Gomati Tum Bahati Rahna - 4 book and story is written by Prafulla Kumar Tripathi in Hindi . This story is getting good reader response on Matrubharti app and web since it is published free to read for all readers online. Gomati Tum Bahati Rahna - 4 is also popular in Biography in Hindi and it is receiving from online readers very fast. Signup now to get access to this story.
गोमती, तुम बहती रहना - 4
Prafulla Kumar Tripathi
द्वारा
हिंदी जीवनी
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विवरण
आत्मकथा अंश (4): गोमती , तुम बहती रहना !:आदर्श समाज बनाने का बिखरता सपना कवि और साहित्यकार “अज्ञेय” कहते हैं कि “वह क्या लक्ष्य जिसे पाकर फिर प्यास रह गई शेष बताने की, क्या पाया ? ” अर्थात आपकी जीवनोपलब्धि ऐसी होनी चाहिए कि जिसके बाद कुछ और पाने की अभिलाषा समाप्त हो जाए और आपकी उपलब्धि को लोग स्वयं महसूस करें न कि आप उसको दुनियाँ को बताते फिरें |उनकी यह बात सिद्धांतत: सही लगती है किन्तु व्यावहारिक स्तर पर ऐसा संभव नहीं। है | सफल और आदर्श व्यक्तित्व की उपलब्धि ही क्यों असफलता,कमजोरी भी तो सबके सामने आनी
अपने जन्म वर्ष 1953 से अपने जीवन की युवावस्था और दाम्पत्य तथा नौकरी शुरुआत तक की अवधि का आत्मगंधी लेखा- जोखा मैंने अपनी आत्मकथा के पहले खंड “ आमी से ग...
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