में और मेरे अहसास - 43 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 43

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

शरारत मुहब्बत बन गई है lशराफत इनायत बन गई है ll तुम्हारी याद मे लिखीं हुईं lदैनन्दिनी रवायत बन गई है ll ************************************* दिन तो गूजर जाता है lरात काटे नहीं कटती ll खंजर की तरह चुभती है lयाद ...और पढ़े


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