इस कहानी का सारांश इस प्रकार है: "प्रतिज्ञा" के तीसरे अध्याय में होली का दिन प्रस्तुत किया गया है, जो पंडित वसंत कुमार के लिए भंग पीने का दिन है। उन्होंने पहले से ही अपने दोस्तों को बुला लिया है और भंग की तैयारी कर रखी है। बाबू कमलाप्रसाद उनके पास आते हैं और भंग के लिए अपनी इच्छाओं को व्यक्त करते हैं, साथ ही वे अपने घर की पत्नी की नाराजगी से बचने के उपाय भी पूछते हैं। पूर्णा, कमलाप्रसाद की पत्नी, अपने पति के लिए उबटन करने का कार्य करती है और उन्हें नहाने के लिए गंगा जाने से रोकती है। आगे की कहानी में, वसंत कुमार गंगा में फूल लेने जाते हैं, लेकिन थकान के कारण वे मुश्किल में पड़ जाते हैं। उन्हें जल-प्रवाह के कारण लौटना कठिन हो जाता है और वे अपने जीवन के अंत का सामना करते हैं, पूर्णा की याद के साथ। इस प्रकार, कहानी प्रेम, विवाह, और जीवन के संघर्षों की गहराई को दर्शाती है। प्रतिज्ञा अध्याय 3 Munshi Premchand द्वारा हिंदी लघुकथा 12.9k 4.9k Downloads 11.2k Views Writen by Munshi Premchand Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण प्रतिज्ञा उपन्यास विषम परिस्थितियों में घुट घुट कर जी रही भारतीय नारी की विवशताओं और नियति का सजीव चित्रण है। प्रतिज्ञा का नायक विधुर अमृतराय किसी विधवा से शादी करना चाहता है ताकि किसी नवयौवना का जीवन नष्ट न हो। ..। नायिका पूर्णा आश्रयहीन विधवा है। समाज के भूखे भेड़िये उसके संचय को तोड़ना चाहते हैं। उपन्यास में प्रेमचंद ने विधवा समस्या को नए रूप में प्रस्तुत किया है एवं विकल्प भी सुझाया है। अमृतराय आर्य - मंदिर में एक व्याख्यान सुनकर प्रतिज्ञा करते हैं की वे एक विधवा से ही शादी करेंगे। इस प्रतिज्ञा से लालाजी नाराज हो जाते है कि यह संप्रदाय के खिलाफ है। पर प्रेमा उसके निर्ण्य का स्वगत करती है और उस से अपना प्रेम त्याग देति है। Novels प्रतिज्ञा प्रतिज्ञा उपन्यास विषम परिस्थितियों में घुट घुट कर जी रही भारतीय नारी की विवशताओं और नियति का सजीव चित्रण है। प्रतिज्ञा का नायक विधुर अमृतराय किसी वि... More Likes This चुन्नू और मुन्नू - एक खट्टी-मीठी दोस्ती ( भाग -1) द्वारा Vishakha Pareek जग्गू - द डिटैक्टिव - 1 द्वारा Rakesh Kumar Sharma आज्ञा द्वारा Rajeev kumar पता बताते दिन द्वारा महेश रौतेला तुम हो तो सब कुछ है - भाग 1 द्वारा Ankit Khatri मेरी जिंदगी का सफर 1 द्वारा Ankit Khatri अहमदाबाद के चर्चे द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी