मेरा क्या क़सूर AAKIL AHMED SAIFI ak aamedsi द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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मेरा क्या क़सूर

मेरा क्या क़सूर

आकिल अहमद सैफी

‘’अरे दादा’’

‘अरे माई,

‘’अरे दादा

अरे बाप’’

‘‘अरे माई, अरे दादा, अरे बाप अरे बा.....

अरे माई, अरे दादा, अरे बापों.. ’’’’

अरे माई, अरे दादा, अरे माई, अरे दादा, अरे बापों, अरे बाप....

मै नहीं लिया हूँ, मै नहीं लिया हूँ सर’’

बाप रे बाप, अरे माई, ‘’’’’’!

अरे दादा, ओ दादा, अरे माई, ओ माई, अरे बाप....अरे दादा, अरे बापों, अरे माई |

वो ये अल्फाज़ इतनी जल्दी और तेजी से बोलता जा रहा था की आधे अल्फाज़ समझ आ रहे थे और बाकि हवा के साथ कही गायब हो रहे थे | न जाने कितनी बार बोल चुका था वो ये अल्फाज़ | हर बार चिल्लाते हुए उस लड़के की आवाज़ में तीव्रता बढती जा रही थी |

बोली से तो वो बिहार या उत्तर प्रदेश का लग रहा था उसकी उम्र यही कोई 17 – 18 साल के करीब रही होगी | सर पर हल्के छोटे बाल, मासूम चेहरा, ऊपर हरे रंग की शर्ट और निचे जींस, पैरो में चप्पल और सावला रंग था उस लड़के का |

दो पुलिस वाले उस लड़के के घुटनों पर एक तक़रीबन 7 – 8 फुट लम्बा बांस का डंडा रख कर उस डंडे पर वो दोनों पुलिस वाले खुद खड़े थे | डंडे के एक छोर पर पतला – सा गले में गमछा डाले खड़ा तो दूसरी छोर पर एक हाथ में घड़ी पहने तो दूसरे हाथ में छड़ी लिए, 2 सितारे वाला, मोटी तोंद वाला चश्मा लगाये तक़रीबन 1 क्विंटल के पार ही उसका वजन होगा खड़ा था |

चारों तरफ हरे - भरे खेत लहरा रहे थे कुछ खेतो में पीली सरसों उग रही थी तो कुछ खेतो में चारी – बाजरा की खेती हो रही थी | ठंडी हवा के झोके पीली सरसों की खुशबू चारो तरफ बिखेर रहे थे | खेतो की डोलो में बोरिंग के जरिए बाहर आता हुआ ठंडा व मीठा पानी बह रहा था | खेतो के बीचो – बीच 2 कमरे बने हुए थे, एक कमरा बोरिंग के लिए था तो दूसरा कमरा आराम करने व जरूरी सामान रखने के लिए बनाया हुआ था | उन दो कमरों के बीच में एक बरगद का पेड़ लगाया हुआ था | उस विशाल बरगद के पड़ की छाया में मोजूद वो 5 शख्स | जिनमे एक बेगुनाह लड़का और वो जुल्म ढाहते 4 जल्लाद पुलिस वाले थे | जितनी दूर भी नज़र जाती बस हरे – भरे खेत – खल्यान नज़र आते या फिर वो जुल्म ढाहते 4 जल्लाद पुलिस वाले | वो न तो पुलिस थाना लग रहा था और न ही कैद खाना |

मोटी तोंद पुलिस वाले ने उस लड़के के कुल्हे पर एक जोर से छड़ी मारी |

ज्यादा सियाडा बन रा है !

मैं नहीं लिया हूँ सर, सर मैं नहीं लिया हूँ ‘’’’’’’’

मैं हकीकत बोला हूँ सर, मैं आपके पैर पड़ रहा हूँ सर |

बहुत पड़े, यह कहते हुए उस पुलिस वाले ने उस लड़के के कुल्हे पर पोरी ताकत से 3 – 4 छड़ी मार दी !

मैं नहीं लिया हूँ सर, मैं नहीं लिया हूँ सर हकीक़त........

ला हाथ फैला, हाथ फैला वो पुलिस वाला पूरी ताकत से उस लड़के के हाथ पर लगातार छड़ी मार रहा था |

अरे कुर्शी हटा उसने दूसरे पुलिस वाले से कहा ‘’’,,,’’’’’

अरे सर मैं हकीक़त बता रहा हूँ !!!!!

हाथ फैला, अरे सर जब मैं लिया नहीं हूँ तो ???

बहुत फट रहा है किस्मत फुट गई ये कहते हुए उस पुलिस वाले ने उस लड़के के मुहं पर पूरी ताक़त से तिन – चार लात मारी |

आखें फुट गई, वो बेचारा फुट – फुट कर रो रहा था....

हू हू हू हू हू हू हू हू.....|

रो, और तेज रो, और तेज रो, वो लड़का अपने दोनों हाथ उस बे-रहम, बे-शर्म, बे-हया (यूं तो कितना ही ज़लील किया जाये इस ज़ालिम को वो भी कम ही होगा) पुलिस वाले के आगे फैलाए बेबस ज़मीं पर पड़ा था |

वो पुलिस वाला पूरी ताक़त से उस लड़के के हाथो पर लगातर मारता जा रहा था और वो बस यही चिल्लाएं जा रहा था अरे माँ, अरे दादा, अरे पापा मैं नहीं लिया हूँ सर....

और पुलिस वाला मरते हुए कहता जा रहा था और तेज रो, और तेज रो तूने सुना नहीं मैने क्या कहा और तेज र....|

मुहं पीछे कर, अपना मुहं पीछे कर ले | नहीं तो मुहं पे लग जाएगी, मुहं पीछे कर !

तेरी माँ को च...., तेरी बहन को....., र.... के बच्चे....|

अगली बार जब तेरी माँ को माँ बनना हो तो मेरे पास भेज दियो और फिर मेरे पीछे से गमछे डाले पुलिस वाले ने कहा |

वो मोटी तोंद पुलिस वाला इतने अपशब्द इस्तेमाल कर रहा था की उस को बयां कर पाना मुश्किल है |

सर आप मेरी माँ – बहन को गाली क्यों दे रहे हो ???

मुझ से जबान लड़ाता है एक सीनियर पुलिस वाले से | तेरी इतनी हिम्मत यह कहते हुए उस पुलिस वाले ने उस लड़के के मुह पर 3 – 4 लात दे मारी |

“फैला, फैला, फैला हाथ को फैला ‘’’’’’’

हाथो को फैला, फैला हाथो को फैला दूसरा गमछा डाले हुए पुलिस वाले के कहा |

बारी बारी से वो दोनों पुलिस वाले उस मासूम लड़के पिटते जा रहे थे |

मैं नहीं लिया हूँ अरे बाप, अरे दादा, नहीं लिए है, अरे बाप, अरे दादा, अरे मै, अरे बाप, अरे दादा, मैं नहीं लिया....|

अरे मनोज छोड़ भी दे अब इसको | और कितना पिटेगा, नजदीक में ही चारपाई पर बैठे पुलिस वाले ने कहा !!

अभी नहीं, अभी तो और हड्डिया टूटेगी माँ..... की |

अरे विक्रम मना कर इसे, कही मर गया न, तो नई मुसीबत गले पड़ जाएगी |

“रोक इसे ‘’’’’’!!!

भो....... वाला अभी नहीं मरेगा, अगर मर भी गया न तो खेतो में फेंक देंगे साले को कही | कुत्ते के बच्चे की हड्डिया भी नहीं मिलेगी, वैसे भी ये इलाका अपने ही पास है अगर किसी को मिला भी तो आतंकवादी बता देगे साले | और बदले में हमें मिलेगे मेडल्स और उचा पद |

तू जानता है न की वो इसने नहीं लिया फिर भी तू इसको इतना....…

साला रं..... का ब.... मुझ से एक पुलिस वाले से ज़बान लड़ता है इंस्पेक्टर मनोज की बात नहीं मानेगा ! मैं भी देखता हूँ कैसे नहीं सुनेगा भो..... वाला |

उस वक़्त तक उस बेगुनाह लड़के के घुटने बुरी तरह सूज कर हाथी के पावं के बराबर हो चुके थे | पूरा शारीर बहुत बुरी तरह ज़ख्मी हो गया था पूरा शारीर खून से लथपथ और जिस्म का हर एक हिस्सा दर्द के मरे काप रहा था | चिल्ला – चिल्ला कर उसकी आवाज़ फट चुकी थी और अब वो न तो बोलने के काबिल बचा था और न नही कुछ करने के |

उस बेचारे की तो बस इतनी सी गलती थी की वो वहा मोजूद था, उस पुलिस वाले के पास “जब क्या उस पुलिस वाले का दिमाग ख़राब था |

“या तो हमें चालाकियां सिखाई जाए |

या फिर हमारी अलग बस्ती बसाई जाए ||

***