Ep 2 - अल्फ़ाज़ ए इश्क़ भाग 5सूरज की पहली किरण के साथ ही आयरा के कदम फिर से उसी जाने-पहचाने रास्ते की तरफ बढ़ चले थे। कल रात की तन्हाई और दिल में अनगिनत सवालों का बोझ लिए, वह सुबह-सुबह उसी सुनसान पार्क में उस दीवार के पास पहुँची। उसके दिल में एक हल्की सी उम्मीद की किरण चमक रही थी कि शायद कबीर रात को आया हो और उस अधूरी पेंटिंग या अधूरे शेर को पूरा कर गया हो। लेकिन जैसे ही आयरा ने दीवार के पास जाकर देखा, उसका दिल बैठ गया। वह पेंटिंग और वह अधूरा शेर बिल्कुल वैसे ही लावारिस हाल में पड़े थे। वहाँ दूर-दूर तक कोई नहीं था। आयरा वहीं उस खामोश दीवार के सामने खड़ी होकर कबीर का इंतज़ार करने लगी। वक्त रेत की तरह फिसलता गया, ठंडी हवाएँ और तेज़ हो गईं, और धीरे-धीरे शाम का अंधेरा पूरे आसमान में छा गया। घंटों बीत जाने के बाद भी जब कबीर नहीं आया, तो आयरा की उम्मीदें टूटने लगीं। दिल में गहरा दर्द, मायूसी और तन्हाई समेटे हुए, वह बहुत ज़्यादा उदास होकर उस सुनसान रात के अंधेरे में अपने घर वापस लौट आई।अगले दिन सूरज ढलने से पहले आयरा फिर से उसी उम्मीद के साथ पार्क पहुँची, लेकिन हालात जस के तस थे—पेंटिंग और शेर वैसे ही अधूरे थे। लगातार दो दिनों से कबीर का इस तरह गायब रहना आयरा के मन को बुरी तरह झकझोर रहा था। तभी उसके दिमाग में एक बेहद डरावना और बुरा ख्याल आया—कहीं कबीर किसी मुसीबत में तो नहीं है? यह सोचते ही उसका दिल घबरा उठा। बिना कुछ सोचे-समझे, वह पागलों की तरह सीधे कबीर के घर की तरफ दौड़ पड़ी। वहाँ पहुँचने पर उसे पता चला कि कबीर की तबीयत बहुत ज़्यादा खराब है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह सुनते ही आयरा के पाँव तले ज़मीन खिसक गई और वह बिना एक पल गँवाए सीधे अस्पताल दौड़ पड़ी। अस्पताल के उस ठंडे कमरे में जब आयरा ने कबीर को बिस्तर पर कमज़ोर और बेसुध लेटे हुए देखा, तो उसकी आँखें भर आईं। कबीर की इस हालत को देखकर उसका दिल अंदर तक टूट गया, लेकिन उसकी फिक्र और मोहब्बत ने तुरंत उसके होंठों पर कुछ खूबसूरत और गहरे अल्फ़ाज़ ला दिए। कबीर का हाल जानते हुए उसने अपनी नम आँखों से यह प्यारी सी शायरी कही:"साँसों की डोर टूटने लगी है इस फासलें के दरमियान,पर तुम्हारी धड़कनों से ही ज़िंदा है मेरा हर अरमान।वक्त की आंधियों में भी कम न होगी हमारी ये चाहत,तुम सलामत रहो, बस यही है मेरी खुदा से आखिरी इबादत।"कबीर ने अपनी बंद आँखें धीरे से खोलीं और आयरा को अपने करीब पाकर उसके चेहरे पर एक सुकून भरी हल्की सी मुस्कान तैर गई। आयरा ने उसका काँपता हुआ हाथ अपने हाथों में थाम लिया, और उस अस्पताल के कमरे में खामोशी से बयां हो गया कि उनका इश्क़ दूरियों और बीमारियों से कहीं ज़्यादा बड़ा और मुकम्मल है।दर्द की हर एक शाम अब खुद-ब-खुद ढल जाएगी,तू जो पास है मेरे, हर मुश्किल टल जाएगी। 1 2 3