"ओ रे पिया रे उड़ने लगा मन बावरा रे........." गाना म्यूजिक प्ले पर बज रहा है,और मैं इस गाने पर ज़ूम -ज़ूम कर डांस कर रही हूँ | तभी रूम में कोई आता है और म्यूजिक ऑफ कर देता है और आवाज़ आती है चाहत बहुत कर लिया डांस अब फ्रेश हो के आ जाओ ब्रेकफास्ट कर लो तुम्हारे भैया कब से वेट कर रहे है तुम्हारा ? मैं -भाभी , डांस करने दो ना प्लीज ! रिया भाभी - नहीं बिलकुल नहीं , बहुत हुआ तुम्हे कॉलेज एडमिशन के लिए भी जाना है सो जल्दी करो नहीं तो फिर

नए एपिसोड्स : : Every Tuesday, Thursday & Saturday

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चाहत

"ओ रे पिया रे उड़ने लगा मन बावरा रे........." गाना म्यूजिक प्ले पर बज रहा है,और मैं गाने पर ज़ूम -ज़ूम कर डांस कर रही हूँ | तभी रूम में कोई आता है और म्यूजिक ऑफ कर देता है और आवाज़ आती है चाहत बहुत कर लिया डांस अब फ्रेश हो के आ जाओ ब्रेकफास्ट कर लो तुम्हारे भैया कब से वेट कर रहे है तुम्हारा ? मैं -भाभी , डांस करने दो ना प्लीज ! रिया भाभी - नहीं बिलकुल नहीं , बहुत हुआ तुम्हे कॉलेज एडमिशन के लिए भी जाना है सो जल्दी करो नहीं तो फिर ...और पढ़े

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चाहत - 2

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चाहत - 3

पार्ट -3 शाम को डिनर के मैंने भैया और भाभी को अपने कॉलेज में फर्स्ट डे के बारे में बताया | साथ में नेहा और सुमन के बारे में भी बताया | ये भी बताया कि वो कितनी supportive हैं | ये सुन कर भैया -भाभी बहुत खुश हुए ,कि मुझे दोस्त मिल गए हैं कॉलेज में | भाभी -ये हुई ना बात | कॉलेज के दोस्तों की तो बात ही अलग है | मैं -अच्छा भाभी ,मैं रूम में जा रही हूँ | मुझे नोट्स कवर करने हैं | गुड नाईट | ...और पढ़े

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चाहत - 4

पार्ट -4 अमन की बात सुनकर जैसे हमारी सोचने -समझने की शक्ति ही चली गयी | हम खामोश थे | तभी सुमन कहती है -यही बात बतानी थी | नेहा - सुमन ,ये प्यार तुम्हे हुआ कब ? जरा बताना ? प्राची -सच में प्यार है या अप्रैल फूल बना रही हो ? अगर बना रही हो तो तुम जान लो ये फरवरी का महीना है अप्रैल का नहीं | मैं -सुमन ,ऐसा मजाक भी कोई करता है क्या ? सुमन -नहीं, मैं सच में प्यार करती हूँ अमन से | अमन -मैं भी | मैं -देखो अमन ,माना ...और पढ़े

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चाहत - 5

पार्ट -5 कॉलेज के बाद मैं और नेहा उसका जरुरी सामान लेकर घर आ गए थे। भैया बहुत खुश थे कि नेहा हमारे साथ एक वीक रहेगी। भाभी ने नेहा को गेस्ट रूम में शिफ्ट कर दिया था। अब डिनर के बाद मैं और नेहा छत पर बैठकर गप्पे मार रहे हैं। मैं -नेहा ,मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि हम इतनी जल्दी दोस्त बन जायेंगे। नेहा -सोचा तो मैंने भी नहीं था कि तुम जैसी अपने में ही खोये रहने वाली लड़की ऐसे सबसे घुल -मिल जाएगी। मैं -अच्छा जी। मेरा मजाक उडा रही हो...... नेहा -कुछ ...और पढ़े

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चाहत - 6

पार्ट -6 अब तक हमने देखा कि सलिल अपने प्यार का इज़हार चाहत कर देता है। ये सुनकर चाहत सदमें में है। अब आगे - किसी ने ठीक ही कहा है कि अनएक्सपेक्टेड इंसिडेंट सहने की क्षमता हर किसी में नहीं होती। मेरे साथ भी यही हो रहा है। सलिल की बाते सोच -सोच कर मैं पागल हुए जा रही हूँ। मैं -(खुद से ही ) अब क्या करूँ ? कैसे सब दोस्तों को बताऊँ ? और नेहा ने तो पहले ही इस बारे में बताया था। मेरा सर फटा जा रहा है। कुछ भी समझ नहीं ...और पढ़े

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चाहत - 7

पार्ट -7 सलिल के अंदर जाने के कुछ समय बाद मैं भी अंदर चली गयी। सब लोग आपस बात्तें कर रहे हैं। शिव भैया और प्राची साथ बैठे बिलकुल मेड फॉर each other लग रहे हैं। तभी दादी जी पंडित जी से कहती हैं -पंडित जी ,शुभ मुहर्त में कितना टाइम बाकी है ? पंडित जी -माता जी ,अभी तो 40 मिनट बाकी हैं। दादी जी -ठीक है। (फिर हम सब दोस्तों की तरफ देखते हुए ) क्यों रे बच्चो ? तुम्हारे दोस्तों की सगाई है कुछ नाच -गाना नहीं करोगे ? नेहा -पर दादी ,हमे तो बाराती डांस ...और पढ़े

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चाहत - 8

पार्ट -8 शिव भैया की सगाई को दो दिन बीत चुके हैं। आज भाभी की गोदभराई की रस्म हमने फंक्शन बहुत छोटा रखा है। भाभी बड़ा फंक्शन नहीं चाहती थी। इसलिए सिर्फ शिव भैया की मम्मी ,दादी, नेहा ,प्राची और सुमन को बुलाया है। सास और माँ की सारी रस्में शिव भैया की मम्मी ने निबाही। हम दोस्तों ने मिलकर खूब मस्ती की। अब हम सब बैठकर गप्पे मार रहे हैं। दादी जी -रिया बेटा ,अब तो कभी भी हॉस्पिटल जाना पड़ सकता है। नौओं महीना शुरू हो गया है। भाभी-जी दादी ,इसलिए तो राघव ने अभी से छुटियाँ ...और पढ़े

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चाहत - 9

पार्ट -9 मैंने सबका मन रखने के लिए हाँ तो बोल दिया है पर मेरा अतीत ? ही कहा है किसी ने इंसान कितनी भी कोशिस कर ले अपने अतीत से भाग नहीं सकता। मेरा अतीत भी हर पल मेरे साथ साये की तरह चिपका हुआ है। मैं अपने अतीत से चाहकर भी बाहर नहीं आ सकती। लगता है भैया और भाभी समय के साथ उन पुरानी बातों को भूल गए हैं। लेकिन पुरानी बातें याद आते ही मेरे हर जख्म को ताजा कर देती है। (फ़ोन की आवाज़ आती है। ) मैं फ़ोन देखती हूँ तो उसी नंबर ...और पढ़े

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चाहत - 10

पार्ट - 10 एक घंटे तक डिग्री वितरण समारोह चलता रहा। बाद डीन सर ने सबको फ्यूचर के लिए शुभकामनायें दी। और कनवोकेशन समाप्त हुआ। अब सब स्टूडेंट्स अपने -अपने दोस्तों के साथ बिजी हैं सेल्फी लेने में। हम सब दोस्त भी बिजी हैं सेल्फी लेने में। हमारे परिवार वाले घर चले गए हैं। हम सब दोस्त रुके हैं आखिरी बार अपने कॉलेज की यादें ताजा करने के लिए। शिव भैया और अमन भी रुके हुए हैं हमारे साथ। सलिल का हमे पता नहीं वो चला गया है या नहीं। अब हम सब कैंटीन में बैठे ...और पढ़े

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चाहत - 11

पार्ट -11 मैं लाल साड़ी में लिपटी हुई में पायल छनकाती हुई एक कमरे की तरफ बढ़ रही हूँ। कमरे में जाकर खुद को आईने में निहारती हूँ। साड़ी से मैचिंग चूड़ियां ,झुमके ,माथे पे छोटी सी बिंदी ,और मांग में सिन्दूर मेरे रूप को और निखार रहा है। मैं अपनी ही सुंदरता पर मोहित हो रही थी तभी पीछे से किसी ने मुझे अपनी बाहों में भरकर गुड मॉर्निंग विश किया। मैंने सामने आईने में देखा तो सलिल ने मुझे अपनी बाहों में जकड रखा है। आज मैं सलिल की पकड़ से आज़ाद ...और पढ़े

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चाहत - 12

पार्ट -12 मैंने नेहा को कहा था वो मुझसे उस दिन के बारे में ना पूछे जब मैं सलिल से मिल कर आई थी। अब उन बातों को एक साल हो गया था। इस एक साल में उसने एक अच्छी दोस्त की तरह मेरी बातों का मान रखा और कभी भी दोबारा कुछ नहीं पूछा उस दिन के बारे में। इस एक साल में मैं और नेहा और अच्छे दोस्त बन गए हैं। अब नेहा हमारे घर पर ही पेइंग गेस्ट बन कर रहती है। हमने उसे गेस्ट रूम रहने के लिए दे दिया ...और पढ़े

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चाहत - 13

पार्ट -13 कहते हैं जीवन गम और खुशी धूप -छाँव की तरह होते हैं। जो समय के साथ बदलते रहते हैं। मुझे एक तरफ सलिल की बातों से मायूसी हुई थी तो दूसरी तरफ शिव भैया की शादी की ख़ुशी थी। इसी ख़ुशी में मैं और नेहा आज सुबह जल्दी से कॉलेज के लिए निकल आये थे घर से। आज हमे शादी के लिए छुटियाँ जो लेनी थी। (कॉलेज में अपना काम खतम करके अब हम आशीष और पूजा के साथ बैठे हैं। ) पूजा -हे ! तुम्हें लीव मिली क्या ? नेहा ...और पढ़े

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चाहत - 14

पार्ट -14 सब डिनर कर रहे हैं। मैं अपनी ड्रेस को साफ़ करने के बहाने से प्राची के रूम में आ गयी। ड्रेस साफ़ करना तो बहाना था। मैं तो सलिल से बात करना चाहती थी। जल्दी से पानी को टिश्यू पेपर से पोंछ कर मैं प्राची के कमरे से बाहर निकली तो देखा सलिल सामने से आ रहा है। वो जैसे ही मेरे पास आया मुझे लगा वो रुक कर बात करेगा मुझसे। लेकिन वो तो मेरे पास से निकल कर निचे जाने ही वाला था कि मैंने उसे आवाज़ दी। ...और पढ़े

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चाहत - 15

पार्ट - 15 सलिल का चूरमा नाम पड़ने की कहानी पर हर ठहाके मार कर हँस रहा है। सलिल गुस्से में सबको देख रहा है। मैं तो ये सोच रही हूँ ये सलिल इतना भोला -भाला भी हो सकता है कभी ? मुझे तो शक्ल से ही चालाक लगता है। सलिल - बस करो सब। क्या दांत दिखा रहे हो ? दादू - अच्छा ,भाई। बहुत हुआ मजाक। अब अंदर चलो सब। सलिल - एक मिनट दादू। दादू - क्या हुआ ? सलिल - पहले मुझे मेरी छाया से तो मिलने दीजिये। काका। कहाँ है वो ? नेहा ...और पढ़े

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चाहत - 16

पार्ट -16 सलिल के चले जाने से सब हैरान हुए। तभी शिव भैया बोले - बहुत रात हो गयी है। सब जा के सो जाओ। आशीष - लेकिन सलिल बीच में ही गाना छोड़ कर चला गया। वो ठीक तो है ना ? शिव भैया - अरे , उसे कुछ नहीं हुआ है। वो मूडी है। बस मन नहीं किया होगा गाने का तो चला गया। मैं देखता हूँ उसे। ( इतना कहकर शिव भैया चले गए। ) हम सब भी अपने रूम में आ गए। वहां शिव भैया सलिल से बात ...और पढ़े

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चाहत - 17

पार्ट -17 औरतों का तो शॉपिंग जनम सिद्ध अधिकार है। यही हाल हमारा था हम भी अपना अधिकार बखूबी ले रहे थे शॉपिंग करके। हमने सुबह से लेकर शाम तक हर फंक्शन के लिए कुछ न कुछ ख़रीदा। थक हार कर शाम को हम लोग घर लोटे। आकर थोड़ा आराम करके डिनर के लिए पहुंचे। दादाजी - तो बच्चो , बताओ कैसा लगा हमारा जयपुर ? नेहा - बहुत अच्छा दादाजी। छाया - आपको पता है दादू , आज इन सब ने कितनी शॉपिंग की है। जोहरी मार्केट से लेकर नेहरू बाजार तक ...और पढ़े

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