कमसिन - 32

कमसिन

सीमा असीम सक्सेना

(32)

पिंकी ने आज घर में बताया था कि वह कालेज की तरफ से टूर पर जायेगी ! आगरा, दिल्ली और मथुरा ले जाया जा रहा है ! ताजमहल, लाल किला और बांके बिहारी का मंदिर दिखाया जायेगा। बस जायेगी, कालेज के बच्चे, टीचर और एक पियून व एक आया जी जायेगी। उसे जाने की इजाजत मिल गई थी। घर में किसी ने भी मना नहीं किया था।

राशि का दिल घबराने लगा कि ये नादान भोली पिंकी अकेली दुनियाँ देखने जा रही है कहीं कोई उसे धोखा तो नहीं दे देगा। वह भी छली या ठगी तो नहीं जायेगी। कहीं उसकी जिंदगी मजाक न बन जाये।

आप क्या सोंच रही हंै?

कुछ नहीं, सच में कुछ नहीं !

और कौन जा रहा है साथ में?

अरे आप परेशान क्यों हो रही हैं, बिट्टू भी जायेगा। वहाँ कोई तकलीफ नहीं होगी बिट्टू ने कहा है कि वो मेरा अच्छे से ध्यान रखेगा।

यही तो वह सोच रही थी और यही सोच कर वह घबरा रही थी।

अच्छा, ठीक है। वह चाह कर भी कुछ कह नहीं पाई, न ही कुछ समझ सकी थी।

आपको पता है कि आज बिट्टू मुझे एक होटल में लंच के लिए लेकर जाने वाला है आप भी चलो न, उसने भी कहा था कि आपको जरूर लेकर आये!

लेकिन मेरा कहीं जाने का बिल्कुल मन नहीं है।

आप चलिये तो सही, देखिएगा मन अच्छा हो जायेगा।

आपकी तबियत भी ठीक होगी।

जल्दी तैयार हो जाओ।

पिंकी की जिद के आगे उसकी कोई बात नहीं चलती।

चलो ठीक है भई।

न चाहते हुए भी उसे जाना पड़ा था। उसने बैंगनी कलर का कुर्ता और रानी कलर की पायजामी पर रानी कलर का दुपट्टा डाला था। आज कितने ही दिनों के बाद उसने खुद को शीशे में निहारा ! कितना निखरा निखरा रंग लग रहा था। चेहरा इतनी उदासी गम और दर्द झेलने के बाद भी प्यार की चमक से चमक रहा था। उसके सच्चे दिल की चमक चेहरे के नूर को बढ़ा रही थी। राशि को आज खुद पर ही प्यार आ गया ! चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट उसके रंग को और निखार गई।

अरे वाह! आज तो आप गजब लग रहे हो जी, अब तो मुझे संभल कर रहना होगा कहीं बिट्टू का दिल तुम पर न आ जाये। अगर ऐसा हुआ तो मैं क्या करूंगी।

दोनों खिलखिला कर हंसी थी ! ये हंसी कितने महीनों बाद उस घर में गूंजी थी। कहीं ये खुशियाँ लौटने की आहट तो नहीं।

वैसे कोई बात नहीं, आप के लिए तो मैं अपना बिट्टू भी उपहार में दे दूँगी। फिर मैं तो कोई दूसरा भी खोज सकती हूँ न ।

अरे पिंकी ऐसा न कहो ! तुम्हारा बिट्टू बहुत प्यारा है वो सिर्फ तुम्हें ही प्यार करता है और किसी से नहीं कर सकता। उस पर और खुद पर भी विश्वास रखो। ध्यान रखना प्यार कोई खेल नहीं है जो किसी के साथ भी खेल लिया जाए !

ओह! दी आप भी। माहौल का गंभीर बना देते हो।

पिंकी हरे रंग के सूट पर स्लेटी रंग जैकेट में बहुत सुंदर लग रही थी। उसके लंबे बाल एक रबर बैंड के सहारे बंधे हुए थे। उसने अपने बालों को आगे की तरफ कर रखा था !

चलो अब देर हो जायेगी।

बिट्टू कहाँ मिलेगा।

वो तो कब से सड़क पर अपनी गाड़ी लेकर खड़ा है।

पिंकी तुम भी न। बेचारे को परेशान करती रहती हो।

मैं कहाँ परेशान करती हूँ, वो तो खुद ही परेशान होता रहता है।

उसे लगा था कि प्यार में शुरूआती दिन ऐसे ही होते हैं जब सिर्फ अपनी खुशी से ज्यादा उसकी खुशी अच्छी लगती है। जिसे वो चाहता है ! ओह ! ये प्यार भी अज़ीब शय है। वे दोनों बाहर सड़क तक आ गई थी। पिंटू खड़ा था गुलाबी टी-शर्ट पर हल्की नीले रंग की जींस उस पर बहुत जंच रही थी, उसका सफेद रंग गुलाबी होकर चमक रहा था। हल्की सी बढ़ी हुई दाड़ी उसके चेहरे पर फब रही थी। पिंकी को देखते ही उसने एक स्माइल दी और राशि से सर झुकाकर अभिवादन किया। राशि ने भी अपना सिर हिलाया। बिट्टू आगे ड्राइव कर रहा था और राशि व पिंकी पीछे की सीट पर बैठ गये थे ! राशि ने पिंकी को कहा भी था कि तुम आगे बैठ जाओ परन्तु बिट्टू ने मना करते हुए कहा कि नहीं फिर आप अकेले बैठेंगी तो अच्छा नहीं लगेगा। वैसे भी पिंकी बताती है कि आप बहुत परेशान रहती हो। आप परेशान न हुआ करें क्योंकि परेशान या चिंतित होना किसी भी समस्या का हल नहीं है। वक्त आने पर सब ठीक हो जायेगा।

बिट्टू भाई, मैं परेशान कहां होती हूं ! आप को पिंकी बेकार की बाते बताती रहती है और विश्वास कर लेते हो।

नहीं। राशि जी मैं पिंकी की बातों पर नहीं बल्कि आपको देखकर ही समझ गया था ! जब इस बारे में पिंकी को बताया और उससे पूछा तो उसने बताया था। खैर छोड़ो इतने अच्छे माहौल को व्यर्थ जाया करना ठीक नहीं है, हैं न।

हल्की हल्की बारिश की फुहारें गिरने लगी थी मौसम तो हमेशा ही सुहावना रहता है परन्तु, जब मन अच्छा तो हो और भी ज्यादा मन मोहक लगता है।

बिट्टू की बात उसके मन की उलझन बढ़ा रही थी कि क्या वह जी पायेगी या उसे जीवित रहना चाहिए। उसे परिवार को बदनामी के गर्त में डुबो देना चाहिए जो इसका रक्षक बना। उस परिवार की बेटियाँ की बदनामी होगी तो ! उसे पता नहीं वो क्या करे ! कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था !

पिंकी एक दिन बिट्टू को घर ले आओ और सबसे मिलवा दो। वे लोग बिल्कुल मना नहीं करेंगे। बिट्टू का स्वभाव बहुत ही अच्छा है।

दीदी, ठीक है। पिंकी ने छोटा सा जवाब दिया। पिंकी एक बात बताओ क्या यहां पर लोग प्रेम विवाह ही अधिक करते है।

हाँ अधिकतर।

सबके घर वाले मान जाते है।

हाँ मान जाते है कुछ के नहीं भी मानते हैं !

फिर क्या वे लोग घरवालों की बात मानकर अलग हो जाते है।

नहीं ऐसा नहीं करते सच्चा प्यार करने वाले घर से भाग कर मंदिर में शादी कर लेते है। फिर धीरे-धीरे समय बीतने पर सब एक हो जाते है।

घर वाले मना क्यों करते है जब लड़के ने लड़की पंसद कर ली और प्रेम करते है तो?

दरअसल जब जाति मिल नहीं पाती या पैसे की कमी हो।

अच्छा जाति और पैसा यहाँ पर भी चलता है। शादी में दान दहेज।

राशि जी ये शहर और राज्य भी भारत में ही आता है। ये भारत से अलग नहीं है और फिर भारत का कौन सा प्रदेश जाति-पाति व दान दहेज से बचा है। हर जगह ऐसा ही है। राशि मुस्कुरा रही थी।

देखिए राशि जी आप कितनी प्यारी लगती है मुस्कुराते हुए। आप हमेशा यूं ही मुस्कुराते रहे। आप हमेशा खुश रहे, हंसते खिलखिलाते रहे।

एक बात बताऊँ जो दूसरो को दुआ देता है न; उसकी दुआ दुगुनी होकर उसके पास ही लौट आती है।

तुम नेक बंदे हो तुम्हें ईश्वर हमेशा खुश रखे।

पिंकी मेरी बात अधूरी रह गयी थी।

हाँ पूछिये न !

फिर वे लोगा क्या घरवालों के साथ रहने लगते हैं परिवार उन्हें स्वीकार कर लेता है।

हाँ और क्या, उन लोगों की दुबारा से शादी करा दी जाती है।

ये बढ़िया रीति है ।

कोई गम झेलने को अकेला नहीं रह जाता। प्यार सबका पूरा हो जाता है, अधूरा नहीं रह जाता।

हा, अधिकांश ऐसा ही होता है।

पिंटू तुम खुद भी खुश रहते हो और दूसरों को भी खुशियाँ देते हो। पता है अगर कोई खुश होता है तो भगवान उससे खुश होते हैं ।

अगर कोई दूसरे को खुशियाँ देता है तो ईश्वर उस बंदे के लिए स्वयं प्रार्थना करता है।

अच्छा ऐसी बात है !

ऐसा ही होता है। जहाँ खुशियाँ होती है वहाँ पर ईश्वर का वास होता है और खुशियाँ मन के भीतर ही होती है उन्हें बाहर स्वयं होंठो पर लाना होता है।

पिंकी और बिट्टू दोनों ही शांत थे मौन के आवरण में लिपटे हुए। जब प्रेम अनंत हो जाता है तो मौन भी बातें करने लगता है। तभी तो राशि बिन बोले ही कभी कभी सिर्फ मुस्कुरा देती है। उसकी याद ही चेहरे पर मुस्कुराहट लाने के लिए काफी होती है। रवि ने राशि को धोखा दिया या ठुकराया यह बात इतनी मायने नहीं रखती जितना यह बात कि राशि ने सच्चे दिल से उसे चाहा और खुद को पूर्णतया उसे समर्पित किया और अपने मन में हमेशा विश्वास बनाये रखा कि वे लौट आयेंगे, उसे ले जायेंगे, हमेशा के लिए अपना बनाकर। उसका ये अडिग विश्वास एक दिन जरूर रंग लायेगा।

क्या सोंच रही है आप ? पिंकी ने टोंका ।

कुछ भी नहीं बस यू ही।

दी, आप बहुत सोंचती है न । बिट्टू ने गाड़ी ड्राइव करते हुए कहा था।

अच्छा, कैसे पता?

मैं जब भी आपसे मिला, आपको गहन विचारो में डूबे देखा है । जैसे कहीं अतीत में विचरण कर रही हैं और हमारे साथ होकर भी हमारे साथ नहीं है। जैसे आपका तन तो यहीं पर रहता है और मन कहीं दूर पहुँच जाता है। राशि के अन्दर मुस्कुराहट फैल गई। उसे समझ नहीं आया कि इसे कैसे समझाये कि वो मन तो अपना रवि के पास ही छोड़ आई है, उसके पास है ही कब, तन है वो जाने कैसे अपने क्रियाकलाप करता रहता है। शायद मजबूरी में क्योंकि जिस्म मे जान लगती ही नही है ।

अचानक से तेज ब्रेक के कारण वे दोनों एक दम से झटके के साथ आगे वाली सीट से टकरा गई।

क्या हुआ बिट्टू । दोनों के मुंह से निकला।

सामने से एक गाय जिसकी एक टाँग एक्सीडेंट की वजह से टूट कर एक तरफ को लटक सी रही थी ! वह अपने तीन पैरों के सहारे उस टूटी टाँग को घसीटते हुई सी चल रही थी। ओह उसे देखकर मन में दर्द का एहसास हुआ। न जाने किसने टक्कर मारी होगी। कितनी तकलीफ झेली होगी और अभी भी उसी पीड़ा को सहती हुई, जीवन पूरा कर रही है। उसने सड़क पार करके एक तरफ को खड़ी हो गई। उसकी आंखों से टपकती बेचारगी और लाचारगी उसके मन को गहरे तक द्रवित कर गये थे। जीवन हर हाल में जीना ही पड़ता है। राशि ने गहरी सांस ली। बिट्टू ने कार आगे बढ़ा ली थी। ये जाने पहचाने से रास्ते, हवा में घुली हुई उनकी खुश्बू, हर तरफ दिखने वाला उनका ही चेहरा, ओह रूवि कितनी तीव्र यादों की वेदना मेरे अंदर भर देते हो । ये पीड़ा मुझसे अकेले सहन नहीं होती। क्या तुम भी इस दर्द को झेल रहे हो? क्या तुम भी मुझे महसूस करते हो? प्रश्नों की लड़ी सी फूट पड़ी जिनके जवाब सिर्फ रवि के पास ही हैं ।

सडक पर एक तरफ को काफी भीड़ थी । कुछ कारें खड़ी थी और कुछ लड़के लड़कियाँ हाथों में चिप्स के पैकेट पकड़े सड़क के किनारे पहाड़ों से फूटते झरने के आस पास खड़े होकर फोटो खिंचवा रहे थे। शायद कालेज के बच्चे थे।

क्या आज रविवार है?

हाँ आज रविवार ही तो है।

ओह तभी ये घूमने निकले हैं ।

हाँ दी मेरी तरह से है ही न ?

हाँ पिंकी।

चलो अपन भी फोटो खिंचवाते है।

नहीं रहने दो आप लोग चले जाओ।

इतनी सी उम्र में इतना ज्यादा गंभीर होना अच्छी बात नहीं, चलिए मेरे साथ।

राशि को न चाहते भी बाहर आना पड़ा।

उन लोगों को वहाँ पर आया देखकर वे लड़के लड़कियाँ चौंक गये मानों उन लोगों की मस्ती में इनके पहुँचने से व्यवधान आ जायेगा।

तुम दोनों उस झरने के पास जाओ, मैं फोटो खींचती हूँ। मैं बहुत अच्छी फोटोग्राफर हूँ ! बात करने का तरीका तो कोई राशि से सीखे ।

पिंकी और पिंटू मुस्कुरा दिये थे और राशि ने फोटो क्लिक कर लिया। ये नैचुरल मुस्कुराहट के साथ तो वैसे भी फोटो की सुन्दरता बढ़ जाती है ।

प्रकृति के रंग भी बड़े अजीब है। हर ओर एक नया रंग दिख जाता है। कितने रंगों की चुनरी ओढ़े हमारे स्वागत को उत्सुक रहती है। जब चाहा जैसे चाहा रंग बदल लिया। हम सब भी प्रकृति के ही अनुयायी है, हमारा जीवन उसी से प्रेरित है वह भी उसी के रंग में रंग जाता है, सुख दुःख ये भी तो एक तरह से स्याही, सफेद या सतरंगी रंग ही तो है, जो आते जाते रहते है।

दी, आप आओ मेरे साथ, हम तीनों के फोटो एक साथ,

भाई जरा एक फोटो ले लेना पिंकी ने अपना मोबाइल वहाँ पास में खड़े लड़के को पकड़ाते हुए कहा।

उस लड़के न चाहते हुए भी हल्की से स्माइल दी और फोटो खींचते हुए कहा आप जरा करीब आ जाये साथ ही टीथ वाली स्माइल दें। उसने इतने प्यारे ढंग से कहा कि मुस्कुराहट नहीं खिलखिला आया मन उसने अपने स्टाइल में उन लोगों के कई फोटो ले लिए और मोबाइल वापस करते हुए पूछा, आपकी स्माइल पर उदासी क्यों हैं?

राशि ये सुनकर अचंभित नहीं हुई क्योंकि अंदर से फूटती हुई खुशी चेहरे पर आती है और जब अंदर उदासी का गहन अंधियारा हो और दर्द के बादल हाहाकार कर रहे हो तो चेहरे पर भला खुशी कैसे दिखेगी। बनावटी खुशी या हंसी दूर से ही पता चल जाती है। इस झरने के पानी की तरह ही सबका मन साफ और निर्दोष हो जाये,

पिंकी की चहकती आवाज ने उसकी तन्द्रा को तोड़ दिया था।

उस होटल के आखिरी माले पर पहुंच कर वे कार्नर वाली सीट पर बैठे हुए थे । शीशे वाली खिड़की से बाहर का नजारा साफ दिखाई दे रहा था। घिरते हुए बादल या चमकती हुई धूप, पहाड़ियों पर बने घर ऊँचे-ऊँचे देवदार और चीढ़।

रवि, अचानक राशि के मुँह से निकल गया।

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