आखिर सच क्या है ? Ravi maharshi द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

आखिर सच क्या है ?

हेलो दोस्तों नमस्कार आज में आपके लिए लेकर आया हुं एक रहस्यमयी और  रोमांच से भरपूर कहानी जिसे जितना पढ़ोगे उतना ही मजा आएगा। 

तो चलिए कहानी की शुरुआत करते हैं।

राहुल और अंजलि का हनीमून – 

 भाग -1


राहुल और अंजलि की शादी पूरे रीति-रिवाजों और धूमधाम के साथ संपन्न हुई थी। दोनों के परिवार इस रिश्ते से बहुत खुश थे। शादी के बाद घर में मेहमानों की चहल-पहल, हँसी-मज़ाक और रस्मों का सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। राहुल एक समझदार और मेहनती युवक था, जबकि अंजलि अपने सौम्य स्वभाव और मधुर मुस्कान के लिए जानी जाती थी। शादी से पहले दोनों की मुलाकातें बहुत कम हुई थीं, इसलिए वे एक-दूसरे को अच्छी तरह जानने के लिए उत्सुक भी थे।

शादी के कुछ दिनों बाद राहुल ने अंजलि से कहा, "अब समय आ गया है कि हम कहीं घूमने चलें। परिवार की ज़िम्मेदारियों और मेहमानों की भीड़ से दूर कुछ दिन सिर्फ अपने लिए बिताएँ।"

अंजलि मुस्कुराई और बोली, "मैं भी यही सोच रही थी। लेकिन हम कहाँ जाएँगे?"

राहुल ने रहस्यमय अंदाज़ में कहा, "यह एक सरप्राइज़ है।"

अंजलि की उत्सुकता बढ़ गई। अगले दिन राहुल ने टिकट और होटल की बुकिंग दिखाते हुए बताया कि वे हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत पहाड़ी शहर मनाली जा रहे हैं। यह सुनकर अंजलि की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने बचपन से बर्फ से ढके पहाड़ों की तस्वीरें देखी थीं, लेकिन कभी वहाँ जाने का अवसर नहीं मिला था।

यात्रा का दिन आ गया। दोनों सुबह-सुबह घरवालों का आशीर्वाद लेकर निकल पड़े। रास्ते भर अंजलि खिड़की से बाहर के दृश्य देखती रही। जैसे-जैसे वे पहाड़ों के करीब पहुँच रहे थे, हवा में ठंडक बढ़ती जा रही थी। ऊँचे-ऊँचे देवदार के पेड़, घुमावदार सड़कें और दूर दिखाई देते बर्फीले पहाड़ मानो उनका स्वागत कर रहे थे।

मनाली पहुँचते ही दोनों एक सुंदर होटल में ठहरे, जिसकी बालकनी से ब्यास नदी का अद्भुत दृश्य दिखाई देता था। कमरे में पहुँचकर अंजलि ने खिड़की खोली और ठंडी हवा का आनंद लेते हुए कहा, "यह जगह तो किसी सपने जैसी लग रही है।"

राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं चाहता था कि हमारी नई ज़िंदगी की शुरुआत किसी ऐसी जगह से हो जो हमेशा हमारी यादों में रहे।"

शाम को दोनों होटल के पास स्थित एक छोटे से कैफ़े में गए। वहाँ बैठकर उन्होंने गर्म कॉफी पी और अपने जीवन के बारे में बातें कीं। राहुल ने अपने बचपन की कई मज़ेदार घटनाएँ सुनाईं, जिन्हें सुनकर अंजलि हँसते-हँसते लोटपोट हो गई। पहली बार दोनों को महसूस हुआ कि वे सिर्फ पति-पत्नी ही नहीं, बल्कि अच्छे दोस्त भी बन सकते हैं।

अगले दिन उन्होंने सोलंग वैली जाने का कार्यक्रम बनाया। सुबह-सुबह तैयार होकर वे वहाँ पहुँचे। चारों ओर फैली प्राकृतिक सुंदरता देखकर दोनों मंत्रमुग्ध रह गए। पहाड़ों की चोटियाँ बर्फ से ढकी थीं और सूरज की किरणें उन पर पड़कर उन्हें सुनहरा बना रही थीं।

अंजलि ने उत्साहित होकर कहा, "राहुल, देखो! वहाँ कितनी बर्फ है। मैं पहली बार बर्फ को इतनी नज़दीक से देख रही हूँ।"

वह दौड़कर बर्फ के पास गई और अपने हाथों में उसे भर लिया। राहुल उसकी खुशी देखकर मुस्कुरा रहा था। थोड़ी देर बाद दोनों ने बर्फ के गोले बनाकर एक-दूसरे पर फेंकना शुरू कर दिया। आसपास खड़े लोग भी उनकी मस्ती देखकर मुस्कुरा रहे थे।

कुछ देर बाद वे पैराग्लाइडिंग देखने लगे। अंजलि को ऊँचाई से डर लगता था, लेकिन राहुल ने उसका हौसला बढ़ाया। काफी सोच-विचार के बाद अंजलि तैयार हो गई। जब वह हवा में उड़ रही थी, तो नीचे फैली घाटी और पहाड़ों का दृश्य देखकर उसकी सारी घबराहट गायब हो गई। नीचे उतरते ही उसने खुशी से राहुल को गले लगा लिया और बोली, "यह मेरे जीवन का सबसे रोमांचक अनुभव था।"

शाम को होटल लौटते समय मौसम अचानक बदल गया। बादल घिर आए और हल्की बर्फबारी शुरू हो गई। सफेद फाहे आसमान से धीरे-धीरे गिर रहे थे। अंजलि ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और बर्फ के एक फाहे को पकड़ने की कोशिश की। वह पल दोनों के लिए बेहद खास था।

रात को होटल में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। वहाँ स्थानीय कलाकार हिमाचली लोकनृत्य प्रस्तुत कर रहे थे। राहुल और अंजलि भी दर्शकों के साथ कार्यक्रम का आनंद लेने लगे। कुछ देर बाद कलाकारों ने दर्शकों को भी नृत्य में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। पहले तो दोनों झिझके, लेकिन फिर मंच पर जाकर नृत्य करने लगे। उनकी खुशी देखकर सभी लोग तालियाँ बजाने लगे।

तीसरे दिन उन्होंने हिडिम्बा देवी मंदिर और पुराने मनाली की सैर की। मंदिर के आसपास का शांत वातावरण और ऊँचे देवदार के पेड़ मन को शांति प्रदान कर रहे थे। अंजलि ने मंदिर में प्रार्थना की कि उनका वैवाहिक जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहे।

मंदिर से बाहर निकलने के बाद दोनों पुराने मनाली की गलियों में घूमने लगे। छोटी-छोटी दुकानों में स्थानीय हस्तशिल्प और ऊनी कपड़े बिक रहे थे। अंजलि को एक सुंदर शॉल पसंद आई। राहुल ने बिना कुछ कहे वह शॉल खरीदकर उसे उपहार में दे दी। अंजलि की आँखों में खुशी चमक उठी।

उस शाम दोनों ब्यास नदी के किनारे टहलने गए। नदी का पानी तेज़ी से बह रहा था और उसकी आवाज़ वातावरण में एक मधुर संगीत की तरह गूँज रही थी। कुछ देर तक दोनों बिना कुछ बोले नदी को देखते रहे।

फिर अंजलि ने धीरे से कहा, "राहुल, शादी से पहले मैं थोड़ा डरती थी। मुझे लगता था कि पता नहीं हमारा रिश्ता कैसा होगा। लेकिन इन कुछ दिनों में मुझे महसूस हुआ है कि तुम बहुत अच्छे इंसान हो।"

राहुल ने उसकी ओर देखते हुए कहा, "सच कहूँ तो मैं भी थोड़ा घबराया हुआ था। लेकिन अब लगता है कि हम हर परिस्थिति का सामना साथ मिलकर कर सकते हैं।"

अंजलि मुस्कुरा दी। उस पल दोनों के बीच विश्वास और अपनापन पहले से कहीं अधिक गहरा हो गया।

उन्हें बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि उनकी इस खूबसूरत यात्रा में आगे एक ऐसा मोड़ आने वाला है, जो उनके रिश्ते की परीक्षा भी लेगा और उसे और अधिक मजबूत भी बनाएगा।

जारी रहेगा... (भाग 2 में आगे की कहानी)