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मेरा यार शिंदे बाबू...
द्वारा Deepak Pradhan

ओय शिंदे बाबू...आज तेरे जन्मदिन पर मन कर रहा है कि मैं तुझपर ढेर सारी बातें लिखूँ तुझे लिखू,तेरी बाते लिखूँ,तेरी यादे लिखूँ या फिर तेरी वो सरारते लिखूँ ...

खुला पत्र (शराबी पति के नाम)
द्वारा Alok Mishra

हे प्राणनाथ,        यहाँ सब लोग कुशल मंगल है। इस पत्र को लिखते हुए मुझे अपने वे दिन याद आ रहे है, जब हम पहली बार राशन की दुकान ...

एक पत्र भगवान के नाम
द्वारा Megha Rathi

भगवान जी  नमस्कार, आशा है कि आप कुशलतापूर्वक होंगे, हाँ.. होंगे ही… क्योंकि आप तो भगवान हैं जो सबकी इच्छाएं पूरी करते हैं, सभी आपसे सुख की कामना करते ...

Unemployment And The Red (Hersh of Society)
द्वारा शिवाय

Unemployment in India & The Redआपके शब्द और आपका समय हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है ??देश के विकास में आपकी लिखित रचना काम आ सकती हैहम एक शीर्षक पर ...

एक पाती माता पिता के नाम
द्वारा Annada patni

एक पाती माता पिता के नाम अन्नदा पाटनी पूज्य बाबूजी व अम्माँ, सादर प्रणाम । यह जानते हुए भी कि आप हमारे बीच में नहीं है, न हीं आप ...

इलाहाबादी चिट्ठी बाबू जी के नाम
द्वारा Abhinav Singh

प्रिय बाबू जी, आपका पत्र हमको मिला। हम यहाँ कुशल से हैं और आशा करते है की वहाँ भी सब कुशल ही होगा। बाबू जी आपको सूचित करते हुये ...

बेनामी ख़त - 3
द्वारा Dhruvin Mavani

( ये किसी एक के लिए नही है वल्कि हर उस इंसान के लिए है जिसने कभी जिंदगी में सच्ची मोहब्बत की है लेकिन अब वो उनके साथ नही ...

बेनामी ख़त - 2
द्वारा Dhruvin Mavani

Dear किताब ,एक खत तुम्हारे भी नाम का । इसलिए क्योकि वो लड़का तुम्हे आज तक लिख नही पाया । ऐसा नही की उसने कोशिश नही की , उसने  ...

बेनामी ख़त - 1
द्वारा Dhruvin Mavani

Dear ख़त ,सोचा पहला ख़त तुम्हे ही लिखना चाहिए । क्योंकि आज कल के digital जमाने में भला तुम्हे याद कौन करेगा ? तुम्हे तो सिर्फ कुछ सरफिरे लोग ...

एक अप्रेषित-पत्र - 14 - अंतिम भाग
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म एक अप्रेषित पत्र दीदी का पत्र आशा के विपरीत आया था। पत्र बहुत संक्षेप में था, उनकी आदत के बिल्कुल उलटे। पत्र में लिखीं चार ...

एक अप्रेषित-पत्र - 13
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म एक रुपया ‘‘राम नाम सत्य है।'' ‘‘राम नाम सत्य है।'' सेठ राम किशोरजी की शवयात्रा में सम्मिलित दूसरोें के साथ मैंने भी दुहराया। स्वर्गीय सेठ ...

एक अप्रेषित-पत्र - 12
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म मुन्शीजी मुन्शी गनेशी प्रसाद को विवाह किये बीस बरस बीत चुके हैं अौर इस कस्बाई शहर में आए सत्रह बरस। तब यहाँ नयी—नयी तहसील खुली ...

एक अप्रेषित-पत्र - 11
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म मग़रिब की नमाज ‘‘सुषमा! प्लीज.... देर हो रही है।'' “बस्स... दो मिनट.... अौर जज साहब।” “क्या सुषमा....? पिछले बीस मिनट से अभी तक तुम्हारे दो ...

एक अप्रेषित-पत्र - 10
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म मसीहा चाय का घूँट भरते हुए असगर ने विक्रम में चढ़ रही सवारियों की ओर ताका, फिर दूसरा घूँट भरने से पहले उसने टैम्पो ड्राइवर ...

एक अप्रेषित-पत्र - 9
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म साथ सकलेचा के दो फोन आ चुके थे। रूबी बेड पर पड़ी ऊहापोह की स्थिति में थी। तेजी से पतनोन्मुख सुदर्शन बोकाड़िया ग्रुप ऑफ कम्पनीज़ ...

एक अप्रेषित-पत्र - 8
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म सतसीरी शहर में कर्फ्यू को लगे आज तीसरी रात है। अस्सी बरस की बूढ़ी दीना ताई की आँखों से नींद कोसों दूर है। जाग घर, ...

एक अप्रेषित-पत्र - 7
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म वितृष्णा अनार का जूस लेकर जब मैं वापस वार्ड में पहुँची, तो देखा बाबूजी अपनी आँखे बन्द किये झपक चुके थे। उनकी नींद में व्यवधान ...

एक अप्रेषित-पत्र - 6
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म कर्कशा ‘‘जवानी में दो—दो भोग चुकने के बाद अब बुढ़ापे में तीसरी करने की मंशा है क्या?‘‘ कृशकाय—कंकाल स्वरूपा पत्नी की कर्कश आवाज सुनकर प्रोफेसर ...

एक अप्रेषित-पत्र - 5
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म कोई नया नाम दो ‘‘जागते रहो'' मध्य रात्रि की निस्तब्धता को भंग करती सेन्ट्रल जेल के संतरी की आवाज और फिर पहले जैसी खामोशी। मैं ...

एक अप्रेषित-पत्र - 4
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म अब नाथ कर करुणा.... कुछ दिनों से क्या; बल्कि काफी दिनों से उसे सीने के ठीक मध्य से थोड़ा—सा दाहिनी ओर पसलियों के आस—पास, मीठा—मीठा—सा ...

शिवत्व को सदैव झहर ही पीना पड़ता है
द्वारा મનોજ જોશી

मोरारीबापु को भी झहर प्रभु प्रसाद समझकर सृष्टि के हित के लिए झहर पी लिया जय सियाराम, बापू?आपके प्राकट्य के पांच कारण बताए थे आपने! में इसका जो अर्थ समझा हूं, ...

Boycott Chaina
द्वारा Rajesh Kumar

#Boycott_chainaक्या भारतीय लोगों द्वारा वो प्रभावी कदम सिद्ध होने वाला है जिससे चीन को खरबों का नुकसान उठाना पड़ेगा या फिर केवल सोशल मीडिया पर केवल भड़ास निकलने का ...

एक अप्रेषित-पत्र - 3
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म रंजना रंजना मेरे ऑफिस की नेत्री है। चपरासी से लेकर बॉस तक सभी से वह एक ही अन्दाज में मिलती। सभी के साथ उसका व्यवहार ...

एक अप्रेषित-पत्र - 2
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म विरह गति प्रिय रेवा, मेरे जीवन का पल—पल तुम्हें न्योछावर! तुम्हें रूठकर यहाँ से गये, आज पूरा एक माह होने जा रहा है। कल शाम ...

एक अप्रेषित-पत्र - 1
द्वारा Mahendra Bhishma

एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म बचाओ मैं एक नन्हा—सा वृक्ष हूँ। इस सुन्दर संसार में आए मुझे कुछेक वर्ष ही हुए हैं। नीले आकाश के नीचे, पर्वतमालाओं की तलहटी में ...

मेरी प्यारी माँ
द्वारा Renuka Chitkara

मेरी प्यारी माँ , कैसी हो तुम ? ये भी कोई सवाल हुआ,ठीक ही होंगी अब तो l याद है ना , बचपन में  जब मै बीमार होता था ...

यादे
द्वारा अभी सिंह राजपूत

यादें एक ऐसा शब्द नहीं नहीं शब्द तो है लेकिन ये एक स्थिति है मन की, जो शायद हर किसी के जीवन में होती है, जिन्दगी में कुछ ऐसा ...

तुम्हारी पृथ्वी - एक पत्र
द्वारा Sushma Tiwari

                                         ब्रह्माण्ड                  ...

ख़त - डिअर माँ.....
द्वारा Haider Ali Khan

ख़त: डिअर माँ, ना जाने कितने आँसुओं को अपने दामन में समेटकर माँ घर में चुपचाप रहा करती है, सबको अपनेपन का प्यार देकर वह ख़ुद को कितना अकेला ...

पिनकोड
द्वारा महेश रौतेला

पिनकोड:मैं किसी काम से हल्द्वानी बाजार गया था। बस स्टेशन से गुजर रहा था, नैनीताल की बस पर नजर पड़ी, सोचा नैनीताल घूम कर आऊँ। बिना उद्देश्य कहीं जाना ...

सागर का तूफान
द्वारा Nirpendra Kumar Sharma

आज एक लेख प्रस्तुत कर रहा हूँ कृपया समीक्षा अवश्य लिखें।"सागर का तूफान", !! आप सोच रहे होंगे ये क्या नाम हुआ । सागर और तूफान दो विपरीत गुण दो ...

प्यार….. इस शहर में
द्वारा Neelam Kulshreshtha

प्रिय यशी हाय ! कैसी हो ? हम लोग मेल से, मोबाइल से व वॉट्स एप से कितनी बातें करते रहते थे और हमारे बीच लंबा मौन बिछ गया. मैं जानती ...