़कने जो चाहे वो कहो । वो उसका सब कुछ थी । वो उसकी हर बात उसे बताता था । एक अकेली लोती इंसान जिसके सामने उसने खुद को पूरा खोल दिया । वो उसे समजती थी , उसकी ताकत थी , उसके दर्दो की हिस्सेदार । वो भी उससे बेहद प्यार करती थी । उसके आने से उसकी जिंदगी में जैसे सब कुछ बदल गया था । इतने सालों में वो पहली बार इतना खुश रहता था । वो उसकी खुशी की वजह थी । वो दोनों हमेशा साथ रहना चाहते थे । उसे भरोसा था कि कोई उसका साथ दे या नही , कोई उसे समझे या नही वो लड़की उसे हमेशा समझेगी ओर उसका साथ देगी ।

लेकिन एक दिन वो लड़की भी उसे छोड़कर चली गई कभी न लौटने के लिए । और उसे बस इतना कहा कि वो उसे भूल जाये अब सब खत्म हो गया और वो आगे बढ़ जाये जिंदगी में । इसीके साथ वो फिर एक बार टूट गया । पहले से भी ज्यादा । दर्द अब ओर भी बढ़ गया और बढ़ता रहा...एक ऐसी चोट जो कभी नही भर पाएगी । ये जख्म हमेशा दर्द देगा ।

अगर उसे जाना ही था तो फिर वो क्यो उसके इतना करीब आयी । वो मना भी तो कर सकती थी । या फिर सिर्फ अच्छे दोस्त बने रहने के लिए भी तो कह सकती थी । लेकिन उसने ये नही किया ।

वो आज भी उसे याद करता है । वो आज भी उसे प्यार करता है । हाँ अब उसे उसकी याद पहले जितनी नही आती । लेकिन जब भी आती है तो बेचैन कर देती है । वो छत की सीढ़ियों पर बैठकर उसे बातें करता था लेकिन उसके जाने के बाद वो कभी उस सीढ़ियों पर नही बैठा । वो उस पलंग पे कभी नही सोया जहाँ लेटकर उसने उसके साथ घँटों बातें की थी । हर चीज में उसकी याद आती है । वो उसे भुलाने की कोशिश में बड़ी मशक्कत कर रहा है लेकिन अब तक उसे सफलता नही मिली और कभी मिलेगी भी या नही उसे नही पता ।

वो अब उसे कभी मिलना नही चाहता । न ही उससे बात करना चाहता है ,उसे उसका चेहरा भी नही देखना । वो उसे परेशान नही करना चाहता । वो तो बस इतना चाहता है कि वो जहाँ भी रहे जिसके भी साथ रहे बस खुश रहे । हमेशा मुस्कुराती हुई । वही मुस्कान हमेशा उसके चेहरे पे बनी रहे जिसका वो कायल था । बहोत जल्द एक साल हो जाएगा उसे बिछड़े हुए । एक साल उसके बिना ही कट गया । लेकिन उसे उससे कोई शिकायत नही है । वो उसका शुक्रगुजार है उसीने उसे लड़ना सिखाया , कमजोरी को छोड़ के खड़े होना और अपने दर्द का इस्तेमाल करना । उसे एक बेहतर इंसान बनाया ।

आज उसकी कोई ख्वाहिशें नही है । आज उसकी आँखों मे जाख ने पर वो बिल्कुल वीरान लगती है । अब उसमें कोई ख़ाब नजर नही आते । कोई उम्मीदे नही है । अब किसीको कुछ बनकर नही दिखाना , किसीको कुछ साबित नही करना । बस चंद साल गुजारके चले जाना है । एक तन्हा जिंदगी चाहिए उसे जिसमे कोई भी उसे परेशान न करे । कोई उसपे हक न जताए कोई जूठे ख़ाब न दिखाई । अब वो थक तो गया है लेकिन हारा नही है ।

मुझे नही पता उसने ये सब क्यो लिखा और क्यो पढ़ने के लिए पोस्ट किया। ऐसा भी नही है उसे लोगो से सहानुभूति चाहिए । नही उसे इसकी कतई जरूरत नही है । लेकिन उसने ये बस इसीलिए लिखा ताकि उसे लगता है कि दुनिया मे उसके जैसे भी बहोत से लोग होंगे । बस उनके लिए और अगर आप यहाँ तक पहोचे है इसका मतलब आप भी उसके जैसे या उसके आसपास ही है । सब के होने के बावजूद भी बिल्कुल अकेले ।

कल उसकी तबियत भी खराब होनेवाली है । हाँ क्योकि आज सुबह से उसने अपने शरीर को आराम नही दिया । वो एक किताब पढ़ रहा था और उसे वो किताब आज भी पूरी करनी थी और उसने की भी। लेकिन उसका नतीजा ये हुआ कि उसकी गर्दन बहोत दर्द कर रही है , सिर फटे जा रहा है और हल्का सा बुखार भी । अब सिरदर्द की वजह से न तो उसे रात में नींद आएगी और न ही चैन मिलेगा । रात में तेज बुखार भी सिरदर्द के वफादार दोस्त की तरह उसके शरीर मे अपनी जगह ले लेगा और हाँ कल की सुबह उसके लिए अच्छी नही होगी । लेकिन फिर भी उसने किसीसे नही कहा । वो कभी नही कहता । चाहे तबियत कितनी भी खराब क्यो न हो । वो अब लोगो को परेशान करना नही चाहता । वो नही चाहता कि लोग उसकी फिक्र करे क्योकि फिक्र करने वाला जा चुका है ।

वो इसी तरह बार बार टूट जाता है लेकिन उसके लिए ये कोई नई बात नही है । वो कल फिर उठेगा । खुद को समेटेगा , जोड़ेगा और फिर खड़ा होगा । फिर लड़ेगा , फिर गिरेगा , फिर टूटेगा और फिर खुद को जोड़ लेगा । वो शायद ये तब तक करेगा जब तक बूढा न हो जाये या फिर उसकी साँसे न रुक जाए । वो लड़ता रहेगा...और उसे याद करता रहेगा हमेशा के लिए...कभी न भूलने के लिए...


Yhnaam


दोहजार बिस के अगस्त की तारीख बिस...


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Nakrani Nirav

Nakrani Nirav 2 साल पहले

Gautam

Gautam 2 साल पहले

Urmi Chauhan

Urmi Chauhan मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले