मधर्स डे - डिजीटल लव

करवटें बदलते बदलते थक गई थी लेकिन नींद आंखों से कोसों दूर थी।आती भी केसे कल मदर्स डे जो है। पूरे 5 साल के बाद दोनों बच्चे होस्टल से घर आए हे। इन 5 सालों में मदर्स डे पर सिर्फ फोन पर बात होती थी इसीलिए मैं बहुत उत्सुक थी,,कल सुबह रोज के जैसा अकेला दिन नहीं कटेगा। कल सुबह सब मेरे साथ होंगे ये दोनों मुझे क्या गिफ्ट देंगे ,मेरे लिए सरप्राइस प्लान की होगी सोनेकी कोशिश करतें हुए मैंने गहरा साथ लिया ।हां की ही होंगी मैंने खुद से जवाब दिया। 5 साल पहले दोनों बच्चे मदर्स डे पर चुपके से बाहर वाला होल मेरे लिए फूलों और गुब्बारों से सजाते थे ,सुबह मेरी आंख खुलते आशीष और मीनू मुझे गले लगा लेते और गिफ्ट हाथों में लिये मुझको मदर्स डे विश करते थे। बाद में मेरे लिए सजाये गए होल में मुझे आंख बंद करके ले जाया जाता और अपने हाथों से सजाई हुई एक एक चीज़ मुझे दिखाते। बाद में दोनों मेरे लिए चा नाश्ता बना के ले आते और घर काम में दोनों मेरी मदद करते। बाद में हम लोग मेरी किसी पसंदीदा जगह पर घूमने चलते। मुझे साल में से इस दिन का इंतजार रहता था ।हो भी क्यों ना यह दिन दोनों बच्चों मेरे लिए खास बना लेते थे। मैंने घड़ी की तरफ नजर की तो 3:00 बजे ही थे ,पता नहीं क्यों आज की रात एतनी लंबी होती जा रही हे ?. रोज़ तो नींद भी पूरी नहीं होती थी और सुबह हो जाती थी ।कब सुबह हो और कब दोनों बच्चे पहले की तरह लड़ते झगड़ते आई कि नहीं पहले में मां को विस करूंगा पीछे से मीनू बोलेंगी नहीं पहले में मां कोशिश करूंगी में छोटी हु इस लिए और दोनों मुझे प्यारी सी झप्पी दे देंगे और मुझे मदर्स डे विश करेंगे ।जब दोनो छोटे थे तो इतना प्यारा होल मेरे लिए सजाते से तो ,अब तो दोनों बड़े हो गए तो मेरे लिए केस होल सजाया होगा ।मुझे सब देखने कि बड़ी उत्सुकता हो रही थी ,मैं अपने पलंग से खड़ी हुई और कमरे में ही घूमने लगी मैं अभी बाहर जा के देखती हूं कि दोनों मेरे लिए कैसा होल सजा रहे नही नही दोनों की सरप्राइस खराब हो जाएगी ,मैं खुद से बोल उठी ।में खिड़की खोल के बाहर देखने लगी बाहर गली गुमसुम सा पढ़ी थी इतनी रात गए होगा कोन क्या मैं मैं भी आज इतनी आतुर हो गई हु ।जैसे तैसे करके मैंने समार पसार किया घड़ी में पाच बजते देख कर मेरी खुशी तो सातमे आसमान पे पहुंच गई थी ।वैसे तो में रोज 5:00 बजे उठ जाती हूं ,लेकिन आज जानबूझकर में सोने का नाटक करने लगी ,।अभी आशीष और मीनू आएंगे और मुझे प्यास से जागाके मदर्स डे विश करेंगे, लेकिन मेरा सोचना गलत साबित हुआ अभी तक कोई नहीं आया मैंने घड़ी में देखा तो पूरी 6:00 बज गए थे ।क्या हुआ होगा अभी तक दोनो आए क्यों नहीं हमेशा तो 5:00 बजे आ जाते थे दोनों मुझे विश करने के लिए,, मैं भी ना बेकार की चिंता कर रही हो दोनों मेरे लिए कुछ स्पेशल प्लान कर रहे होंगे तभी तो इतना लेट हो रहा है ।तभी मुझे बहार से दोनों की आने की आवाज़ सुनाई दिया। मैं भी आँख बंद करके सोने का नाटक कर रही थी आशीष मेरे पास आया और मुझे प्यार से जगाया मैं अभी बहुत ही ज्यादा नींद में हु ऐसा दिखावा कर रही थी ।तभी आशीष मेरे पास बेढ़ा "हैप्पी मदर्स डे मोम " मैं अभी कुछ बोलूं उससे पहले ही वह खड़ा हुआ और मीनू की तरफ बढ़ते हुए बोला लातो फोन वीडियो तो अच्छा बनाया है ना, तुम लोग वीडियो क्यों बना रहे हो और तुम तो रोज मुझे माँ केके पुकारते होना । माँ तुझे समझ मे नहीं आएगा इस वीडियो को में facebook और whatsapp पर अपलोड करूंगा।और आज के समय में मां कौन कह ता हे उसने फोन लेते हुए मुझे जवाब दीया। मीने तुम इतनी सुबह क्यों तैयार हुए हों कहीं पर जा रही हो क्या मैंने उसको देखते ही कहा । क्योंकि रात को तो वो सादी सी टीशर्ट और केप्री पहनकर सोई थी। लेकिन अभी उसने नए जींस टॉप पहन रखी थी,ऊपर से इतना सारा मैकप , ऐ क्या आशीष ने भी नए कपड़े पहन रखे ।तभी मीनू आशीष के हाथों में अपना फोन थामते हुए बोली अभी मेरी बारी है ,और तुम अच्छे से वीडियो बनाना और तुम माँ पहले की तरह मेरे बाल मत बिगाड़ देना मैंने आधे घंटे की मेहनत से यह हेयर स्टाइल बनाया है ।और फिर वह आशीष के जैसे ही मेरे पास आकर बैठ गई और हैप्पी मदर्स डे विश करने लगी में तो इन दोनों के नखरे देख कर चकित हो गई थी इसलिए कुछ भी बोल ना सके ,तुमने तो अच्छा वीडियो बनाया है ना मीनू ने बोला हां तुमसे तो अच्छी बनाया है। लो देख लो आशीष ने फोन देते हुए मीनू को कहा ।चल अब हम लोग मां के साथ फोटो खींच लेते हैं मीनू ने फोन देखा और फिर दोनों मेरे अगल-बगल बैठ गए और फोटो खींचने लगे तुम लोग रहने भी दो क्या सुबह से दोनो फोन में गड़े हुए हो ।बाहर चलो और मुझे दिखाओ की तुमने मेरे लिए कैसा होल डेकोरेट किया है। दोनों ही मेरे सवाल हस पडे क्या आप भी ना मां अब हम बच्चे थोड़े ही ना रहे जो फूल और गुब्बारे से आपके लिए कमरे सजायेंगे । यह देखी हमने पूरी रात जागकर आपके लिए कैसे कैसे वीडियो बनाएं आशीष मुझे फोन दिखाते हुए बोला उसमें हैप्पी मदर्स डे मॉम ,,आई लव यू मेरी प्यारी मां जैसे वीडियो थे । तो फिर मीनू बोलि ये देखिए माँ हमने जो भी आपके साथ वीडियो ली थी वो भी हमारे दोस्तों को कितनी पसंद आई है ।सब लोग अच्छा अच्छा बोल रहे चलिए बार चलिए आपको आपकी गिफ्ट दिखा दे मैं खड़ी हुई और बाहर सोफे पर आकर बैठ गई। दोनों ने मुझे गिफ्ट का एक बॉक्स दिया मैंने खोला तो अंदर अमेजॉन के पैकेट में एक बहुत ही सुंदर सी प्यारी साड़ी थी आपको अच्छी लगी ना साड़ी मां ।हा बहुत ही सुंदर सदी है ।तो जल्दी से आप आए साड़ी पेहेनके आइये ना हमें अपने सारे दोस्तों को दिखानी है कि हमने आपको क्या गिफ्ट दिया है ।लेकिन अभी पहने की क्या जरुरत है ,मैं कल भी तो इसे पहन सकती हु । दोनों ने बहुत ही जीत की इसलिए में तैयार होने चली गई । जैसे ही मैं वह साड़ी पहनकर बाहर आई तो दोनों फिर से मुझे चिपक चिपक के फोटो लेने लगे। आज के दिन आप कोई भी काम मत करना घर का सारा काम कामवाली कर लेगी आज आप सिर्फ आराम करेगी , मैं ऑनलाइन कुछ नाश्ता ऑडर करता हूं तब तक मीनू तुम जाकर चाय बना कर लेकर आओ आशीष ने फोन में नजर गड़ाए हुए ही मीनू को आदेश दिया । मीनू भी अपने फोन में नजर गड़ाए हुए किचन मैं चली गई थोड़ी देर में एक आदमी आया और नाश्ते का एक पैकेट देकर चला गया । मीनू ने भी तब तक चाय बना ली थी इसलिए आशीष ने खड़े होकर नाश्ता डाइनिंग टेबल पर लगात है। माँ आप जल्दी से नाश्ता कर लीजिए । जैसे ही में नाश्ता करने के लिए टेबल पर बैठी तो फिर से दोनों मेरे साथ फोटो खींचने लगे ,फोटो खींचने के बाद दोनों तुरंत सोफे पर बैठ कर अपनी अपनी डिजिटल दुनिया में खो गए ।दोनों का मेरी तरफ तो बिल्कुल भी ध्यान नहीं था। इतनी महंगी चमचमाती हुई साड़ी का पल्लू हाथ में लेकर मैं देखने लगी तो पहले की सस्ती साड़ियों से भी आज यह महंगी साड़ी चमक धुंधली सी लग रही थी ।क्योंकि इसके साथ प्यारी यादें नहीं जुड़ी थी ।अभी भी मुझे बहुत ही अच्छी तरह से याद है कि 5 साल पहले के मदर्स डे पर मेरे लिए साड़ी लेने के लिए आशीष और मीनू मुझे अपने साथ गली की एक दुकान में ले गए थे । वहां पर दुकान में दोनों ने मेरे लिए अलग-अलग साड़ी पसंद की थी और दोनों ही इस बात पर लड़ रहे थे कि नहीं मां पर यह वाली साड़ी अच्छी लगेगी नहीं यह वाली ज्यादा अच्छी लगेगी मां पर ,माना कि वह साड़ी सस्ती थी पर उसके साथ जुड़े हुए वह खुशी के पल उसे दुनिया की सबसे महंगी साड़ी बनाते थे ।मैंने खाने की तरफ नजर की तो बहुत ही अच्छी तरह से सजाया हुआ नाश्ता था लेकिन उसमें भी दोनों बच्चों का प्यार नहीं मिला था मुझे तो हमेशा से ही उनके हाथों से बनी वो टेढ़ी-मेढ़ी भाखरी अच्छी लगती थी, जो मदर्स डे पर मेरे लिए नाश्ता बनाने की लड़ाई में कभी कभी जला भी देते थे उस बिना आकर की जली हुई भाखरी के सामने आज यह नाश्ता मेरी आंखों को बेस्वास मालूम होता था। कहां गई वह प्यारी सी लड़ाई जब वे दोनों सुबह सुबह मुझे अपने हाथों से नाश्ता खिलाने के लिए किया करते थे। मैं अभी भी दोनों की तरफ देख रही थी अपने बनावटी दुनिया में जिसे कभी देखा ही नहीं उसके उसके साथ आज के दिन के खुशियां बाटी जा रही है ।मेजो दोनों के लिए दुनिया भर की खुशियां समेट के रखती हु वॉ इस डाइनिंग टेबल पर अकेले बैठि हुई हे ।आंखों से बहती आंसू को रोकते हुए मेरे टूटे हुए दिल में बस यही ख्याल आ रहा था कि ऐसा मदर्स डे फिर कभी ना आए जो मेरे बच्चों को मुझसे दूर रखें मैं वही टेबल पर अपना सर रख कर दोनों को मेरी नजरों के सामने लेकिन मेरे दिल से दूर अपनी डिजिटल दुनिया में खुश होते हुए देख रही थी। क्या उनकी खुशी के लिए मुझे डिजिटल प्यार स्वीकारना करना पड़ेगा।

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Ramswaroop Bishnoi Kheri 5 महीना पहले

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Surekha 5 महीना पहले

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Vishwa Prajapati 6 महीना पहले

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Saroj Bhagat 6 महीना पहले

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SHAILESH Patel 6 महीना पहले

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