में और मेरे अहसास - 55 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 55

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

मैं नारी हूँ , अपराजिता हूँ l न झुकुंगी, न रुकूंगी, न रोउंगी, न डरूँगी l हौसलों के साथ आगे कदम बढाउंगी l कोई जंजीरें मेरे पाँव बाँध नहीं सकतीं l कोई तूफ़ाँ, कोई आँधी मुझे नहीं रोक सकती ...और पढ़े


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