baarish mein mila pyaar Dheeraj kumar Kashyap द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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baarish mein mila pyaar

बारिश में मिला प्यार
शहर में उस दिन बहुत तेज बारिश हो रही थी। सड़कों पर पानी भर गया था और लोग बारिश से बचने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। उसी बारिश में रोहन बस स्टॉप पर खड़ा बस का इंतजार कर रहा था।
तभी एक लड़की दौड़ती हुई वहां आई। उसके हाथ में किताबें थीं और बाल बारिश से भीग चुके थे। उसने रोहन के पास आकर पूछा, “क्या यहां से सिटी बस मिलेगी?”
रोहन ने मुस्कुराकर कहा, “हां, लेकिन आज बारिश की वजह से बस शायद देर से आएगी।”
लड़की ने अपना नाम बताया, “मैं सिया हूं।”
रोहन ने कहा, “मैं रोहन।”
दोनों कुछ देर चुपचाप खड़े रहे। अचानक तेज हवा चली और सिया की किताबें नीचे गिर गईं। रोहन ने तुरंत किताबें उठाकर उसे दे दीं।
सिया ने मुस्कुराकर कहा, “धन्यवाद।”
रोहन ने मजाक में कहा, “इतनी बारिश में किताबों को बचाना जरूरी है, वरना पढ़ाई भीग जाएगी।”
सिया हंस पड़ी।
थोड़ी देर बाद बस आई। सिया बस में चढ़ गई, लेकिन जाते-जाते उसने पीछे मुड़कर रोहन को देखा। रोहन भी उसे देख रहा था।
अगले दिन रोहन उसी बस स्टॉप पर फिर पहुंच गया। उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि वह वहां क्यों आया है। कुछ मिनट बाद सिया भी वहां आ गई।
सिया ने मुस्कुराकर पूछा, “आज भी बस देर से आएगी?”
रोहन ने कहा, “शायद… लेकिन अगर तुम साथ हो तो इंतजार अच्छा लगता है।”
सिया हल्का सा शरमा गई।
धीरे-धीरे दोनों की मुलाकात रोज होने लगी। बस स्टॉप उनकी दोस्ती का गवाह बन गया। वे अपनी जिंदगी की छोटी-बड़ी बातें एक-दूसरे से साझा करने लगे।
एक दिन सिया बहुत उदास थी। रोहन ने पूछा, “क्या हुआ?”
सिया ने बताया कि उसके पिता की नौकरी दूसरे शहर में लग गई है और उसका परिवार कुछ दिनों में वहां जाने वाला है।
रोहन कुछ देर चुप रहा। फिर बोला, “क्या तुम मुझे भूल जाओगी?”
सिया की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा, “अगर किसी को भूलना इतना आसान होता, तो शायद दिल की जरूरत ही नहीं होती।”
दोनों ने एक-दूसरे से वादा किया कि वे दूर होकर भी संपर्क में रहेंगे।
कुछ दिनों बाद सिया अपने परिवार के साथ दूसरे शहर चली गई। शुरुआत में दोनों रोज फोन पर बात करते थे। लेकिन धीरे-धीरे पढ़ाई, काम और जिंदगी की व्यस्तता बढ़ती गई।
एक साल बीत गया।
रोहन ने कई बार सिया को फोन किया, लेकिन उसका नंबर बंद था। उसने सोचा कि शायद सिया अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी है।
दो साल बाद रोहन उसी पुराने बस स्टॉप पर गया। बारिश हो रही थी। वह वहां कुछ देर खड़ा रहा और पुरानी यादों को याद करने लगा।
तभी पीछे से किसी ने कहा, “आज भी बारिश में बस का इंतजार कर रहे हो?”
रोहन ने पलटकर देखा।
सामने सिया खड़ी थी।
रोहन कुछ बोल नहीं पाया। उसकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए।
सिया ने कहा, “मैंने तुम्हें कभी नहीं भुलाया। मुझे बस सही समय का इंतजार था।”
रोहन ने पूछा, “फिर वापस क्यों आई हो?”
सिया ने मुस्कुराकर कहा, “क्योंकि मेरा घर जहां भी हो, मेरा दिल हमेशा तुम्हारे पास था।”
रोहन ने उसका हाथ थाम लिया।
उस दिन बारिश पहले से ज्यादा तेज थी, लेकिन दोनों को बारिश की एक बूंद भी महसूस नहीं हो रही थी।
रोहन ने कहा, “शायद हमारी कहानी उस दिन शुरू हुई थी, लेकिन आज जाकर पूरी हुई है।”
सिया मुस्कुराई और बोली, “नहीं रोहन, आज हमारी कहानी खत्म नहीं हुई… आज से शुरू हुई है।”
दोनों बारिश में साथ चलते हुए आगे बढ़ गए। पीछे वही पुराना बस स्टॉप था, जिसने उनके प्यार की पहली मुलाकात देखी थी और अब उनकी नई जिंदगी की शुरुआत का गवाह बन चुका था।