यह कहानी सरला और विक्रम की है, जो एक कठिन परिस्थिति में हैं। नौ महीने बीतने के बाद सरला को प्रसव के समय तेज़ दर्द हो रहा है। विक्रम, जो शहर गया था, को जानबूझकर वहां भेजा गया था ताकि वह प्रसव के समय उपस्थित न हो। दाईमां जब कमरे से बाहर आती हैं, तो बताती हैं कि सरला ने एक बेटी को जन्म दिया है। यह सुनकर सरला की सास और अन्य सदस्य नाखुश होते हैं, क्योंकि उन्हें बेटा चाहिए था। सरला अपनी बेटी को देखकर खुशी महसूस करती है, लेकिन उसकी जेठानी चुपचाप बच्ची को ले जाती है। सरला अपनी बेटी को वापस पाने की कोशिश करती है, लेकिन सासू और जेठानी उसे रोकती हैं। सरला अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए अपनी जान देने की धमकी देती है, लेकिन सासू गुस्से में कहती हैं कि वह सरला को और उसकी बेटी को घर से बाहर फेंक देंगी। सरला को घर से बाहर निकाल दिया जाता है, और वह अपनी बच्ची को सीने से लगाकर रोने लगती है। विक्रम, जब खेत से लौटता है, तो सरला की इस हालत को देखता है और तुरंत उसके पास आता है। वह सरला को सांत्वना देता है और अपनी बेटी को गोद में उठाकर प्यार से देखता है। अंत में, विक्रम सरला को लेकर वहां से चला जाता है, यह दर्शाते हुए कि वह अपनी परिवार की रक्षा के लिए तैयार है। बेवजह... भाग ४ Harshad Molishree द्वारा हिंदी महिला विशेष 9.4k 4.3k Downloads 11.1k Views Writen by Harshad Molishree Category महिला विशेष पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण अब तक....देखते ही देखते नौ महीने बीत गए... सरला को बहोत तेज़ दर्द होरहा था, किसीभी वक़्त प्रसर्ग हो सकता था, सभी लोग बहोत उकसूक्त थे... सरला को बार बार विक्रम से हुई वह बातें याद आ रही थी, विक्रम शहर गया था, यह बहोत ही सोचा समझा नुस्खा था, विक्रम की माने कुछ दिनों के लिए विक्रम को शहर भेज दिया ताकि प्रसर्ग के वक़्त वह यहां मौजूद ना हो और जो लड़की पैदा हो तो उससे आसानी से रास्ते से हटाया जाए....अब आगे....इंतज़ार खत्म हुआ, दाईमां कमरे से बाहर आई... और उन्होंने धीमे शब्दों मै उदासी भरे स्वर Novels बेवजह... बेवजह....भाग १....राजस्थान की जलाने देने वाली गर्मी मैं... एक लड़का जो महज १४ - १५ साल का होगा, सुनसान रास्ते पर लडखडाते हुए चल रहा है, पिघलादेने वाली... More Likes This एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 1 द्वारा Jyoti Prajapati चांदनी - 1 द्वारा Vandna Sharma ख़ाकी बिंदिया - भाग 1 द्वारा Shilpy Aggarwal फरामोश इश्क़ - 1 द्वारा Sakshi Rai अनामिका - 1 द्वारा Vandna Sharma भीड़ में अकेली - 1 द्वारा Alok Mishra झूठ का बोझ - भाग 2 द्वारा deepanshi garg अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी