में और मेरे अहसास - 56 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 56

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

खुदाया मेरी कब्र पे गुलाब चढ़ाने न आया करो lदिल मे दफन किये हुए अह्सास जिंदा हो जाते हैं ll१८-५-२०२२ *************** तेरा ज़िक्र मेरी रूह तक को हिला देता है lतेरी फ़िक्र मेरी रूह तक को हिला देती ...और पढ़े


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