रितिका अपने पिता शांति प्रसाद को आदर्श मानती थी और उनके सामाजिक-राजनीतिक विचारों से प्रभावित होकर बड़ी हुई। उसकी माँ, मालती, जिसे रितिका ने हमेशा नपे-तुले शब्दों में बात करते देखा था, कभी-कभी अपने पति के प्रति तीखे शब्दों का प्रयोग करती थी, जिससे रितिका को माँ का व्यवहार अप्रिय लगता था। रितिका अपने पिता के बढ़ते प्रभाव से अभिभूत थी जबकि माँ की सफलता का उसे कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता था। जब रितिका अठारह साल की हुई, तब शहर में 'ह्यूमन सर्विस फाउंडेशन' द्वारा आयोजित 'दो दिवसीय समाज-उत्सव' में उसके पिता को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। रितिका इस कार्यक्रम के लिए उत्साहित थी, जबकि माँ उदासीन थीं। अंततः माँ ने रितिका की खुशी के लिए कार्यक्रम में जाने का निर्णय लिया। कार्यक्रम के दौरान, जब शांति प्रसाद मंच पर आए, तो प्रेक्षागृह तालियों से गूंज उठा। रितिका अपने पिता की सफलता से गर्वित होकर तालियाँ बजा रही थी, जबकि मालती भावशून्य मुद्रा में कहीं और खोई हुई थीं। इस प्रकार, रितिका के लिए यह अनुभव पिता के प्रति श्रद्धा और विश्वास को और भी मजबूत करता है। मिश्रा जी का मंच-मोह Dr kavita Tyagi द्वारा हिंदी लघुकथा 2.6k 1.9k Downloads 14k Views Writen by Dr kavita Tyagi Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण परंपरागत पितृसत्तात्मक समाज स्त्रियों को अनेक सीमाओं-बंधनों में जकड़ कर अपना प्रभुत्व स्थापित करके अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए युगों-युगों से स्त्री को बलि का बकरा बनाता आया है । अपने हृदयस्थ कोमल भावों के अधीन स्त्री अपनी गृहस्थी को बचाने के लिए स्वयं को गृहस्थ रुपी यज्ञ-कुंड की समिधा बनाकर गौरवान्वित अनुभव करती है । किंतु आज की सुशिक्षित माँ अपनी प्रतिभाशाली बेटी को आगे बढ़ने का पूरा अवसर उसे देना चाहती है । इसलिए वह स्वयं आगे बढ़कर उन सीमाओं को तोड़ देती है, जिन्हें उसने अपने लिए सहज स्वीकार कर लिया था । प्रस्तुत कहानी मिश्रा जी का मोह-मंच आज की स्थिति का रोचक शैली में किया गया शब्दांकन है । More Likes This किराए का घर द्वारा Vandna Sharma First Love - 1 द्वारा Sah Ankita जिस जीवन में तुम थे - 2 द्वारा SHREYA INDUSHREE तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 द्वारा Anil Kundal मेरा साहित्य लेखन द्वारा Rakesh Kumar Sharma अलविदा आनंद! द्वारा Devendra Kumar आग और ठहराव - 1 द्वारा Alka rahul Aggarwal अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी