द फोर लूजर्स
शैली: अपराध, एक्शन, रोमांस, कॉमेडी, थ्रिलर, इमोशन
मेरा नाम प्रीत गावड है। मेरी उम्र सोलह साल है। मैं महाराष्ट्र के जालसर गाँव से हूँ। अब मैं पिंपरी में रहता हूँ। मैं एक छात्र हूँ और युवा लेखक हूँ। मेरे पास लैपटॉप नहीं है, सिर्फ मोबाइल फोन है। मैंने अपनी सारी कहानियाँ रात में अपने मोबाइल पर लिखी हैं।
द फोर लूजर्स मेरी तीसरी और अब तक की सबसे बड़ी कहानी है। इससे पहले मैंने द रिटर्न ऑफ सीता और वरुण समुंदर का देवता लिखी थी जो अब गूगल पर सत्यापित हैं। गूगल पर प्रीत गावड सर्च करके आप देख सकते हैं।
ये कहानी किस बारे में है?
ये कहानी चार लूजर्स की है। लेकिन ये चार लूजर, लूजर नहीं हैं।
पहला है आर्या। वो पहले राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियन था। रिंग में उसने जीत हासिल की थी लेकिन जिंदगी में वो अपने छोटे भाई आदित्य को खो देता है। आदित्य भी बॉक्सर था। एक रात आदित्य अचानक गायब हो जाता है। वहीं से आर्या की जिंदगी बदल जाती है। वो बॉक्सिंग छोड़कर पुलिस में आता है ताकि किसी और को न खोना पड़े।
दूसरा है विक्की। वो आर्या का पुलिस पार्टनर है। लोग उसे कमजोर समझते हैं। हर परीक्षा में उसे कहा जाता है कि तुम विशेष शाखा के लायक नहीं हो। लेकिन विक्की हार नहीं मानता। वो धीरे सीखता है लेकिन कभी रुकता नहीं। उसकी कॉमेडी और दिल की सच्चाई इस कहानी में जान डालती है।
मेरे बारे में और मेरी विनती
मेरा नाम प्रीत गावड है। मेरी उम्र सोलह साल है। मैं महाराष्ट्र के जलगाँव जिले के जालसर नाम के एक छोटे से गाँव से हूँ। अभी मैं पिंपरी चिंचवड में रहता हूँ। मैं दसवीं कक्षा का छात्र हूँ। मेरी कोई बड़ी पहचान नहीं है। मैं एक साधारण परिवार से हूँ। मेरे पास लैपटॉप नहीं है, कंप्यूटर नहीं है। मेरे पास सिर्फ एक मोबाइल फोन है। इसी मोबाइल से मैं रात भर जागकर कहानियाँ लिखता हूँ।
मैं सोलह साल की उम्र में लेखक बनना चाहता हूँ और फिल्म मेकर बनना चाहता हूँ। मेरा सपना है कि मेरे गाँव जालसर की कहानी सिनेमा के बड़े पर्दे पर आए। द फोर लूजर्स सिर्फ एक कहानी नहीं है, ये मेरा सपना है। मैं चाहता हूँ कि ये कहानी सिनेमाघरों में आए। लोग इसे बड़े पर्दे पर देखें। लोग ताली बजाएं।
लेकिन मैं अकेला हूँ। मैं छोटा हूँ। मुझे नहीं पता कि फिल्म कैसे बनती है। मुझे आपकी मदद चाहिए। आप सब
तीसरी है रिया। वो एक निडर अपराध पत्रकार है। उसके पिता एक ईमानदार पुलिस अधिकारी थे जिनकी मौत को सड़क दुर्घटना बता दिया गया। लेकिन रिया को पता है
मैं आप सभी पाठकों से हाथ जोड़कर विनती करता हूँ। कृपया मेरी इस कहानी को अपना प्यार और आशीर्वाद दीजिए। आपका एक शेयर, आपका एक कमेंट मेरे लिए बहुत बड़ा हौसला है। मैं वादा करता हूँ कि मैं और भी अच्छी कहानियाँ लिखूंगा और एक दिन जालसर का नाम पूरी दुनिया में रोशन करूँगा। मुझे सपोर्ट कीजिए। धन्यवाद। जय श्री राम। जय महाराष्ट्र। प्रीत गावड। उम्र सोलह साल। गाँव जालसर से विश्व तक। मेरी कहानी को सिनेमा में लाने में मदद कीजिए।