*बारिश वाला पहला प्यार*
मेरा नाम पूजा है। मैं इंदौर के पास एक छोटे से गांव में रहती हूँ। मैं 19 साल की हूँ और अभी 12वीं पास की है। मेरे पापा किसान हैं और हम बहुत साधारण परिवार से हैं।
पिछले साल की बात है, सावन का महीना था। रोज बहुत तेज बारिश होती थी। हमारे गांव के स्कूल में नया टीचर आया था, उसका बेटा था अमन। वो 21 साल का था और इंदौर में कॉलेज में पढ़ता था। छुट्टियों में वो अपने पापा के साथ गांव आया था।
मैंने उसे पहली बार खेत के पास देखा था। वो शहर के कपड़े पहने था और हाथ में कैमरा लेकर बारिश की फोटो ले रहा था। मैंने सोचा शहर का लड़का है, उसे गांव क्या पसंद आएगा।
अगले दिन मैं स्कूल से साइकिल पर घर आ रही थी। अचानक बहुत तेज बारिश शुरू हो गई। मेरी साइकिल कीचड़ में फंस गई और मैं गिर गई। मेरी सारी किताबें भीग गईं। मैं वहीं खड़ी होकर रोने लगी क्योंकि आस-पास कोई नहीं था।
तभी पीछे से अमन छाता लेकर आया। उसने कहा, अरे तुम रो क्यों रही हो? लाओ मैं मदद करता हूँ।
उसने मेरी साइकिल कीचड़ से निकाली। साइकिल की चेन उतर गई थी, चल नहीं रही थी। उसने कहा चलो, एक ही छाते में चलते हैं, मैं तुम्हें घर तक छोड़ देता हूँ।
हम दोनों एक ही छाते में चलने लगे। बारिश बहुत तेज थी। मैं पूरी भीग गई थी पर मुझे ठंड नहीं लग रही थी। दिल बहुत जोर से धड़क रहा था। पहली बार कोई लड़का मेरे इतने पास था।
रास्ते में उसने पूछा, तुम रोज अकेले स्कूल जाती हो? तुम्हें डर नहीं लगता? मैंने कहा, नहीं, आदत है।
घर आ गया। मैंने धीरे से कहा थैंक यू और अंदर भाग गई।
उसके बाद हर दिन हम स्कूल के रास्ते में मिलने लगे। कभी वो मेरे लिए इमली लेकर आता, कभी मैं उसके लिए भुट्टा। हम घंटों बातें करते। वो मुझे इंदौर की कहानियां सुनाता, बड़े-बड़े मॉल, कॉलेज की बातें। मैं उसे गांव की कहानियां सुनाती, खेत, मेले की।
धीरे-धीरे मुझे समझ आ गया कि मुझे उससे प्यार हो गया है। पर मैं बोल नहीं पा रही थी। गांव की लड़कियां प्यार के बारे में जल्दी बोलती नहीं हैं।
एक दिन बहुत तेज बारिश थी। अमन स्कूल नहीं आया। मैं उदास हो गई। शाम को वो हमारे घर आया, भीगा हुआ। हाथ में एक छोटी सी चिट्ठी थी।
उसने कहा, पूजा, मैं कल इंदौर वापस जा रहा हूँ। कॉलेज खुल रहा है। मैं तुम्हें कुछ देना चाहता था।
उसने चिट्ठी दी और चला गया।
मैंने अंदर जाकर चिट्ठी खोली। उसमें लिखा था, पूजा, मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ। जब से तुम्हें देखा है, तुम्हारे बारे में ही सोचता हूँ। क्या तुम भी मुझे पसंद करती हो? अगर हाँ, तो कल सुबह पीपल के पेड़ के नीचे मिलना। मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा।
मैं पूरी रात सो नहीं पाई। सुबह मैं जल्दी उठकर पीपल के पेड़ के नीचे गई। अमन वहाँ पहले से खड़ा था, हाथ में वही छाता लिए।
उसने मुझे देखा और मुस्कुराया। मैंने भी हाँ में सिर हिला दिया।
उसने कहा, मैं दिवाली पर फिर आऊंगा, तब पापा से तुम्हारे बारे में बात करूंगा।
आज एक साल हो गया है। अमन हर महीने गांव आता है। हम उसी पीपल के पेड़ के नीचे मिलते हैं। उसी छाते के नीचे। गांव वाले भी अब हमें जानते हैं और हमारे रिश्ते को पसंद करते हैं। पापा ने भी हाँ बोल दिया है।
प्यार बारिश जैसा ही होता है। धीरे-धीरे आता है और पूरे दिल को भिगो देता है।