में और मेरे अहसास - 38 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 38

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

बात रूह की करो lजान बेज़ान सी है ll ************************************** कोई मगरूर है, तो कोई यहा मशहुर है lकोई खामोश हैं, तो कोई वहा मजबूर है ll ************************************** जिस चमन मे महफ़ूज़ समजा था ख़ुद को llवहीं ...और पढ़े

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