रात ११ बजे के बाद - भाग ५

कुछ भी ना बताने का कारण जानना चाहता था और वह इन परिस्थितियों में अपने मित्र आनंद की जाँच प्रक्रिया को छोडते हुये उसके अमेरिका जाने के प्रयास के विषय में उलाहना देते हुये कहता है कि तुम कैसे मित्र हो जिस आनंद ने तुम्हें इतना मान सम्मान दिया अपनी हर निजी बातों को तुम्हें बताया तुम्हारे ऊपर घूमने फिरने में लाखों रूपये खर्च किये उसकी मृत्यु सामान्य है या कोई साजिश यह जाने बिना तुम्हारा मन में बाहर जाने का विचार कैसे आया? तुम सच सच बताओं कि तुम्हें और क्या जानकारी है अन्यथा हमें तुम्हें पुलिस हिरासत में लेना पडेगा और जब यह समाचार पत्रों में छपेगा तुम्हारी सारी प्रतिष्ठा खत्म हो जाएगी। यदि तुम अभी भी चुप रहते हो तो हमें आगे सख्त कार्यवाही तुरंत आरंभ करनी होगी यह सुनकर गौरव का होश उड गया और वह घबराहट में पसीने पसीने हो गया।

उसने बताया कि आनंद ने रंजना के प्रति अपनी सारी संपत्ति की वसीयत की थी उसकी मूल प्रति उसके पास है इसके बाद उसने वसीयत बदलकर पल्लवी के नाम करने की मूल प्रति भी उसके पास सुरक्षित हैं आनंद की मृत्यु की रात्रि में जब उसको आनंद ने बुलाया था तो वह दस्तावेज लेकर उसके पास गया था। आनंद बहुत विचलित था और पल्ल्वी द्वारा शादी कर लेने के कारण वह उसकी सलाह चाहता था। वह किस के नाम पर वसीयत करे उसने मुझे भी जायदाद का काफी बडा हिस्सा देने की मंशा बताई थी परंतु मैंने इसे अस्वीकार कर दिया था। इसके दो कारण थे एक तो मुझे रूपयों की कोई आवश्यकता नही थी। मेरे खर्च सीमित है जो कि मेरी आय से बहुत कम है। और दूसरा मैं आनंद के स्वभाव से वाकिफ था। वह हर दो तीन साल में जो उसके निकट रहता था उसे वह छोडकर किसी और को विश्वासपात्र बना लेता था मैंने उसे सुझाव दिया तुम अपने बेटों के नाम पर अपनी वसीयत कर दो परंतु तुम इतनी हडबडी में क्यों हो अभी तो तुम्हारी काफी उम्र बाकी है इसे तुम आराम से सोच समझ कर भी बाकी उम्र में कर सकते हो। आनंद बोला मुझे मेरी जान का खतरा है कभी भी मेरे साथ हादसा हो सकता है। मुझे फोन पर धमकियाँ मिल रही हैं। यह सुनकर मैंने उसको कहा कि तुम पुलिस की मदद क्यों नही लेते। कौन है जिससे तुम्हें खतरा महसूस होता है मुझे बताओं उसने दबी जुबान में किसी को ना बताने की कसम दिलाते हुये नाम बताया वह पल्लवी का था। मैं यह सुनकर काफी चौक गया। तब आनंद बोला मैने तुम्हे इस कारण भी बुलाया है कि तुम्हारी जान को भी उतना ही खतरा है जितना मैं अपने लिये महसूस कर रहा हूँ। तुम्हें मेरे और पल्लवी के संबंध में सभी जानकारियाँ हैं यही तुम्हारे लिय खतरा बन गई हैं। तुम सावधानीपूर्वक रहना। इसके बाद मैं वापस अपने घर आ गया।

आज की स्थिति में हरीश जी मैं अत्यंत दुविधा में फँसा हुआ हूँ आनंद की पल्लवी के नाम की वसीयत मेरे पास है यदि इसे मैं उसे दे दूँ तो वह पूरी संपत्ति की मालिक बन सकती है आनंद इस वसीयत को समाप्त करके दूसरी वसीयत मेरे सुझाव के अनुसार अपने दोनो बेटों के नाम पर करना चाहता था। मैं उसके घर से जब वापस आ रहा था तो मुझे रास्ते में उसने फोन पर बताया कि उसने वकील को बुलाया है और वह वसीयत को रद्द करके अपने बेटों के नाम पर वसीयत बना रहा है। इससे स्पष्ट है कि वह अपनी जायदाद पल्ल्वी को नही देना चाहता था परंतु वकील आया या नही यह मुझे नही पता। वह किस वकील को बुलाना चाहता था यह भी मुझे नही पता और उसके बेटों के नाम पर उसने नई वसीयत उस रात बना दी थी या नही इसकी भी जानकारी मुझे नही हैं।

हरीश इस जानकारी को देने हेतु गौरव का शुक्रिया अदा करता है और कहता है कि अभी तक किसी ने भी आकर यह नही बताया है कि वसीयत किसके पास हैं। ऐसी परिस्थिति में तुम्हारी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है यदि तुम पल्लवी की वसीयत सामने नही लाते हो तो उसे कोई जायदाद प्राप्त नही होगी और किसी वसीयत के ना रहने के कारण उसकी सारी संपत्ति उसके बेटों और उसकी पत्नी को मिलेगी। आज के समय में तुम्हारे जैसा ईमानदार, निष्ठावान एवं समर्पित व्यक्ति मिलना मुश्किल है। तुम्हारे मन में यदि कपट या लालच होता तो तुम यह वसीयत पल्ल्वी को देकर करोडो रूपये हजम कर सकते थे। मै तो तुम्हे शक के दायरे में लेता हुआ तुम्हे हिरासत में लेने आया था, तुम्हारे घर के बाहर पुलिस फोर्स खडी है और वह जेब से निकालकर उसके नाम का वारंट उसे बताता है परंतु मैं अब खाली हाथ वापस जा रहा हूँ तुम यह बात धोखे से भी किसी को मत बताना। क्योंकि यदि यह पल्लवी को पता हो गया तो वह वसीयत को प्राप्त करने के लिये तुम्हारे साथ येन केन प्रकारेण कैसा भी व्यवहार कर सकती है।

गौरव हरीश को धन्यवाद देता हुआ पूछता है कि अब तो आपको मैने इतनी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है आप पल्लवी को गिरफ्तार क्यो नही कर लेते। हरीश कहता है कानून अंधा होता है हम बिना किसी ठोस सबूत के हम उसके ऊपर कोई भी कार्यवाही करते है तो दूसरे दिन ही उसे न्यायालय से उसे जमानत मिल जाएगी और वह छूट जाएगी। हम पल्लवी के खिलाफ कोई भी कार्यवाही ठोस सबूत प्राप्त होने के बाद ही करेंगे। उसके पति रिजवी का भी कोई क्रिमिनल रिकार्ड नही है। मेरे पास अभी दो घंटे पहले ही पिछले माह के मोबाइल एवं लैंडलाइन से किये गये टेलीफोन नंबरों का विवरण प्राप्त हुआ जिसका अवलोकन मेरी टीम के सदस्य कर रहे है। इसमें मसूरी का एक नंबर जो कि रंजना का है उस पर प्रतिदिन चार से पाँच बार बातचीत की गई है यह फोन आनंद ने ही किये हैं रंजना की ओर से एक भी टेलीफोन नही आये। यह एक आश्चर्यजनक बात है कि आनंद को क्या आवश्यकता थी जो इतने फोन वह करता था। और ऐसी क्या बात थी जिसके लिये फोन किये गये। क्या तुम कुछ बता सकोगे ? गौरव कहता है कि यह बात तो मुझे भी आनंद ने कभी नही बताई परंतु आपकी इस बात से यह मालूम होता है कि उसकी एक माह से परेशानी का कारण कुछ ना कुछ गंभीर मामला रहा होगा और उससे वह वाकिफ नही है। यह तो आप रंजना से मिलकर ही मालूम कर सकते हैं। हरीश कहता है कि मेरा तुमसे निवेदन है कि तुम तुरंत मसूरी जाओ और रंजना से पूछकर प्रयास करों कि क्या मामला है क्योंकि पुलिस के जाने से इसका समाधान नही होगा। यह कोई ना कोई ऐसा व्यक्तिगत महत्वपूर्ण मामला है जो कि आनंद को परेशान किये हुये था। मुझे नही मालूम कि रंजना को आंनद की मृत्यु की सूचना है या नही।

हरीष के अनुरोध को गौरव स्वीकार करके उसी दिन मसूरी रवाना हो जाता हैं। मसूरी पहुँचकर वह सीधे रंजना के पास जाता हैं उसके कुछ कहने के पहले ही रंजना की आँखो मे आँसू आ जाते है और वह गौरव से पूछती है कि यह कैसे हो गया। वह यह भी बताती है कि उसे यह सूचना रवि ने उसी रात लगभग 12 बजे दे दी थी। कुछ देर वार्तालाप के बाद गौरव उससे पूछता है कि विगत एक माह से आनंद तुम्हें प्रतिदिन तीन चार बार फोन पर बात करता था। ऐसी क्या बात है जिसके लिये इतनी बार बात करना पड रहा था। रंजना ने भी उसे साफ बताया कि वह उसके बच्चे की माँ बनने वाली है। आनंद गर्भपात के लिये पिछले एक माह से दबाव दे रहा था। मैं गर्भपात के हमेशा खिलाफ रही हूँ मुझे लगता है इससे बडा पाप जीवन में और दूसरा नही होता। मुझे एक सप्ताह के अंदर ही अंतिम निर्णय लेना होगा। आपकी इस बारे में क्या सलाह है गौरव कुछ देर सोचने के बाद कहता है जिसकी याद आप संजोए रखना चाहती है जब वही इस दुनिया में नही रहा तो इसको जन्म देकर क्या फायदा है। यह आगे जाकर आपके लिये बहुत दुखदायी भी हो सकता है और यदि इसका जन्म होता है तो निश्चित रूप से आपके पति को आपके प्रति संदेह हो ही जाएगा। इन परिस्थितियों मे आपका भविष्य अंधकारमय हो सकता हैं। अभी आपके माता पिता को इसकी जानकारी नही है यदि उन्हें पता हो गया तो उनका आपके प्रति कैसा व्यवहार रहेगा यह कहना बहुत मुश्किल है। हमारे समाज में अभी यह स्वीकार नही है इसलिये मेरी सलाह तो वही है जो आनंद ने आपको दी थी। रंजना भी सोचकर गर्भपात के लिये मानसिक रूप से तैयार हो जाती हैं। वह गौरव से कहती है कि मेरे पिताजी मेरे पति के साथ कल से एक सप्ताह के लिये बाहर जा रहे है मुझे एक रात अस्पताल में रहना होगा। यही उचित समय है कि मैं दुखी मन से इस कार्य को संपन्न करा लूँ। वह दूसरे दिन गर्भपात करा लेती है।

गौरव मानवीयता के नाते दो दिन के लिये वहाँ रूक जाता है और उसके अस्पताल से छूटने के बाद उसे घर पहुँचाकर उससे विदा लेकर वापिस दुखद स्मृतियों के साथ रवाना हो जाता हैं। इसी बीच हरीश का फोन आता है तो वह उसे विनम्रतापूर्वक कहता है कि मैं वापिस आकर सारी बात बता दूँगा। वह वापिस आकर सबसे पहले राकेश को यह बात बताता है और उससे पूछता है कि क्या मैं यह बात जाँच अधिकारियों को बता दूँ। राकेश कहता है कि जरूर बता दो परंतु ऐसे किसी बयान पर हस्ताक्षर मत करना। राकेश की सलाह के अनुसार वह इस सच्चाई को हरीश रावत को इस शर्त पर बताता है कि वह आनंद के परिवारजनो कभी भी इससे अवगत नही कराएगा।

हरीश रावत का ध्यान चौकीदार के उस कथन पर जाता है जिसमें उसने कहा था कि रात में 10:30 बजे के आसपास उसने दीवार फाँदकर भागते हुये किसी को देखा था। अब जाँच अधिकारी हरीश रावत एवं आनंद के परिवारजनों की एक मीटिंग होती है जिसमें यह प्रश्न सभी के दिमाग में रहता है कि मृतक क्या आनंद ही था या कोई और ? यदि कोई और था तो वह बेडरूम तक कैसे पहुँचा। उसका उद्देश्य क्या था और क्या आनंद जीवित है इन प्रश्नो का जवाब किसी के पास नही था एवं सभी आश्चर्यचकित थे कि यह कैसा विचित्र मामला है ? इसका निदान कैसे हो ? आनंद के परिवार के सदस्यों से भी सलाह मशवरा लिया जा रहा था। उनके बेटों ने पुनः इस बात का ध्यान दिलाया कि घडी बदली हुई थी और हीरे की अंगूठी गायब थी।

वे इस बात से प्रसन्न भी हो रहे थे कि आनंद के जीवित रहने की संभावनाएं हैं और धोखें में किसी दूसरे शरीर का दाह संस्कार हो गया यह खबर ना जाने कैसे किसके माध्यम से पत्रकारों तक पहुँच जाती है और अब तो इस खबर के समाचार पत्रों में प्रकाशित होने से शहर में हडकम्प मच जाता है। हरीश रावत अपनी पूरी टीम के साथ सारी बातों का पुनः विश्लेषण करता है। वह सोचता है कि एक बार इससे संबंधित सभी लोगों की पुनः जाँच की जाए परंतु इससे क्या लाभ होगा इसके प्रति वह आशंवित नही था इसलिये वह इसे छोड देता हैं यदि यह माना जाए कि आनंद का कोइ हमशक्ल था तो वह कौन था, कहाँ से आया था, क्यों आया था किसने भेजा था और इससे पहले वह कभी क्यों नही आया। कोइ भी व्यक्ति अपनी मृत्यु के लिये नही आता इसलिये यह साफ था कि वह जो भी था उसकी वहाँ पर मृत्यु हो जाएगी इससे वह वाकिफ नही था क्योंकि उसे जहर दिया गया था। यदि वह अपनी मृत्यु से वाकिफ होता तो वह कभी नही आता। जिस चाय में जहर का होना पाया गया उसका कप टूटा हुआ कचरे के ढेर में खोजी कुत्ते ने खोजा था। उस दिन उस समय वहाँ सिर्फ एक नौकर था रमेश जो कि पिछले बीस साल से कार्यरत है। वह चाय बनाने से इंकार कर रहा था तब चाय किसने बनाई और कप बदल दिये गये। चाय में जहर की बात छिपाने के लिये चाय का कप कचरे के ढेर में छिपाने की कोशिश की गई। यह किसी होशियार और चालाक व्यक्ति का काम होना चाहिये तब क्या वहाँ पर आनंद के अलावा दो और व्यक्ति थे। डाक्टर का झूठ बोलना कि मृत्यु हृदयाघात से हुई है और वह डाक्टर कौन था इसका किसीको मालूम ना होना। सीसीटीवी कैमरे का बंद होना एवं अन्य घटनायें ये बताती है कि यह बहुत सोची समझी साजिश के तहत किया गया है और अभी तक हम सभी जाँच में भटक रहें हैं। पोस्टमार्टम रिर्पोट से साफ हो गया है कि आनंद के स्थान पर किसी दूसरे का क्रिया कर्म संपन्न हुआ है और पुलिस की जाँच को सभी मजाक बनाकर हँसी का पात्र बना रहें हैं। पुलिस विभाग के सभी जाच अधिकारी दुविधा में थे कि यह कैसा विचित्र मामला है जिसका कोई सुराग नही मिल रहा है इसमें सभी संदेह के घेरे में है परंतु किसी के भी खिलाफ कोई सबूत नही।

हरीश रावत ने खोजी कुत्ते को वापिस बुलाकर उसे बगीचे मे छोड़ दिया वह वापिस उसी स्थान पर जाकर कुछ सूंघने का प्रयास कर रहा था जहा पर वह पहले भी गया था। अब जाच अधिकारियों के निर्देशन पर वहा पर खुदाई की गई जिसमें कुछ गहराई पर ही आनंद का रिवाल्वर मिल गया इसकी जाच करने पर इसमें से तीन गोलिया चलने का प्रमाण मिला और किसी ने बड़ी होशियारी से अपने हाथ व उंगलियों के निशान मिटाए हुये थे इसकी गंभीरता से जाच करने पर रवि के हाथों से कुछ निशान मिलते थे इसलिये रवि को संदेह के घेरे में लेकर उससे कडाई से पूछताछ की गई परंतु वह इतना पक्का था कि उससे पुलिस कुछ भी नही उगलवा पाई। यहा पर एक बात तो निश्चित हो रही थी कि दीवार फांदकर भागने वाला आनंद ही था और कोई उसकी जान लेने के लिये आतुर था जिसने पहला प्रयास आनंद के बेडरूम में किया जहा उन्हें खाली खोका प्राप्त हुआ था दूसरा प्रयास उसके भागकर तेजी से सीढी उतरते हुये किया गया जिसका खोका सीढी के पास पडा था और तीसरा वह अंतिम प्रयास उसके दीवार फांदने के समय किया गया जिसका खोका बगीचे में मिला था यह आनंद का सौभागय था कि निशाना चूक जाने के कारण कोई भी गोली उसे नही लगी और वह अपनी आत्मरक्षा हेतु भागने में सफल हो गया।

रवि के घर की जाँच होने पर आनंद का मोबाइल एवं पेन जमीन के नीचे गड़ा हुआ पाया गया जिसे जब्त कर पुलिस ने रवि से पूछा यह सामान तेरे घर में कैसे आ गया ? इसे छिपा कर क्यों रखा गया था। तुम सच सच बताओ अन्यथा तुमको गिरफ्तार करके सच उगलवा लेना हमारा रोज का काम है। अब रवि घबरा गया और उसने बताया कि यह दोनो चीज मैंने चुपचाप अपने आप इसलिये रख ली थी कि मुझे विश्वास था कि आनंद का विदेश में खाता जरूर होगा और इसका नंबर इन्ही से प्राप्त हो सकेगा।

इसी समय अचानक ही भाग्य से ऐसी घटना घटित हो गई कि उससे जाच की दिशा निर्धारित हो गई और रवि का अपराधी होना मालूम हो गया। एक दिन दोपहर के समय हिमाचल की एक महिला पुलिस स्टेशन आई और एक फोटो दिखाकर बोली कि यह मेरे पति है और पिछले कुछ दिनों से इनका कोई पता नही है। यह जाते समय मुझे पचास हजार रू दे गये थे और बोले थे कि वापस आने पर एक लाख रू और दे दूगा मुझे रवि ने बुलाया है इसलिये वहाँ जा रहा हूँ। रवि को मुझसे क्या काम आ गया है जिसके लिये वह यह रकम मुझे दे रहा है इसका पता वहाँ पर जाने पर ही पडेगा। पुलिस विभाग उस फोटो को देखकर चौक गया यह हूबहू आनंद से मिलता जुलता चित्र था जिसका दाह संस्कार किया जा चुका था। अब अधिकारीगण उस महिला का बिना बताए कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी है उसकी संतानों के बारे में पूछताछ करती है। वह बताती है कि उसका बीस साल एक लडका है जो कि अभी पढ़ रहा है अब पुलिस विभाग मसूरी फोन करके उसके लडके को तुरंत बुलाने के लिये खबर करते है और दूसरे दिन वह आ जाता है।

रवि को हिरासत में ले लिया जाता है। उसके अपराधी होने से इंकार करने पर उसे उस महिला के सामने शिनाख्त हेतु बुलाया जाता है तो उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगती हैं। उस महिला के पूछने पर कि उसका पति कहाँ है वह रो पड़ा और बोला भौजी अब वह इस दुनिया में नही रहा। धोखे से जहरीली चाय पीकर उसकी मृत्यु हो गयी। यह सुनते ही महिला और उसके लडके के करूण रूंदन से वहाँ शोक का वातावरण निर्मित हो गया। हरीश रावत उसके बेटे को समझाकर बताता है कि धोखे से तुम्हारे पिताजी का अंतिम संस्कार हो गया है

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Šhãbâ Śhäïkh 6 महीना पहले

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Jitendra 6 महीना पहले