बॉलीवुड में एक जैसे विषय पर बनी फिल्मों का एक साथ रिलीज होना नया नहीं है। उदाहरण के लिए, 1993 में 'खलनायक' और 'खलनाईका' जैसी फिल्में आईं थीं, जिनमें समानताएं थीं। 2002 में, भगत सिंह के जीवन पर तीन फिल्में एक ही साल में रिलीज हुईं, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सभी फ्लॉप रहीं। हाल ही में आई 'उजड़ा चमन' भी एक फ्लॉप रही, और अब 'बाला' रिलीज हुई है। 'बाला' की कहानी कानपुर के एक मिडल-क्लास युवक बालमुकुंद उर्फ बाला की है, जो अपने गंजेपन से परेशान है। बाला फेयरनेस क्रीम बेचता है और उसकी प्रेम कहानी में कई मोड़ आते हैं। आयुष्मान खुराना ने बाला की भूमिका में शानदार प्रदर्शन किया है और गंजेपन के दर्द को प्रभावी ढंग से पेश किया है। फिल्म में उनका कॉमेडी और गंभीर दृश्यों में अभिनय सराहनीय है। आयुष्मान खुराना की सादगी और वास्तविकता दर्शकों से जुड़ने में मदद करती है, और 'बाला' उनकी लगातार सातवीं हिट फिल्म है। फिल्म की दोनों हीरोइनों ने भी अपनी भूमिकाएं अच्छी तरह निभाई हैं। कुल मिलाकर, 'बाला' एक मनोरंजक फिल्म है जो दर्शकों को पसंद आ रही है। ‘बाला’ फिल्म रिव्यू - आयुष्मान का जादू फिर चलेगा..? Mayur Patel द्वारा हिंदी फिल्म समीक्षा 31.9k 3.9k Downloads 14.7k Views Writen by Mayur Patel Category फिल्म समीक्षा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण एक जैसे विषय पर बनी ‘ट्विन’ फिल्मों का एक ही समय पर रिलिज होने का किस्सा बोलिवुड में कोई नई बात नहीं है. 1993 में सुभाष घई की ‘खलनायक’ (सुपरहिट) के पीछे पीछे आई ‘खलनाईका’ (सुपरफ्लॉप) के सब्जेक्ट में समानताएं थीं. 2002 में तो कमाल हो गया था. शहीद भगतसिंह के जीवन पर आधारित तीन फिल्में एक ही साल में रिलिज हुईं थीं- ‘द लेजेन्ड ओफ भगतसिंह’ (अजय देवगन) ‘23 मार्च 1931- शहीद’ (बॉबी देओल) और ‘शहीद-ए-आजम’ (सोनु सूद). बॉक्सऑफिस पर तीनो फिल्मों का कबाडा हो गया था, लेकिन देवगनवाली देखनेलायक थीं. गंजेपन की वजह से एक जवान लडके की जिंदगी में होनेवाली ट्रेजेडी पर पिछले हफ्ते ही आई ‘उजडा चमन’ बुरी तरह से फ्लॉप हो गई है. उसी विषय पर इस हफ्ते आईं है ‘बाला’. तो अब सवाल ये है की, ‘तेरा क्या होगा बालिया..?’ Novels फिल्म रिव्यू - मयूर पटेल फिल्म रिव्यू – ‘ठग्स ओफ हिन्दोस्तान’… दर्शको को वाकइ में ठग लेगी ये वाहियात फिल्म कई सालों से ये होता चला आ रहा है की दिवाली के त्योहार पर रिलिज हुई... More Likes This ट्रिपलेट्स भाग 1 द्वारा Raj Phulware नेहरू फाइल्स - भूल-80 द्वारा Rachel Abraham Dhurandhar - Movie Review द्वारा Ashish पती पत्नी और वो - भाग 1 द्वारा Raj Phulware टीपू सुल्तान नायक या खलनायक ? - 9 द्वारा Ayesha फिल्म समीक्षा द डिप्लोमेट द्वारा S Sinha सिल्वरस्क्रीन के गोल्डन ब्वॉयज़ - 1 द्वारा Prabodh Kumar Govil अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी