हिम स्पर्श 45 Vrajesh Shashikant Dave द्वारा उपन्यास प्रकरण में हिंदी पीडीएफ

हिम स्पर्श 45

Vrajesh Shashikant Dave मातृभारती सत्यापित द्वारा हिंदी उपन्यास प्रकरण

45 “हाय अल्लाह। मुझे आश्चर्य है कि मैं इन अनपेक्षित गलियों में कैसे भटक गई? मैं उद्देश्य को भूल गई और अज्ञात-अनदेखे मार्ग पर चलती रही। जीत, मैं भी कितनी मूर्ख हूँ।“ “वफ़ाई, ज्ञात एवं पारंपरिक मार्ग पर ...और पढ़े