संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 6 Manoj kumar shukla द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 6

Manoj kumar shukla द्वारा हिंदी कविता

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (6) सबसे कठिन बुढ़ापा..... जीवन जीना कठिन कहें तो, सबसे कठिन बुढ़ापा । हाथ पैर कब लगें काँपनें, कब छा जाये कुहासा । मात-पिता, दादा-दादी सब, खिड़की ड्योढ़ी झाँकें । नाराजी की मिले पंजीरी, ...और पढ़े