मे और मेरे अह्सास - 10 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

मे और मेरे अह्सास - 10

Darshita Babubhai Shah मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी कविता

मे और मेरे अह्सास भाग- १० **** बात को भुलाना आसाँ होता lयाद को भुलाना आसाँ होता ll चांदनी मे डूबी हुई महकती lरात को भुलाना आसाँ होता ll नशीली निगाहों से पिया हुआ lजाम को भुलाना आसाँ होता ...और पढ़े

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