रक्त-ड्रैगन का वारिस (सीज़न 1) एपिसोड 1 aakash kumar द्वारा पौराणिक कथा में हिंदी पीडीएफ

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रक्त-ड्रैगन का वारिस (सीज़न 1) एपिसोड 1

रक्त-ड्रैगन कुल के विशाल अखाड़े में आज पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी।
​चारों तरफ पत्थरों की ऊंची-ऊंची सीढ़ियों पर कुल के हजारों लड़ाके, सरदार और नौजवान जमा थे। बीच मैदान में लाल रंग का वह सदियों पुराना 'प्राचीन अग्नि-स्तंभ' किसी दैत्य की तरह सीना ताने खड़ा था। उस खंभे पर काले और लाल पत्थरों की नक्काशी थी, जिसके भीतर कुल के आदिम ड्रैगन की ज्वाला निरंतर सुलगती रहती थी। यह कोई मामूली खंभा नहीं था; यह वह कसौटी थी जो तय करती थी कि कुल के किस नौजवान की रगों में असली ड्रैगन का खून दौड़ रहा है और कौन सिर्फ बोझ बनकर जीने के लिए पैदा हुआ है।  
​अखाड़े के सबसे ऊंचे चबूतरे पर कुल के मुख्य बुजुर्ग और सरदार नादिर अपनी मखमली गद्दी पर बैठे थे। उनके चेहरे पर वही पुरानी, घमंडी मुस्कान थी और हाथ में मदिरा का चांदी का प्याला। हर बार जब कोई नया लड़का उस खंभे को छूता और खंभे से लाल या नारंगी लपटें उठतीं, तो भीड़ तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठती थी।
​"अगला!" मुख्य पुरोहित की भारी, रूखी आवाज पत्थरों से टकराई।
​उस एक पुकार के साथ ही भीड़ का सारा शोर अचानक थम गया। सन्नाटा ऐसा छा गया मानो किसी ने अखाड़े की हवा ही खींच ली हो। फिर फुसफुसाहटों का एक घिनौना दौर शुरू हुआ।
​"अरे... यह सच में आगे बढ़ रहा है?"
​"बेशर्म है बिल्कुल। जिसके बाप ने कुल की नाक कटवाई, वह आज खुद यहाँ अपनी औकात दिखाने आया है!"
​भीड़ के तानों और हिकारत भरी नज़रों के बीच से एक अठारह साल का लड़का आगे बढ़ रहा था।
​आर्यन।
​आर्यन के बदन पर कोई रेशमी चोगा या चमड़े का चमकता बख्तर नहीं था। उसने फटे हुए, मैले-कुचैले सूती कपड़े पहन रखे थे, जिन पर कई जगह टांके लगे थे। उसके चेहरे और बांहों पर पुरानी चोटों और कोड़ों के नीले निशान साफ दिख रहे थे, जो उसे रोज इस कुल के पहरेदारों से बिलावजह मिला करते थे। लेकिन उस गरीबी और लाचारी के बावजूद... उसकी चाल में कोई लड़खड़ाहट नहीं थी। उसके पैर नंगे थे, मगर ज़मीन पर ऐसे पड़ रहे थे जैसे कोई शिकारी खामोशी से अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ रहा हो। उसकी काली, गहरी आँखों में एक ऐसी शांत आग थी जो किसी भी ताने से बुझने वाली नहीं थी।
​"देख रहे हो नादिर भाई?" बगल में बैठे एक मोटे सरदार ने हंसते हुए कहा। "यह अनाथ कीड़ा आज भी समझता है कि यह अपने बाप की गद्दी हासिल कर लेगा।"
​नादिर ने अपनी मूंछों पर ताव देते हुए एक ठंडी चुस्की ली: "उम्मीद पालना कमजोरों की सबसे पुरानी बीमारी है। आज इस बीमारी का इलाज हमेशा के लिए हो जाएगा।"
​आर्यन उस विशाल अग्नि-स्तंभ की सीढ़ियां चढ़कर गोल चबूतरे पर पहुँचा।
​सामने खड़ा मुख्य पुरोहित उसे ऐसे घूर रहा था मानो कोई सड़ा हुआ कूड़ा सामने आ गया हो।
​"हाथ रख इस पर," पुरोहित ने नफरत से थूकते हुए कहा। "और जल्दी कर। असली योद्धाओं का वक्त तेरे जैसे भिखारी के पीछे बर्बाद नहीं कर सकते।"
​आर्यन ने पुरोहित की बात का कोई जवाब नहीं दिया। उसने एक गहरी सांस ली। उसके सीने के भीतर दिल किसी नगाड़े की तरह धड़क रहा था। उसने अपने कांपते, खुरदुरे दाहिने हाथ को उठाया और उस प्राचीन अग्नि-स्तंभ की दहकती हुई लाल शिला पर रख दिया।
​एक सेकंड... दो सेकंड... पांच सेकंड।
​पूरा मैदान दम साधे देख रहा था।
​लेकिन उस खंभे के भीतर से न कोई लाल चिनगारी फूटी, न नारंगी लपट उठी, और न ही पत्थरों पर ड्रैगन की कोई दहाड़ उभरी। वह सदियों पुराना खंभा, जो मामूली सिपाही के छूने पर भी दहक उठता था, आर्यन के हाथ का स्पर्श पाते ही उल्टे और ज्यादा बुझ गया! उसका लाल रंग फीका पड़कर राख जैसा भूरा हो गया, जैसे उस पत्थर की अपनी गर्मी भी ठंडी पड़ गई हो।
​पुरोहित की आँखों में वह क्रूर चमक कौंध गई जिसका वह इंतजार कर रहा था। उसने मुड़कर समूची भीड़ की तरफ हाथ फैलाए और अपनी पूरी ताकत से चिल्लाया:
​"शून्य आत्मिक शक्ति! इस लड़के के भीतर ड्रैगन-खून का एक कतरा तक नहीं है... यह सिर्फ एक नाकारा कचरा है!"  
​ठहाका!
​हजारों लोगों का वह अट्टहास किसी चट्टान की तरह आर्यन के सिर पर आ गिरा।
​"हाहाहा! कचरा! बिल्कुल अपने बाप की तरह नामर्द निकला!"
​"ऐसे भिखारी को तो कुल के सूअरों के बाड़े में फेंक देना चाहिए!"
​तभी भीड़ में से नादिर का बेटा, विक्रमादित्य, अपनी कमर पर बंधी सोने की तलवार चमकाता हुआ आगे बढ़ा। उसने आर्यन के सीने पर अपनी भारी बूट का ऐसा लात मारा कि आर्यन संभल नहीं पाया और सीढ़ियों से लुढ़कता हुआ नीचे पत्थरों की धूल में जा गिरा!
​"अरे ओ कूड़े के ढेर!" विक्रमादित्य ने आर्यन के सिर पर पैर रखते हुए उसकी गर्दन को ज़मीन में दबा दिया। "तूने सोचा भी कैसे कि तू हमारे बराबर खड़ा हो सकता है? तेरे बाप का खून तेरी रगों में नहीं, कुल के गद्दारों की नाली में बहता है!"
​आर्यन का चेहरा धूल और पत्थरों में सना हुआ था। उसके मुंह से खून का एक कतरा फूटकर मिट्टी में मिल गया। उसने अपने दोनों हाथों की मुट्ठियों को इतनी जोर से भींचा कि उसकी उंगलियों के पोर सफेद पड़ गए और नाखून हथेलियों का मांस चीरने लगे।
​"मेरे... पिता... गद्दार नहीं थे..." आर्यन की दबी हुई, गुर्राती आवाज उस धूल के बीच से निकली।
​"क्या बोला रे?" चबूतरे से नादिर खुद उठकर नीचे उतर आया।
​उसके भारी कदमों की आहट के साथ पूरी भीड़ खामोश हो गई। नादिर आर्यन के बिल्कुल सामने आकर खड़ा हुआ। उसने आर्यन के बिखरे बालों को अपनी मुट्ठी में जकड़ा और उसका सिर झटके से ऊपर खींच लिया।
​नादिर का चेहरा आर्यन की आँखों के बिल्कुल करीब था, और उसके मुंह से शराब की सड़ी हुई बास आ रही थी।
​"तू अभी तक उसी मुगालते में जी रहा है ना, अनाथ कुत्ते?" नादिर ने धीरे से, लेकिन इतनी जहरीली आवाज में फुसफुसाया कि वह बात सीधे आर्यन के कलेजे को चीर गई।  
​"तुझे लगता है कि तेरे बाप को किसी सीमांत युद्ध में दुश्मनों ने मारा था? हाहाहा! अरे मूर्ख... तेरे बाप को तो हमने खुद इसी अखाड़े के पिछले तहखाने में जंजीरों से बांधकर मारा था! उसने हमारे आगे झुकने से मना किया था, इसलिए मैंने अपने इन हाथों से उसकी रीढ़ की हड्डी को बीच से उखाड़ा था! वह दो दिन तक अपने ही खून के पोखर में कुत्तों की तरह गिड़गिड़ाता रहा... और जब वह मर गया, तो उसकी लाश को चीलों और कौवों के आगे फेंक दिया गया था!"  
​उस एक सच ने आर्यन के दिमाग के सारे परदों को एक झटके में जलाकर राख कर दिया।  
​उसके कानों में सीटियां बजने लगीं। दुनिया की सारी आवाजें, तानों के सारे शोर एक पल में गायब हो गए। उसकी आँखों के सामने सिर्फ अपने पिता का वह मुस्कुराता हुआ चेहरा घूमने लगा जो बचपन में उसे अपनी पीठ पर बिठाकर कहता था—'बेटा, ड्रैगन कभी झुकता नहीं...'
​और यहाँ... वे दरिंदे उसके पिता की कटी हुई रीढ़ पर बैठकर जश्न मना रहे थे!
​"तू... तूने मेरे पिता को..."
​आर्यन की आवाज अब किसी इंसान की नहीं लग रही थी।
​नादिर ने आर्यन की आँखों में देखा—और अचानक, उस खूंखार सरदार की रीढ़ में एक अनजानी, बर्फीली सिहरन दौड़ गई!
​आर्यन की आँखों की पुतलियां, जो सामान्य काली थीं, धीरे-धीरे अंगारे की तरह खूनी लाल होने लगी थीं। उसकी ठोड़ी से मिट्टी पर टपकती खून की बूंदें भाप बनकर उड़ रही थीं। उसकी छाती के ठीक केंद्र में, जहाँ हड्डियों की मज्जा होती है, वहाँ सदियों से सोई हुई एक ऐसी अमानवीय, आदिम और खूंखार धड़कन जाग उठी जिसने उस पूरे अखाड़े की ज़मीन को भीतर से हिलाकर रख दिया!  
​धड़क!
​एक अदृश्य शॉकवेव फूटी!
​नादिर का हाथ आर्यन के बालों से खुद-ब-खुद छिटककर दूर जा गिरा।
​वह 'प्राचीन अग्नि-स्तंभ', जो कुछ पल पहले बर्फ की तरह ठंडा पड़ चुका था, अचानक ज़मीन से लेकर आसमान तक थरथराने लगा! उस पत्थर के खंभे के बीचों-बीच एक भयानक, खूनी दरार फट पड़ी—और उस दरार से काले और लाल लावे की ऐसी गगनभेदी ज्वाला बाहर निकली जिसने अखाड़े की आधी छत को एक ही झटके में जलाकर राख कर दिया!  
​भीड़ की हंसी चीखों में बदल गई। लोग बदहवास होकर पीछे भागने लगे।
​धूल और खौलते हुए धुएं के बवंडर के बीच से, आर्यन धीरे-धीरे सीधा खड़ा हो रहा था। उसके फटे हुए कुर्ते के पीछे से, उसकी रीढ़ की हड्डी पर काले-लाल ड्रैगन के स्केल्स अंगारों की तरह चमक रहे थे, और उसके सिर के ऊपर हवा के शून्य में... एक विशाल, खूंखार रक्त-ड्रैगन की परछाई अपने खूनी जबड़े खोले साक्षात काल की तरह दहाड़ रही थी!
​आर्यन ने अपनी खून से भरी लाल आँखें उठाईं और सीधे नादिर के कांपते चेहरे पर टिका दीं।
​"नादिर... आज से इस कुल का हर एक पत्थर तेरे लहू का हिसाब मांगेगा!"
​(क्या आर्यन अपनी इस जागी हुई भयानक आदिम शक्ति से नादिर और उसके घमंडी बेटे को उसी अखाड़े में जिंदा गाड़ देगा? उस प्राचीन अग्नि-स्तंभ के फटने से पूरे साम्राज्य में कौन सा भूचाल आने वाला है? और क्या कुल के बाकी बुजुर्ग मिलकर इस नए जागे रक्त-ड्रैगन को अपनी तलवारों से दबा पाएंगे?)
​यह जानने के लिए सुनिए अगला एपिसोड—सिर्फ "रक्त-ड्रैगन का वारिस" पर! Pori kahani ko sunne ke liye pocket fm download kare pori stoty waha hai