फिल्म "ड्रीम गर्ल" में आयुष्मान खुराना ने करमवीर का किरदार निभाया है, जो गोकुल में बेरोजगार है और नौकरी की तलाश में है। उसे एक अनोखी नौकरी मिलती है, जिसमें उसे कॉल सेंटर में एक फेक लड़की 'पूजा' की आवाज में ग्राहकों से बात करनी होती है। शुरुआत में उसे यह काम मजेदार लगता है, लेकिन समस्याएं तब शुरू होती हैं जब लोग पूजा की आवाज पर फिदा होकर उसे अपनी 'ड्रीम गर्ल' मानने लगते हैं। यह स्थिति उसकी व्यक्तिगत जीवन में मुश्किलें खड़ी कर देती है, और कहानी इसी संघर्ष के चारों ओर घूमती है। आयुष्मान का अभिनय इस फिल्म में बहुत सराहा गया है, खासकर जब वह विभिन्न महिला आवाजें निकालते हैं। उन्होंने साड़ी पहनकर स्टेज पर सीता और द्रौपदी का भी किरदार निभाया है, जिससे उनकी परफॉर्मेंस और भी आकर्षक बन गई है। फिल्म में अन्य कलाकारों की कास्टिंग भी बेहतरीन है, जिसमें अन्नु कपूर, मनजोत सिंह, और विजय राज जैसे अभिनेता शामिल हैं। फिल्म की कॉमेडी, संवाद और कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री ने इसे एक सफल एंटरटेनर बना दिया है। "ड्रीम गर्ल" आयुष्मान की पिछली फिल्मों के सभी रिकॉर्ड तोड़ने की क्षमता रखती है। फिल्म रिव्यूः ‘ड्रीम गर्ल’ कमाल-धमाल-बेमिसाल कोमेडी Mayur Patel द्वारा हिंदी फिल्म समीक्षा 45k 3.8k Downloads 13.2k Views Writen by Mayur Patel Category फिल्म समीक्षा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण क्या कर रहा है? क्या कर रहा है? क्या कर रहा है ये लडका आयुष्मान खुराना..? दे धनाधन सिक्सर पे सिक्सर… सिक्सर पे सिक्सर… मारे जा रहा है. ‘विकी डोनर’ और ‘दम लगा के हैसा’ जैसी ओफबीट सुपरहिट फिल्में देने के बाद पिछले सिर्फ देढ साल में इस बंदे ने ‘अंधाधून’, ‘बधाई हो’ और ‘आर्टिकल 15’ जैसी तीन सुपरहिट फिल्में दी है. और अब जो ‘ड्रीम गर्ल’ लेके आया है, वो तो उसकी पीछली सारी फिल्मों के रेकोर्ड तोडनेवाली है. इस जबरदस्त एन्टरटेनर की कहानी कुछ यूं है की… गोकुल में रहेनेवाला करमवीर (आयुष्मान खुराना) बेकार है, लाख कोशिशों के Novels फिल्म रिव्यू - मयूर पटेल फिल्म रिव्यू – ‘ठग्स ओफ हिन्दोस्तान’… दर्शको को वाकइ में ठग लेगी ये वाहियात फिल्म कई सालों से ये होता चला आ रहा है की दिवाली के त्योहार पर रिलिज हुई... More Likes This ट्रिपलेट्स भाग 1 द्वारा Raj Phulware नेहरू फाइल्स - भूल-80 द्वारा Rachel Abraham Dhurandhar - Movie Review द्वारा Ashish पती पत्नी और वो - भाग 1 द्वारा Raj Phulware टीपू सुल्तान नायक या खलनायक ? - 9 द्वारा Ayesha फिल्म समीक्षा द डिप्लोमेट द्वारा S Sinha सिल्वरस्क्रीन के गोल्डन ब्वॉयज़ - 1 द्वारा Prabodh Kumar Govil अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी