सड़कछाप - 18 dilip kumar द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

सड़कछाप - 18

dilip kumar Verified icon द्वारा हिंदी उपन्यास प्रकरण

सुबह अमर की आंख बहुत देर से खुली। जागते ही उसने शीशे की खिड़की से बाहर देखा तो अभी भी बहुत कोहरा था। उसने घड़ी में वक्त देखा तो साढ़े नौ बज रहे थे। कमरे में कोई नहीं था। ...और पढ़े