बेनामी ख़त - 2 Dhruvin Mavani द्वारा पत्र में हिंदी पीडीएफ

बेनामी ख़त - 2

Dear किताब ,


एक खत तुम्हारे भी नाम का । इसलिए क्योकि वो लड़का तुम्हे आज तक लिख नही पाया । ऐसा नही की उसने कोशिश नही की , उसने कोशिश तो की लेकिन शुरू की हुई कहानी को उसके अंजाम तक नही पहोचाया उसे बस अधूरा रहने दिया । इसलिए ये खत के जरिये वो तुमसे माफी मांगना चाहता है और तुमसे उम्मीद रखता है कि तुम उसे माफ भी कर दोगी ।

मुझे आज भी याद है उस 14 -15 साल के एक बच्चे ने स्कूल में एक लेखक बनने का ख़ाब देखा था । क्यो - किसलिए मुझे नही पता । मुझे नही पता उसके दिमाग में ये खयाल कैसे आया , कहाँ से आया और क्यो आया । ऐसा भी नही की उसके खानदान में कोई ऐसा हो जो लिखता हो या फिर साहित्य से ताल्लुक रखता हो । न कोई दोस्त और न ही कोई रिश्तेदार ।

तो फिर कैसे ! उसे नही पता लेकिन उसने बस ख़ाब देख लिया । जब हर कोई डॉक्टर , इंजीनियर , सीए , वकील बनने के ख़ाब देखते है तो फिर उसने लिखने का या प्रोफेशन क्यो चुना ! शायद वो दुनिया को एक अलग नजरो से देख रहा था । शायद उसमे लिखने का हुनर होगा ।

वो जो कुछ भी हो लेकिन जिसने लेखक बनने का ख़ाब देखा था , जिसे कहानियां और किताबे लिखनी थी वो बच्चा आज थोड़ा बड़ा होकर कविताएं , गज़ले और शायरियां लिखने लगा है । वो कहानियां लिखने का सपना शायद पीछे छूट गया । वो तुम्हे लिखना चाहता था हमेशा से लेकिन अब शायद वो भूल गया है । कल्पनाओं ने उसे मोह लिया और कम शब्दों में ज्यादा गहरी बात कहने का हुनर उसे सीखा दिया ।

तुम्हे उसकी पहली कविताओं को पढ़ना चाहिए जहाँ से उसने शुरू किया था । लंबी लंबी कविताएं , वीर रस की शुद्ध हिंदी की कविताएं । उसकी पहली कविताओं में कागज पर कलम और विचारों का संघर्ष नजर आता है । उसके लिखने की चाहत और सीखने जज्बा नजर आता है । वही लड़क वो लंबी कविताओं में जो कहता था आज उसे वो सिर्फ दो लाइनों के शेर में भी कह सकता है ।

उसका संघर्ष आज भी जारी है । लिख तो रहा है लेकिन अब तक एक भी कहानी पूरी न करने का उसे अफसोस है और तुम्हारी कमी खलती है । एक किताब जो हमेशा एक सपना रही है । और उसे यकीन है एक दिन वो इसे भी पूरा जरूर करेगा । शायद अब वो समझ गया है कि शुरुआत छोटी चीजो से ही हो सकती है इसलिए उसने ये खत लिखना शुरू कर दिया । वो हमेशा सीखना चाहता है कुछ नया हर दिन ।

खैर तुमसे तो बाते होती रहेगी लेकिन उस लड़के का इन्तेजार करना । एक न एक दिन वो जरूर आएगा । तुम्हे अपने साथ ले जाने । बस दो पल की जिंदगी है और एक पल बीत गया है बस यूं ही समजो ...


Yhnaam


दोहजार बिस के अगस्त की तारीख सत्रह...

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Nakrani Nirav

Nakrani Nirav 2 साल पहले

Urmi Chauhan

Urmi Chauhan मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले

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