जयगाथा Mukesh nagar द्वारा पौराणिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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जयगाथा

जयगाथा

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भारत के महान ग्रन्थ महाभारत की कहानियों पर आधारित है मेरी यह धारावाहिक कहानी 'जयगाथा'।
इसके बारे में आप सबको कुछ बताता हूँ।
मूल महाभारत एक महाकाव्य है....एक कथा जिसमें सार है-
हम सबके जीवन का...
निश्चित रूप से महाभारत की कथाएँ हम सब ने कभी न कभी अवश्य सुनी हैं...और कुछ सूक्ष्म कहानियाँ अनसुनी भी रह गईं हैं। तत्समय कुरुकुल का पारिवारिक संघर्ष और महायोगी श्रीकृष्ण की कथाएँ निश्चित ही पठनीय हैं।
मेरा यह प्रयास है उस सनातन संस्कृति और धर्म की घटनाओं तक पहुँचने का...सफलता उस परमपिता के हाथ है।
भारतीय सनातन संस्कृति का महान ग्रन्थ जय, विजय, भारत और महाभारत इन सब नामों से प्रचलित है।
इसमें अमूल्य रत्नों के अपार भंडार छुपे हैं।
इस महान महाकाव्य की तुलना विश्व की किसी भी रचना से करना सूर्य के प्रकाश में दीप जलाने के तुल्य है।
भगवान वेदव्यास ने इसमें वेदों के रहस्य, उपनिषदों के सार, पुराण, इतिहास, व्याकरण, संस्कृति, दर्शन, भूगोल, नक्षत्रज्ञान, तीर्थों की महिमा, धर्म, भक्ति, प्रेम, अध्यात्म, कर्मयोग और ज्ञान-विज्ञान-व्यवहार इन सब के गूढ़ अर्थ भर दिए हैं।
एक लाख से अधिक श्लोकों वाला ऐसा महाकाव्य न कभी पहले लिखा गया और न भविष्य में लिखा जा सकता है।
'न भूतो न भविष्यसि'।
ऐसा कहा जाता है कि जो कुछ भी इस अनंत और नश्वर विश्व मे कभी घटा या कभी घट सकता है, तो वह सब इस महाकाव्य में है।
कई स्थानों पर ऐसी भ्रांति है कि महाभारत को घर में रखना या पढ़ना अशुभकारी होता है पर यह सही नहीं है।
इस ग्रंथ में ही विस्तार से इसे पढ़ने के लाभ दिए गए है।
कुछ विद्वतजनों ने अपनी विद्या पर पकड़ बनाए रखने के लिए सम्भवतः ऐसा कहा होगा जिससे कि अपात्र के पास यह ज्ञान पहुँच न सके।
दो पीढ़ियों पहले तक इसकी कहानियाँ घर-घर में सुनाई जाती थीं, लोग इस महान ग्रंथ काव्य के बारे में बातें करते थे पर आज कुछ लोग ही इनके पात्रों के नाम भर जानते हैं।
सनातन परंपराओं के लगातार क्षरण के साथ ही अगली पीढ़ी सम्भवतः इससे पूर्णतया अनभिज्ञ ही रहेगी।
आज किसी के पास समय नहीं है। पूरे मूल महाभारत ग्रन्थ के अथाह सागर को पढ़ना सबके लिए सम्भव नहीं है, मैंने इसे लिखने की कोशिश की है और इस प्लेटफॉर्म पर छोटी दो तीन मिनट की कड़ियों में इसे प्रकाशित करने का प्रयास करूँगा।
कोरोना की अभूतपूर्व भयंकर महामारी के कारण जो लॉकडाउन हुआ है, उस समय का सदुपयोग करना ही चाहिए।

मैंने बहुत समय से इस महाग्रंथ के कथानक पर लिखना आरम्भ किया था। महाभारत ने मुझे जीवन में सर्वाधिक प्रभावित किया। इसे पढ़कर पाठकों को अवश्य ऐसा लगेगा कि वह इन कथाओं के मध्य एक पात्र के रूप में ही निवास कर रहा है।

इस पूरे ग्रँथ के छह-सात सहस्त्र पृष्ठों का अध्ययन करना और इसे समझ पाना इतना भी सरल नहीं है और इससे भी बड़ी बात यह कि बिना भगवतकृपा के कदापि सम्भव नहीं है।
अतः इसे सरल भाषा में जन जन तक पहुँचाने का एक गिलहरी प्रयास ही समझना उचित होगा।
मौलिकता तो मात्र भगवान व्यासजी का अधिकार रहा है पर उनके असीम विस्तृत महाकाव्य से कुछ घटनाओं को अपनी आज की भाषा मे संकलन का या प्रयास वैसा ही है जैसे समुद्र से कोई अपने कार्य के लायक कुछ लोटे जल भर ले।
आगे हरि इच्छा..।