में और मेरे अहसास - 42 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 42

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

न पुछो हमसे की महोब्बत मे वो कीतना खयाल रखती है।लाखो की भीड मे भी वो मेरा सबके सामने हाल पुछती है। मुझे देखकर ना वक़्त देखती है, ना वक़्त का तकाज़ा देखती है lभरी महफिल मे भी वो ...और पढ़े


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