पिता की छाया Hareesh Kumar Sharma द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
  • एक राजा ऐसा भी

    ---### *एक राजा ऐसा भी*  #### _मनकापुर रियासत का संक्षिप्त इ...

  • तुम और मैं - 7

    21 जनवरी की वो सुबह कुछ अलग थी। कान्हा बाइक लेकर आए थे और उन...

  • Bayaan - Part 18

    Part 18  डायरी का आखिरी पन्ना...मेरे हाथ अब काँपने लगे थे। प...

  • मंदिर में तुम - 7

    रात का समय था…कोरिया में लाइट्स चमक रही थीं…और सुनामी अपने क...

  • Sirf Tumhara - 6

    **Sirf Tumhara**  **Part 6**रुद्र की मुट्ठियाँ इतनी जोर से भ...

श्रेणी
शेयर करे

पिता की छाया


मां ने अगर बच्चे को खाना खाना सिखाया है तो वहीं पर पिता बच्चे को खाना कमाना कर सिखाया है।

मां अगर डांट से बचाकर हमें अपने आंचल में छुपा ती है तो वहीं पर पिता हमें डांट कर समाज में खुलकर जीना सिखाता है

मां अगर बुराइयों की बरसात से अपने बच्चे को बचाकर किसी झोंपड़ी में सर छुपाती है तो वहीं पर पिता उस चौकड़ी की छत बनकर बच्चे की बुराई की बरसात से रक्षा करता है

मगर उंगली पकड़कर बच्चे को चलना सिखाती है तो वहीं पर पिता बच्चे को अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाता है।

मां अगर बच्चे को रोटी खिलाने के लिए अपनी रोटी त्याग देती है तो वहीं पर पिता रोटी को कमाने के लिए अपनी रोटी त्याग देता है।

मां अगर बच्चे को गलती करने पर उसके पिता की डांट की वजह से अपने आंचल में छुपा की है तो वहीं पर पिता बच्चे को डांट कर उसे समाज में फैली बुराइयों से बचाता है।

एक छोटी सी कहानी-
एक बार दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति एक होटल में खाना खाने के लिए गया तो उसने वहां पर खाना खाया और खाना खाने के बाद वहां खाना खिलाने वाले को ₹500 की टिप देकर वहां से खड़ा हो गया लेकिन वह वेटर उसके मुंह की तरफ घूर कर देखता रहा उसे ऐसा देखकर अमीर आदमी उससे पूछने लगा कि तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो तो उस वेटर का जवाब था कि साहब आप आज खाना खाने के लिए आए हैं आप दुनिया के सबसे अमीर आदमी आपने ₹500 की तिप दी मुझे और कल आपकी बेटी यहां पर आई थी उसने मुझे ₹10000 की टिप दी ऐसा क्यों तो इस पर उस अमीर आदमी का बहुत ही सुंदर सा जवाब था कि मैं दुनिया का सबसे अमीर आदमी हूं और वह मेरी बेटी दुनिया के सबसे अमीर आदमी की बेटी है इसलिए उसने आपको ₹10000 की टिप दी लेकिन मैं तो एक गरीब किसान का ही बेटा हूं ना तो मैं अपने पिता की हालत को जानता हूं कि मेरे पिता ने मुझे किस हद से गुजर के इस मुकाम तक पहुंचाया है कि मेरी बेटी आज किसी के मुंह देखने लायक ना रहे वह जो चाहे वह कर सकती है सिर्फ किसकी वजह से अपने पिता की बदौलत और मैं भी आज जो भी कर सकता हूं जो भी हूं वह मैं अपनी पिता की वजह से।


एक दिन एक आदमी अपने पुत्र के कंधे पर हाथ रखकर यह पूछने लगा कि पुत्र यह बताओ कि इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति कौन है तो पुत्र का जवाब था कि पिताजी मैं । फिर उस व्यक्ति ने उसके कंधे से हाथ उठाकर कुछ दूर जाकर पूछा कि बेटे अब बताओ इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति कौन है तो पुत्र का जवाब था कि पिताजी शक्तिशाली का तो पता नहीं लेकिन सबसे कमजोर व्यक्ति इस समय मैं हूं पिता ने पूछा ऐसा क्यों ? तो पुत्र का जवाब था कि पिताजी जब तक आपका हाथ मेरे कंधे पर है तब तक मुझे कोई नहीं हरा सकता लेकिन जब मैं आपसे अलग हो जाता हूं । मुझसे ज्यादा कमजोर कौन हो सकता है।