निर्वाण - 2 Jaishree Roy द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

निर्वाण - 2

Jaishree Roy मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी सामाजिक कहानियां

निर्वाण (2) गौरांग-सा दिव्य रूप था नकूल बोधिसत्व का! उनके चेहरे पर हमेशा बनी रहने वाली स्मित मुस्कान से लगा था, वह जीवन के अनंत दुखों के पार कहीं स्थायी ठिकाना पा गये हैं। कितनी अद्भुत, कितनी विरल होगी ...और पढ़े