यह कहानी "आजाद-कथा" के खंड-2 का एक अंश है, जिसे रतननाथ सरशार ने लिखा है और प्रेमचंद ने अनुवादित किया है। इसमें सुरैया बेगम के घर का वर्णन है, जहां एक ओर वजीर डोमिनी नाच रही है और दूसरी ओर शहजादी का मुजरा हो रहा है। कहानी में फीरोजा और अन्य पात्रों के बीच संवाद है, जिसमें फीरोजा पूछती है कि फैजन को इस उजड़े हुए शहर की डोमिनियों का गाना क्यों पसंद है। जानी बेगम सुझाव देती हैं कि देहात की मीरासिनें बुलवाई जाएं। इस पर सब हंसते हैं और फैजन शरमा जाती हैं। फहीमन डोमिनी मुजरा करने लगती है और उसके साथ अन्य महिलाएं संगीत वाद्ययंत्र बजाती हैं। उसके गाने की बहुत सराहना होती है। जानी बेगम चौथे दिन तवायफों के नाच का जिक्र करती हैं। नजीर बेगम कश्मीरी लोगों की बातों का मजा लेने की बात कहती हैं, जबकि हशमत बहू नवाब साहब की चिढ़ का उल्लेख करती हैं। कहानी में शारीरिकता और सामाजिक परंपराओं पर चर्चा होती है, जहां फीरोजा कहती हैं कि शरीफजादी के लिए दिल का पर्दा सबसे बड़ा होता है। अंत में, फैजन फहीमन से एक गीत गाने के लिए कहती हैं। कहानी में मजेदार संवाद, नृत्य और संगीत का आनंद, और सामाजिक मान्यताओं की झलक देखने को मिलती है। आजाद-कथा - खंड 2 - 97 Munshi Premchand द्वारा हिंदी फिक्शन कहानी 2.9k Downloads 7.8k Views Writen by Munshi Premchand Category फिक्शन कहानी पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण सुरैया बेगम का मकान परीखाना बना हुआ था। एक कमरे में वजीर डोमिनी नाच रही थी। दूसरे में शहजादी का मुजरा होता था। फीरोजा - क्यों फैजन बहन, तुमको इस उजड़े हुए शहर की डोमिनियों का गाना काहे को अच्छा लगता होगा? जानी बेगम - इनके लिए देहात की मीरासिनें बुलवा दो। फैजन - हाँ, फिर देहाती तो हम हैं ही, इसका कहना क्या? इस फिकरे पर वह कहकहा पड़ा कि घर भर गूँज उठा और फैजन बहुत शरमाईं। जानी बेगम ने कहा - बस यही बात तो हमें अच्छी नहीं लगती। एक तो बेचारी इतनी देर के बाद बोलीं, उस पर भी सबने मिल कर उनको बना डाला। Novels आजाद-कथा - खंड 2 मियाँ शहसवार का दिल दुनिया से तो गिर गया था, मगर जोगिन की उठती जवानी देख कर धुन समाई कि इसको निकाह में लावें। उधर जोगिन ने ठान ली थी कि उम्र भर शादी न... More Likes This सुनहरा फलक - 1 द्वारा Digvijay Singh Rathore खलनायिका के रूप में पुनर्जन्म - 1 द्वारा Fictional world THE UNTOLD CHAPTER - 1 द्वारा Neha Banchhor कुरिवाज की केद से सपनों की उड़ान तक - 1 द्वारा miss k त्रिवेणी: एक आदर्श बहू से बेकार बहू बनने तक का सफर - 1 द्वारा Triveni chakrdhari अनाथ - अध्याय 1 द्वारा Dev Kumar Rawat गायब - एक रात की कहानी - 1 द्वारा Patel Lay अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी