तीसरी आँख। Neha Sharma द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

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तीसरी आँख।

आज उसने शहर से दूर उस सफेद बंगले पर निगाहें टिकाए हुई थी। और वह बस मौका मिलते ही बंगले पर हाथ साफ करने की ताक में था। तकरीबन 20 22 साल का वह लड़का दिखने में गोरा चिट्टा मोटी-मोटी काली आंखें सफेद रंग का शॉल ओढ़े हुए वह रात के घनघोर अंधेरे में किसी जुगनू के समान प्रतीत हो रहा था। मौका हाथ लगते ही वह खिड़की से बंगले में प्रवेश करता है। और बहुत ही सावधानी से हॉल में रखी हुई सभी कीमती चीजों को इकट्ठा कर लेता है। लेकिन उसकी निगाहें तिजोरी वाली जगह को ढूंढ रही थी। वह धीरे-धीरे ऊपर वाले कमरे में प्रवेश करता है ।और कोने में रखी हुई  तिजोरी  को देख कर उसकी आंखों में चमक आ जाती है। वह जल्दी से तिजोरी में रखे हुए गाने पैसों को गहने पैसों को चुराकर वहां से भागने की फिराक में होता है। लेकिन तभी घर की सारी लाइट ऑन देखकर उसके हृदय की धड़कन बढ़ने लग जाती है। नीचे से आ रही आवाज सुनकर उसके पसीने छूट रहे थे। लेकिन वह हिम्मत जुटाकर वहां से  खड़ा होता है।और खिड़की की तरफ झांकता  है। जमीन और खिड़की का फासला  बहुत अधिक था। लेकिन वह बिना कोई घबराहट के खिड़की से कूद जाता है। उसे पुलिस की गाड़ी की आवाज सुनाई देती है। और वह वहां से भाग छूटता है। पुलिस उस तक पहुचे  इससे  पहले ही वह काफी दूर पहुंच चुका है। आज उसके भाग्य ने फिर से उसका साथ दिया। यह कोई पहली बार नहीं था। बल्कि 17 में से ज्यादा बार वह   पुलिस को चकमा देकर भाग चुका है। अब तो पूरे शहर में उसके पोस्टर भी लग चुके हैं। लेकिन पुलिस तमाम कोशिशों के बावजूद भी उसे पकड़ने में असफल है ।अब तो शहर वालों को यही डर है कि वह कब किस बंगले को अपना निशाना बना ले।उसका नाम तो कोई नहीं जानता था लेकिन लोग उसे मिस्टर थिफ के नाम से जरूर संबोधित करने लगे थे। अब तो शहर की पुलिस ने भी मिस्टर थिफ को पकड़ने का जुनून बना लिया था। क्योंकि  उस मिस्टर थिफ  की वजह से शहर की पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे थे। लेकिन एक दिन इंस्पेक्टर  एस के  अग्रवाल को   मिस्टर थिफ का सीसीटीवी फुटेज हाथ लगता है। और भाग्यवश  मिस्टर थिफ के चेहरे का नकाब नीचे गिर जाता है। और उसका चेहरा फुटेज में क्लियर दिखाई देता है। एक दिन  मिस्टर थिफ   अखबार में शहर के बहुत बड़े और महंगे बंगले की न्यूज़ पढ़ता है। वह  सोचता है कि अगर बंगला इतना आलीशान है तो उसमें धन भी कितना अधिक होगा। वह अपना अगला निशाना इसी बंगले को बनाने की सोचता है। वह अगली ही रात उस पते पर पहुंचता हैं ।इतने आलीशान बंगले को देखकर उसके मन में खुशी के  फव्वारे छुटने लगते हैं।वह उस बंगले में प्रवेश करता है। और उस बंगले की सभी कीमती  चीजों को इकट्ठा कर कर जैसे ही वहां से भागने की कोशिश करता है। सभी लाइट ऑन हो जाती है। और वह देखता है कि पुलिस उसे चारों तरफ से घेर कर खड़ी हुई है ।पुलिस को देखकर वह भौचक्का हो जाता है। वह वहा  से भागने की कोशिश तो करता है। लेकिन इस बार उसके भाग्य ने शायद उसका साथ देने से इंकार कर दिया था। एस के अग्रवाल-तुमने  हमें अपने पीछे बहुत दौड़ाया है इसलिए अब हम तुम्हें कहीं नहीं भागने  देंगे। और आज तुम सोच रहे होंगे कि हमने तुम्हें अचानक कैसे पकड़ लिया, तो यह सब हमारी ही प्लानिंग थी। हमने ही अखबार में झूठी खबर छपवायी  थी। ताकि तुम्हें पकड़ सके। मिस्टर थिफ़- लेकिन आपको मुझे पहचाना कैसे? मैं तो आज तक किसी की नजरों में नहीं आया था।  एस के अग्रवाल -तुम्हे शहर की जनता को खूब लूटा है ।भाग्यवश  अब तक तुम बचे रहे। लेकिन पुलिस इस बार पुलिस डिपार्टमेंट ने अपनी तीसरी आंख खोल ली   थी। और तुम्हारी सारी करतूते कैमरे में कैद हो गई। 
मिस्टर थिफ़- सर पर हाथ रखकर गहरी सोच में डूब गये थे।