अधूरा प्रण Tejas Poonia द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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अधूरा प्रण

उसके फ़ोन का इंतज़ार करते-करते कब टोनी की आँखों में नींद आकर चुपचाप समा गई उसे पता ही न चला। ऐसा केवल एक बार नहीं हुआ था टोनी के साथ। अमूमन हर बार वह किसी न किसी के फ़ोन का इंतजार करते-करते ऐसे ही सो जाया करता था। माधव उसका मित्र ही नहीं सबकुछ था इसी तरह रवि, मनोज, राहुल, वीरभान आदि जैसे कई मित्र उसकी जिंदगी में आए थे। इस बार बारी माधव की थी। हर बार टोनी अपने उन घनिष्ठ कहे जाने वाले मित्रों के रूखे व्यवहार से आहत हो सोचा करता आज के बाद किसी के फोन का इंतजार नहीं करूँगा। वक़्त बदलता कुछ दिनों बाद फिर कोई नया मित्र उसका घनिष्ठ हो जाता। जिस पर वह दिलो जान लुटाने को तैयार रहता। अधिकतर लड़के लडकियाँ टोनी की इस बात को जान गए थे। लड़के खास करके उससे फायदा उठाया करते। टोनी भी उन लड़कों की हर संभव मदद किया करता। टोनी का दैहिक आकर्षण कब लड़कों के प्रति झुकने लगा वह नहीं जानता था। हाँ स्कूल के दिनों में उसके साथ पढ़ने वाले कुछ लड़कों ने उसके साथ गंदे काम किए। किसी भी क्लास में अपने पैंट को ढीला करते और टोनी का हाथ जबरदस्ती अपनी पैंट में घुसेड़ लिया करते। टोनी उस वक्त क्लास में टीचर होने के कारण विरोध नहीं कर पाता। एक दो बार उसने विरोध किया तो उसे घर जाते समय उन लड़कों ने उसे लहूलुहान कर दिया था। इसलिए यह बदस्तूर स्कूल में उसके साथ जारी रहा। उसके साथ पढ़ने वाले एक लड़के विजय ने तो हद ही कर रखी थी। बात उन दिनों की है जब विजय और टोनी दसवीं क्लास में थे। टोनी का घर स्कूल के पास ही था इसलिए वह पैदल आया जाया करता था। विजय के पास साइकिल थी। विजय के पिता की मौत बचपन में ही हो गई थी। पढाई में एकदम निठल्ले विजय को जब पता चला टोनी के साथ क्लास के साथी आखिरी बैंच पर ये सब गन्दी हरकतें करते हैं तो एक दिन उसने भी अपना बस्ता पीछे जमा लिया था।  टोनी यूँ तो अक्सर तीसरे या दूसरे नंबर के बैंच पर बैठा करता पर शारीरिक रूप से कमजोर टोनी को कुछ क्लासों के बाद पीछे के बैंच पर बैठना मजबूरी हो गई थी। विजय जब टोनी के पास बैठा तो उसने भी टोनी का हाथ पकड़ लिया। टोनी विजय को एकदम पसन्द नही करता था। लेकिन विजय अपनी क्लास और स्कूल का गुंडा था। सो टोनी चाहकर भी विरोध नही कर पाया। फिर क्या था थोड़ी देर बाद जब टोनी को हाथ में चिपचिपा सा लगने लगा तब जाकर विजय ने उसका हाथ हटाया। शायद यही स्कूल के वे दिन थे जब टोनी के साथ पहले पहल तो अनचाहा सबकुछ घटा पर उसके बाद कब यह उसके लिए स्वाभाविक हो चला कहा नहीं जा सकता। टोनी के घर में उसके बड़े भाई की शादी थी और उस दिन भी रात में सोते समय एक करीबी रिश्तेदार ने जब उससे नजदीकियां बढाई तब टोनी ने अपने आप को उसके सामने दिल से समर्पित कर दिया था। उस रिश्तेदार ने उसके साथ ये प्रक्रिया कई बार दोहराई और कई दिनों तक उसे फोन करके परेशान भी किया। उस रिश्तेदार से मिलने के बाद न जाने कितनों के सामने उसने अपनी इच्छा से सिर झुकाया और न जाने कितनों ने उसे चींटी की तरह मसला।

टोनी ने एक बार अपने आपको जाँचने की कोशिश करते हुए एक लड़की को प्रपोज किया। हालाँकि उसकी उस लड़की से अच्छी दोस्ती हो गई थी। लेकिन करीब एक साल की दोस्ती के बाद भी वह उस लड़की से कभी शारीरिक संबंध बनाने के लिए नहीं कह पाया। जब उस लड़की की शादी की डेट फिक्स हो गई तब उसने कहा शादी में वह एक शर्त पर ही आएगा जब वह उसके साथ संबंध बनाए। यहाँ तक भी वह लड़की मान गई पर अगले ही दिन टोनी ने उससे बातचीत बन्द कर दी यह कह कर कि वह ये सब नहीं कर सकता। इससे उसकी बनती जिंदगी बिगड़ सकती है। टोनी को लगा जैसे वह अब उस स्थिति में पहुँच चुका है जहाँ पर लोग उसे समलैंगिक का तमगा दे सकते हैं।

टोनी इस बात का ख्याल करके भी दहल जाता था और तुरंत भक्तिमय गीत सुनने लग जाता। टोनी की जिंदगी में अभी तक कम से कम बीसियों लोग इस तरह शामिल हुए थे। जिनमें से कई उसके साथ ताउम्र रहने का वादा किया करते थे। टोनी की पढाई जैसे तैसे पूरी हुई और एक दिन वह एक अच्छी मोटी तनख्वाह लेने वाला अफ़सर भी बन गया। अफसर बनते ही उसकी शादी तय हुई। टोनी को अब पूरा अधिकार मिल गया था उन सब लोगों के बदले पूरे करने का लेकिन इसमें उसकी बीवी सलोनी का क्या कसूर था। ख़ैर चाहकर भी टोनी उसके साथ बुरा व्यवहार नही कर पाया। सहज संबंध उनके बीच जन्म लेने लगे एक साल बीतते-बीतते टोनी एक सुंदर से बच्चे का पिता बन चुका था। टोनी ने आज उस दुनिया को न सही लेकिन अपने आप को साबित कर दिया था कि वह समलैंगिक नहीं है। शादी के बाद भी उसके संबंध हालाँकि पुरुषों के साथ रहे। लेकिन जब उसे लगा कि वह एक खतरनाक बीमारी एड्स का मरीज बन सकता है। तब उसने इन अप्राकृत और असुरक्षित संबंधों से तौबा कर ली थी। उसने शादी के बाद भी कभी अपने परिवार में यह बात पता नहीं चलने दी थी।

दूसरी ओर वह माधव जैसे कई मित्रों के साथ चाह कर भी संबंध नहीं बना पाया था। जिसका उसे कई बार अफसोस होता। उसे लगता ये सब लोग केवल मतलब परस्त हैं। कोई उसकी भावनाओं की कद्र नहीं करता। लेकिन जब उसने ये सब नहीं चाहा था और उसके साथ जबरदस्ती की जाती तब वे लोग भी तो उसकी भावनाओं को अपनी दो टांगों के बीच के खूँखार जानवर के तले दबा दिया करते थे। टोनी मस मसाकर रह जाता। उसने सोचा क्यों न वह भी इसी तरह दुनिया के साथ करे। परन्तु भीतर से जब इंसान भावनात्मक स्तर पर एकदम टूट जाता है तब उसे दूसरों की भावनाओं की इज्ज़त करना इतना प्रिय हो जाता है जितना की नन्दी को शिव प्रिय हो गए थे। माधव के साथ उसने कई रातें बिताईं। उसके कमरे में उसके पलंग पर सोया। एक आध बार कोशिश भी की, कि माधव उसके साथ सहज हो सके। परन्तु माधव ने उससे थोड़ी दूरियाँ बनानी शुरू कर दी थी। व्यवहार में और दोस्ती में भले उनके रत्ती भर फर्क नहीं पड़ा हो लेकिन बतियाते समय या साथ जब कभी वे सोते तो एक निश्वित दूरी बनी रहती। टोनी को जब यह महसूस हुआ की माधव ऐसा कोई अप्राकृतिक रिश्ता उनके बीच नहीं चाहता तब टोनी का दिल बहुत दुखा लेकिन वह उससे कुछ नहीं कह पाया था। माधव और टोनी के साथ सोने के लिए एक दिन माधव का एक नया दोस्त आया था। माधव ने उसका नाम सन्नी बताया। लेकिन टोनी ने उससे एक साधारण बातचीत की और वे सब सोने चले गए। एक ही लम्बे चौड़े बैड पर तीनों जब सोने लगे तो माधव ने बीच में अपने दोस्त को सुला लिया। टोनी दूसरे कोने पर करवटें बदलते सोचता रहा कि उसने आखिरकार क्यों उनींदी आंखों से माधव का फोन उठाया। यहाँ एक बार फिर उसकी भावनाओं पर इस कदर छुरी चली की उसने प्रण लिया कि वह अब किसी को भी समलैंगिक नजरिये से नहीं देखा करेगा। परन्तु भीतर ही भीतर वह जानता था कि यह प्रण उसका कभी पूरा नहीं हो पायेगा। 


रचनाकार परिचय

तेजस पूनिया

सम्पर्क – House No 177, Street No. 03, Near- RLG Guest House

Sri Ganganagar, Rajasthan- 335001

919166373652, 9198802707162

ई-मेल- tejaspoonia@gmail.com

शिक्षा - पूर्व छात्र स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय

प्रकाशन- जनकृति अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका, हस्ताक्षर मासिक ई-पत्रिका, अक्षरवार्ता अंतर्राष्ट्रीय रेफर्ड जनरल, विश्वगाथा त्रैमासिक अंतर्राष्ट्रीय प्रिंट पत्रिका, आरम्भ त्रैमासिक ई पत्रिका, परिवर्तन-त्रैमासिक ई-पत्रिका , ट्रू मिडिया न्यूज़, पिक्चर प्लस डॉट कॉम, ब्लॉग सेतु, विश्व हिंदीजन ब्लॉग, सहचर त्रैमासिक ई-पत्रिका, प्रयास कनाडा से प्रकाशित ई-पत्रिका, आखर हिंदी डॉट कॉम, सर्वहारा ब्लॉग, सरस पत्रिका, सृजन समय, प्रतिलिपि डॉट कॉम, सेतु अमेरिका से प्रकाशित हिंदी ई पत्रिका आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, किताबों आदि में कविताएँ, लेख, कहानी एवं फ़िल्म समीक्षाएं प्रकाशित तथा कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में पत्र वाचन एवं प्रकाशन।