The Author Kazi Taufique फॉलो Current Read धर्म By Kazi Taufique हिंदी प्रेम कथाएँ Share Facebook Twitter Whatsapp Featured Books धर्मराज की सभा - 2 धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभा (आगे)चित... दो पतियों की लाडली पत्नी - 37 घर का ड्रॉइंग रूम। परदे बंद। धूप का एक किरण भी अंदर नहीं। हव... प्यार? एक अनकहा एहसास...!! पार्ट 3 वैसे,हम दोनों भाई बहन, मॉम डैड बस इतने ही। मगर हमारे पूरे फै... प्रतिशोध द घोस्ट ऑफ कोलकाता - 4 उधर दिल्ली से अग्निश चट्टोपाध्याय और मंत्री दिग्विजय सिंह भी... दी किंग ऑफ अंडरवर्ल्ड - 12 महेन्द्र प्रताप चौहान के हाथ काँप रहे थे।बालकनी में खड़े-खड़... श्रेणी लघुकथा आध्यात्मिक कथा फिक्शन कहानी प्रेरक कथा क्लासिक कहानियां बाल कथाएँ हास्य कथाएं पत्रिका कविता यात्रा विशेष महिला विशेष नाटक प्रेम कथाएँ जासूसी कहानी सामाजिक कहानियां रोमांचक कहानियाँ मानवीय विज्ञान मनोविज्ञान स्वास्थ्य जीवनी पकाने की विधि पत्र डरावनी कहानी फिल्म समीक्षा पौराणिक कथा पुस्तक समीक्षाएं थ्रिलर कल्पित-विज्ञान व्यापार खेल जानवरों ज्योतिष शास्त्र विज्ञान कुछ भी क्राइम कहानी शेयर करे धर्म (9.5k) 1.7k 6.6k 2 समीर अपने दोस्तों के साथ मिलकर अजंता की गुफाओं मे पर्यटन करने के लिए आया था। समीर विद्यापीठ का छात्र है। और वह काफी रईस घराने का लडक़ा समीर के पिता पेशे से एक व्यवसायिक है।और शहर में काफी प्रसिद्ध हैं। समीर को पर्यटन का काफी शोक था। समीर की नजर अचानक एक बैग पे पड़ी जिसमें कुछ पैसे मोबाइल और कुछ दुसरी वस्तुएं रखी थी। और समीर ने ये जानने मे देरी नहीं की ये कीस का बैग हैं। वो बैग सुनैना का था और इत्तेफाक से सुनैना समीर के ही कॉलेज छात्रा लेकिन दोनों की मुलाकात नहीं थी। उस के बाद दोनो मे दोस्ती होगई धीरे-धीरे ये दोस्ती उस रास्ते पे जा बैठी जिसे हम प्यार कहते हैं। और ये प्यार परवान चढ़ने लगा। वो कहते हैं न की प्यार की राह आसान नहीं होतीं। उसी तरहां समीर और सुनैना के प्यार की राह भी आसान नहीं थी। वो कहावत है ना कि प्यार ना धर्म देखता ना जात पात ना ऊचा ना नीचा अमीर ना गरीब प्यार बस होहिं जाता हैं। कुछ दिनों बाद सुनैना को पता चला कि समीर धर्म से मुसलमान है तो सुनैना थोड़ा डर गई थी वो समीर को हिंदू समझतीं थी क्यु के समीर नाम हिंदू और मुसलिमों दोनों में प्रचलित हैं। लेकिन सुनैना का डर प्यार से बड़ा नहीं था। सुनैना ने अपना डर और प्यार दोनों समीर को बताएं और कहा मैने तुम से प्यार किया है। कोई धर्म से नहीं। समीर और सुनैना दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे दोोनों ने एक-दूसरे को अपना जीवन साथी चुन लिया था। और साथ जीने मरने की कसमे खाई। उन्हे पता था कि समाज उनके प्यार को स्वकार नहीं करेगा और नाहि सुकून से जीने देंगा। इस बात को जानते हुए भी के दोनों के घरवाले नहींं मानेेंगे। फीर भी दोनों ने ये फैसला लिया की दोनों अपनेेे-अपने घरवालों को बताएंगे। हुआ वहीं जिसका अंदाजा दोनों था। घरवालों ने साफ साफ मना कर दिया। सुनैना के घरवालों नेे सुनैना का कॉलेज बन करवा दिया फोन भी लेेेलीया। समीर के घरवालों से कह दिया ये हमारे मज़हब के खिलाफ हैं और अगर ऐसा करोगे तो तुम्हारा हमारा रिश्ता खत्म हो जाएंगा। इस के बाद दोनों का छुपते छुपाते मिलते। अब दोनों ने पका फैसला कर लिया दोनों भागकर शादी करेंगे। दोनों ने एसा ही किया और बहोत दुर एक छोटेेे-से शहर अपना ऐशोआराम छोड कर रहेेेन लगे। सिर्फ अपने प्यार के खातिर उन्होने अपना सब कुछ छोड दिया। लेकिन उनके दुर्भाग्य ने उनका पीछा नहीं छोडा उन्हेे ढूंंढने ना सिर्फ पोलिस पिछे लगी थीं। साथ ही उनकेे रिश्तेदार और गुंडे भी पकड़ ने मे लगे थे। उनका जीना मुुुश्किल करदीया था। वो कभी इस शहर तो कभी उस शहर वो यहा से वहां भटकने लगे दोनों नेे खुुुुखुदखुशी का विचार भी किया। समीर कहेता है इतनेें मुश्किले झेेलि कष्ट सहे अब नहीं सहेंंगे। वो कहेता है। हम कानुनी लड़ाई लडेंगेे और जीतेंगे। दोनों कानून के नजर मे शादी के पात्र थे। दोनो ने येे प्यार की जंग जीती और सब को हराया। और जींदगी खुशहाली से बिताई दोनों ने प्यार का धर्म निभाया। Download Our App