वो कौन?? भाग - 2 Uma Vaishnav द्वारा जासूसी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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वो कौन?? भाग - 2








प्रशांत दूधवाले से .... रोज यूं ही बिना नॉक किये ही घर में घुस जाते हो?

दूधवाला... अरे... नहीं.. नहीं .. साहब..वो.. तो. कभी-कभी दरवाजा खुला हो तो मैं चुपचाप दूध रखकर चला जाता हूँ, फिर मेमसाब ने भी कहा है, यदि दरवाजा खुला हो तो दूध रख दिया करो।आप चाहे तो पूछ लीजिए मैडम से.... आप ही बताइए ना मैडम... मै तो आप के कहने पर ही... सीधा अंदर आता हूँ।

प्रशांत कुछ सोचते हुए दूधवाले से कहता है, हाँ.. हाँ ओके... ठीक है, तुम जा सकते हो।.

तभी शालिनी का मोबाइल बजता है, शालिनी थोड़ी घबरा जाती हैं। कॉल अननाॅन नंबर से आ रहा होता है। शालिनी समझ जाती है कि ये उसी का कॉल हैं। शालिनी कहती हैं..

शालिनी(डरते हुए) कहती हैं ...... ये.. ये.. उसी का कॉल हैं।

प्रशांत कॉल उठाने को कहता है,और साथ ही थोड़ी देर बात करने को कहता है।

शालिनी डरते डरते फोन उठाती हैं जैसे ही वह हेलो कहती है।

.... दूसरी तरफ से आवाज आती है, यह उसी अजनबी का फोन होता है, वो कहता है..
....... मुझे सब पता है जासूस को बुलाया है तू क्या समझती है, कि मुझे पता नहीं लगेगा.. मैं तेरी सब खबर रखता हूं। तुझे तो मैं देख लूंगा फोन रख देता है।

शालिनी... हेलो... हेलो..हैलो... कौन.. कौन.. करते रह जाती है। लेकिन फोन कट हो जाता है।

फोन जल्दी कट हो जाने की वजह से प्रशांत और उसकी टीम लोकेशन ट्रैक नहीं कर पाती है। प्रशांत को इस बात का बहुत अफसोस होता है। प्रशांत सर पकड़ कर बैठ जाता है

तभी दरवाजे पर दस्तक होती है। बाहर से आवाज आती है।
.... मैडम.. मैं बंटी.. आपके कपड़े धूल कर आ गए हैं, और कोई कपड़े हो तो दे दीजिए।

प्रशांत आवाज सुनकर शालिनी से कहता है जो कोई भी हो उसे अंदर बुलाए।
शालिनी... पर.. सर... वह वो तो मेरा धोबी है।

प्रशांत... हांँ जानता हूं... पर मुझे उससे भी कुछ पूछताछ करनी है।

यस सर.... इतना करते हुए शालिनी बंटी को अंदर आने के लिए कहते हैं।

शालिनी..... हाँ.. ठीक है बंटी, तुम अंदर आ जाओ।

बंटी अंदर आता है। पर हाथ जोड़ते हुए सब को नमस्ते करता है, और पूछता है।

बंटी.... क्या बात है, मैडम.... कोई परेशानी है.? ... कोई दिक्कत.? .. यह सब लोग कौन हैं?... सब ठीक तो है ना..?

एक साथ कई सवाल पूछ लेता है। प्रशांत उसकी तरफ आगे बढ़ते हुए कहता है।

प्रशांत... हां... हां... सब ठीक है पर तुम इतने घबराए हुए क्यों लग रहे हो।

बंटी... कहाँ.. साहब... मैं कहांँ.. घबराया हुआ हूँ.... वह तो मैंने.... इतने लोगों को एक साथ मैडम के घर देखा तो पूछ बैठा.... क्योंकि मैं हमेशा मैडम को घर में अकेले ही देखता हूँ। आज अचानक इतने जनों को देखा इसलिए पूछ बैठा... मैडम यह कोई आपके रिश्तेदार है? गाँव से आए हैं?

शालिनी... नहीं यह तो..

तभी प्रशांत उसे बीच में ही ठोकते हुए कहता है हांँ.... हम इनके रिश्तेदार हैं, और कुछ दिन यही रहने वाले हैं।
शालिनी चुप हो जाती है।

कहानी जारी रहेगी...